विशेषज्ञों ने प्रकाश प्रदूषण और सतत वास्तुकला पर दिया जोर
रायपुर, 18 अगस्त 2025 (PIB):
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के आर्किटेक्चर एवं प्लानिंग विभाग द्वारा “कृत्रिम प्रकाश और पर्यावरण” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के पर्यावरणीय प्रभाव और सतत वास्तुकला एवं शहरी नियोजन में इसके महत्व पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रकाश प्रदूषण गंभीर चुनौती
मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय सोसायटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेटिंग एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स (ISHRAE) के क्षेत्रीय निदेशक (पूर्व) और ऊर्जा विशेषज्ञ अमरेंद्र गोस्वामी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रकाश प्रदूषण की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खराब या अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है। गोस्वामी ने मानव आवश्यकताओं और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए स्पष्ट मानक और विनियमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
अकादमिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का संगम
संगोष्ठी की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. देबाशीष सान्याल ने की, जबकि इसका सफल समन्वयन सहायक प्राध्यापक कविता बिस्वास शर्मा ने किया। सभी सेमेस्टर के छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए सततता को नवोन्मेषी डिज़ाइन प्रथाओं में शामिल करने पर विचार साझा किए।
छात्रों और संकाय को मिला नया दृष्टिकोण
संकाय सदस्यों ने कहा कि इस संगोष्ठी ने न केवल कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ाई, बल्कि छात्रों को पर्यावरण-संवेदनशील दृष्टिकोण से डिज़ाइन करने के लिए प्रेरित भी किया।
अकादमिक ज्ञान और विशेषज्ञ अनुभव को जोड़ते हुए, यह सत्र जिम्मेदार वास्तुकला अभ्यास के महत्व को रेखांकित करता है और भविष्य के पेशेवरों को सतत निर्मित पर्यावरण में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।


