स्वदेशी से समृद्ध भारत की ओर एक कदम:
नई दिल्ली, 09 सितम्बर 2025
प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के आह्वान के तहत शिक्षा और कौशल विकास मंत्रालयों ने आज राजधानी दिल्ली में “स्वदेशी से समृद्ध और विकसित भारत” विषय पर एक उच्च स्तरीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक रणनीतिक मार्गदर्शन तैयार करना था, जो शिक्षा और कौशल उन्नयन के समन्वय से संभव हो सके।
📌 मुख्य बिंदु संक्षेप में:
शिक्षा और कौशल को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दो स्तंभ के रूप में मान्यता।
विद्यालयों और कॉलेजों में स्वदेशी चेतना और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर।
NEP 2020 की रूपरेखा को नवाचार, सांस्कृतिक जुड़ाव और कौशल आधारित शिक्षा का आधार बताया गया।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में शिक्षा और कौशल विकास को केंद्रीय भूमिका।
जन संपर्क, जन भागीदारी और जन अभियान के माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को मिशन से जोड़ने का आह्वान।
🎙️ नेताओं के प्रमुख वक्तव्य:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा,
“शिक्षा और कौशल एक-दूसरे की पूरक शक्तियां हैं, जिन्हें मिलकर आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए काम करना होगा। स्कूली शिक्षा के स्तर पर ही आत्मनिर्भरता के बीज बोए जाएं, जिससे छात्र स्वदेशी भावना के दूत बनें।”
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री श्री जयंत चौधरी ने कहा,
“भारत को केवल वैश्विक परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया नहीं देनी, बल्कि उन्हें आकार भी देना है। देश को विश्व की कौशल राजधानी और नवाचार केंद्र के रूप में ब्रांड करना हमारा लक्ष्य है।”
शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने शिक्षा और अनुसंधान को जोड़ने पर बल देते हुए कहा,
“उच्च शिक्षा संस्थानों को नवाचार और अनुसंधान के केंद्र बनाकर, छात्रों को विश्व की नेतृत्वकर्ता कौशल शक्ति के रूप में तैयार किया जाए।”
🏫 संस्थानों की भागीदारी और भविष्य की कार्ययोजना:
बैठक में यह तय किया गया कि NCERT, SCERT, DIET, IIT, IIM, ITI, सेक्टर स्किल काउंसिल्स सहित सभी संस्थान अपने पाठ्यक्रम और गतिविधियों को मिशन स्वदेशी के अनुरूप ढालें। युवाओं को भारतीय शिल्प, परंपरा और नवाचार से जोड़ने के लिए डिजिटल कंटेंट, पॉडकास्ट, प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विकास किया जाएगा।
इसके अलावा, आईटीआई प्रशिक्षुओं और स्थानीय कौशल योजनाओं को ग्राम और समुदाय आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
📌 निष्कर्ष और प्रतिबद्धता:
विचार-विमर्श का समापन विभिन्न सचिवों द्वारा प्रस्तुत व्यवहारिक और कार्यान्वयन योग्य सुझावों के साथ हुआ। बैठक में इस बात की पुनः पुष्टि की गई कि भारत सरकार 2047 तक देश को एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा और कौशल विकास को अपनी नीति का केंद्रीय स्तंभ बनाएगी।


