सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को निर्देश दिया है कि अब टीचिंग सर्विस से जुड़े सभी शिक्षकों को अपनी सर्विस में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी TET पास करना जरूरी होगा।
नई दिल्ली, 1 सितंबर 2025
सुप्रीम कोर्ट ने आज शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि अब टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना हर शिक्षक के लिए जरूरी होगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
🔹 किन शिक्षकों पर लागू होगा आदेश?
सेवानिवृत्ति तक केवल 5 साल सेवा शेष वाले शिक्षक अपनी नौकरी पर बने रहेंगे भले ही TET पास न किया हो।
लेकिन अगर प्रमोशन चाहते हैं, तो TET पास करना अनिवार्य होगा।जिनकी सेवा में 5 साल से अधिक बचे हैं उन्हें अगले दो साल में TET पास करना होगा।
ऐसा न करने पर उन्हें अनिवार्य रिटायरमेंट लेना होगा।
यदि पात्रता अनुसार सेवा अवधि पूरी हो चुकी है तो उन्हें टर्मिनल बेनिफिट्स भी मिलेंगे।
🔹 अल्पसंख्यक संस्थानों पर क्या असर?
सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल कि क्या TET अल्पसंख्यक (Minority) शिक्षण संस्थानों पर भी लागू होगा, अभी लंबित रखा है। यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष बड़ी संवैधानिक पीठ को भेज दिया गया है।
🔹 फैसले की पृष्ठभूमि
शिक्षा का अधिकार (RTE Act, 2009) बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की गारंटी देता है।
कोर्ट का मानना है कि गुणवत्ता वाले शिक्षक ही शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठा सकते हैं।इसलिए न्यूनतम योग्यता के रूप में TET को अब अटल मानक घोषित कर दिया गया है।
🔹 असर और महत्व
यह फैसला देशभर के लाखों शिक्षकों पर सीधा असर डालेगा।
जो शिक्षक पहले से कार्यरत हैं, उन्हें अब स्पष्ट समयसीमा में योग्यता साबित करनी होगी।नए उम्मीदवारों और प्रमोशन चाहने वालों के लिए भी अब TET पास किए बिना कोई विकल्प नहीं बचा है।
शिक्षा के स्तर को मज़बूत करने की दिशा में यह कदम क्रांतिकारी माना जा रहा है।


