महिला आयोग ने दोहराया कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा एवं उन्हें त्वरित न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रायपुर, 10 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए दो दिवस की सुनवाई में कुल 100 प्रकरणों का निपटारा किया गया, जिनमें से 38 मामलों को नस्तीबद्ध किया गया।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आयोग कार्यालय, रायपुर में प्रदेश स्तरीय 176वीं तथा रायपुर जिले की 362वीं जनसुनवाई आयोजित की गई। सुनवाई में आयोग की सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा भी उपस्थित रहीं।
सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके पति (अनावेदक) की मृत्यु 22 अगस्त 2024 को हो चुकी है। अनावेदक वित्त मंत्रालय, नई दिल्ली में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर शासकीय सेवा में कार्यरत थे। आवेदिका और अनावेदक के मध्य तलाक नहीं हुआ था, हालांकि वर्ष 2021 से दोनों वैचारिक मतभेद के कारण अलग रह रहे थे। इसी दौरान अनावेदक द्वारा दूसरी महिला से विवाह किया गया, जिसे आयोग ने अवैधानिक एवं शून्य माना।
आयोग ने यह स्पष्ट किया कि आवेदिका ही विधिवत विवाहित पत्नी होने के कारण अनावेदक की एकमात्र वैधानिक उत्तराधिकारी है। आयोग ने आवेदिका को शासकीय सेवा के एवज में अनुकंपा नियुक्ति, समस्त जमा राशि एवं पेंशन की पात्रता का अधिकार मान्य किया। साथ ही आयोग ने निर्देशित किया कि वह महिला आयोग की ऑर्डरशीट के आधार पर आवश्यकतानुसार दीवानी, राजस्व अथवा आपराधिक प्रकरण दर्ज करा सकती है। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।
एक अन्य प्रकरण में उभय पक्ष पति-पत्नी के रूप में उपस्थित हुए। विस्तृत काउंसलिंग के उपरांत दोनों ने आपसी संबंध सुधारने तथा साथ रहने की सहमति व्यक्त की। आयोग ने मामले में बालोद सखी सेंटर को एक वर्ष तक औचक निरीक्षण का दायित्व सौंपते हुए भविष्य में किसी भी समस्या की स्थिति में आवेदिका को सखी सेंटर से संपर्क करने के निर्देश दिए। इस प्रकरण को भी नस्तीबद्ध किया गया।
एक अन्य मामले में आवेदिका ने आरोप लगाया कि अनावेदकगणों द्वारा उसे प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया तथा उसके दोनों बच्चों को उससे अलग कर लिया गया। साथ ही दहेज का सामान एवं गहने भी अनावेदक के पास रखे गए हैं। आयोग ने आवेदिका को मानसिक, शारीरिक एवं दहेज प्रताड़ना के संबंध में एफआईआर दर्ज कराने तथा न्यायालय के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा करने की समझाइश दी। इस प्रकरण को भी निर्देशों के साथ नस्तीबद्ध किया गया।


