“सरकार को शराब नियंत्रण के साथ शिक्षा को सशक्त रूप से प्राथमिकता देनी चाहिए, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र का स्वस्थ निर्माण संभव है।”
रायपुर/छत्तीसगढ़ _01/12/2025
विशेषज्ञों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों का स्पष्ट मत है कि किसी भी समाज का भविष्य उसके विद्यालयों में तैयार होता है, इसलिए सरकार को शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने के निर्देशों ने इस बहस को और गति दी है।
शिक्षकों को केवल चुनाव कार्य सौंपने का आयोग का निर्देश स्वागत योग्य
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों से केवल चुनाव संबंधी कार्य—मतदान, मतगणना और प्रशिक्षण—ही लिए जाएंगे। अब उन्हें पशु गणना, सर्वेक्षण, मतदाता सूची सुधार या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकार को शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा वह आधार है जो समाज और राष्ट्र की दिशा तय करता है।
यदि शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और स्थिर माहौल में काम करेंगे, तभी वे छात्रों को सर्वोत्तम मार्गदर्शन दे पाएंगे।
विशेषकर उन शिक्षकों को नियमित किए जाने की मांग दोहराई जा रही है, जिन्होंने वर्षों तक सेवा दी है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है।
राष्ट्र के विकास का मूल—मजबूत शिक्षा प्रणाली
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार वास्तव में विकसित और सशक्त समाज का निर्माण करना चाहती है, तो उसे शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
शिक्षकों की समस्याओं का समाधान, संसाधनों में बढ़ोतरी, स्कूलों का सशक्तिकरण और छात्रों के लिए सुरक्षित व प्रेरक माहौल—ये सभी कदम समय की मांग हैं।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार वास्तव में विकसित और सशक्त समाज का निर्माण करना चाहती है, तो उसे शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
शिक्षकों की समस्याओं का समाधान, संसाधनों में बढ़ोतरी, स्कूलों का सशक्तिकरण और छात्रों के लिए सुरक्षित व प्रेरक माहौल—ये सभी कदम समय की मांग हैं।


