केंद्र सरकार की तीनों मोर्चों पर तैयारी: जल, थल, नभ में आतंकवाद पर करारा प्रहार सुनिश्चित।
नई दिल्ली, 24 फरवरी 2026
यह नीति आतंकवाद के हर रूप पर करारा प्रहार करने का संकल्प दर्शाती है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत अब किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रहार’ से राष्ट्रीय सुरक्षा में नया आयाम जुड़ेगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को देश की पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार’ को मंजूरी दी। यह नीति ‘जीरो टेरर टॉलरेंस’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो पारंपरिक हमलों के साथ-साथ साइबर खतरों, ड्रोन हमलों और डार्क वेब जैसी आधुनिक चुनौतियों का मुकाबला करने पर केंद्रित है। मंत्रालय का कहना है कि यह समग्र रणनीति सीमा पार आतंकवाद से लेकर डिजिटल साजिशों तक सभी मोर्चों पर भारत को मजबूत बनाएगी। महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, रेल, हवाई अड्डे और परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष तंत्र स्थापित किए जाएंगे।
खुफिया व कानूनी मजबूती: स्लीपर सेल्स व फंडिंग नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का प्लान
नीति स्पष्ट करती है कि खतरा केवल पड़ोसी देशों से प्रायोजित जिहादी समूहों तक सीमित नहीं। आपराधिक हैकर समूह और कुछ विदेशी ताकतें साइबर हमलों के जरिए भारत की सुरक्षा को भेदने की कोशिश कर रही हैं। पंजाब व जम्मू-कश्मीर में ड्रोन व रोबोटिक्स के दुरुपयोग को प्रमुख चुनौती माना गया है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में अल-कायदा व आईएसआईएस जैसे वैश्विक संगठनों की स्लीपर सेल गतिविधियों पर सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया, बिना किसी धर्म या समुदाय को जोड़े।
केंद्र की नई नीति ‘प्रहार’ जारी: आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, कोई समझौता नहीं।
‘प्रहार’ के तहत जल, थल और नभ तीनों मोर्चों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। आतंकी अब एन्क्रिप्टेड ऐप्स, क्रिप्टोकरेंसी, डार्क वेब और ड्रोन तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जिसका जवाब देने के लिए नई तकनीकी इकाइयां गठित होंगी। विदेशी धरती से संचालित चरमपंथी भारत में हिंसा भड़काने की साजिश रचते हैं, इसलिए खुफिया तंत्र को मजबूत किया जाएगा। नीति आर्थिक केंद्रों की रक्षा पर विशेष बल देती है।


