नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित आम चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आवामी लीग पर चुनावी प्रतिबंध लगाने के कुछ घंटों बाद ही बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की 17 साल के निर्वासन के बाद ढाका लौटने पर भव्य स्वागत हुआ। यह घटनाक्रम एकतरफा चुनाव की आशंका पैदा कर रहा है, जिस पर भारत गहरी नजर रखे हुए है।
तारिक रहमान 25 दिसंबर को ढाका पहुंचे और बीएनपी की कमान संभालने की तैयारी में हैं। जानकारों का मानना है कि आवामी लीग के बहिष्कार से चुनाव पिछले तीन दशकों जैसा एकतरफा हो सकता है। 2014 में बीएनपी ने बहिष्कार किया, 2018 में खालिदा जिया समेत प्रमुख नेता जेल पहुंचे, जबकि 2024 में आवामी लीग को ही बैन कर दिया गया। शेख हसीना के भारत आने के बाद यूनूस सरकार ने खालिदा जिया को रिहा किया, लेकिन निष्पक्षता पर सवाल बरकरार हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने तारिक रहमान की वापसी पर कहा, “हम इसे बांग्लादेश चुनाव के समावेशी होने के संदर्भ में देख रहे हैं।” भारत के लिए खालिदा जिया का 2001-06 कार्यकाल चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने 12 वर्षों में भारत का केवल एक दौरा किया, जबकि पाकिस्तान का दो। इस दौरान सीमा उल्लंघन और आतंकवाद के मुद्दे तनाव बढ़ाते रहे।
विश्लेषकों का कहना है कि बीएनपी की सत्ता में वापसी से भारत-बांग्लादेश संबंधों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। तारिक रहमान की पाकिस्तान समर्थक छवि और कट्टरपंथी तत्वों से नजदीकी चिंता का विषय है। भारत व्यापार, सुरक्षा और जल बंटवारे जैसे अहम हितों की रक्षा के लिए सतर्क है। एकतरफा चुनाव से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
नई दिल्ली बांग्लादेशी घटनाक्रम पर कड़ी निगरानी रखे हुए है। समावेशी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं। बांग्लादेश का राजनीतिक परिदृश्य भारत की पड़ोसी नीति को परख रहा है।


