रायपुर/छत्तीसगढ़/28/12/2025
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए कोर्ट में करीब 29,800 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 82 आरोपियों के खिलाफ यह अंतिम चालान पेश किया गया, जिसके साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
ईडी लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही थी। जांच के दौरान एजेंसी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में भी एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का खुलासा हुआ। ईडी के अनुसार, शराब की खरीदी, वितरण और खुदरा बिक्री की पूरी व्यवस्था को संगठित तरीके से नियंत्रित कर अवैध वसूली और कमीशनखोरी का नेटवर्क खड़ा किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि यह घोटाला तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिया गया। ईडी के मुताबिक, तत्कालीन आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक कथित सिंडिकेट ने शराब कारोबार को नियंत्रित किया। इस सिंडिकेट ने सरकारी नीति और तंत्र का दुरुपयोग कर भारी अवैध कमाई की, जिसे विभिन्न माध्यमों से आगे बढ़ाया गया।
चार्जशीट में आरोप है कि शराब दुकानों के आवंटन, ब्रांड चयन, सप्लाई चेन और भुगतान प्रक्रिया में जानबूझकर हेरफेर की गई। इससे न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ, बल्कि अवैध धन का इस्तेमाल राजनीतिक और निजी लाभ के लिए भी किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की गई है।
अब तक इस मामले में कई प्रभावशाली नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और सौम्य चौरसिया शामिल हैं। 29,800 पन्नों की चार्जशीट में डिजिटल सबूत, बैंक ट्रांजैक्शन, गवाहों के बयान और वित्तीय दस्तावेज संलग्न हैं। अब अदालत में शुरू होने वाला ट्रायल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए अहम माना जा रहा है।


