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Saturday, March 7, 2026

वोटर लिस्ट अपडेट में नागरिकता का संकट: आधार, वोटर आईडी भी बेअसर”

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पटना/दिल्ली-NCR, 31 जुलाई 2025(मीडिया सूत्र)

वोटर लिस्ट विशेष पुनरीक्षण अभियान पर विवाद: नागरिकता साबित करने के लिए ‘कठिन शर्तें’, आम लोग परेशान।बिहार में चल रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान में आम पहचान पत्रों को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता”।बिहार चुनाव आयोग ने नागरिकता साबित करने के लिए 11 दस्तावेज तय किए।
विपक्ष बोला- गरीबों को किया जा रहा परेशान”
बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चल रहे वोटर लिस्ट विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) ने नागरिकता की बहस को तेज कर दिया है। इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं को नाम जुड़वाने के लिए नागरिकता साबित करनी होगी, लेकिन आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और पैन कार्ड जैसे सबसे आम दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जाएंगे
कौन से दस्तावेज मान्य हैं?
बिहार चुनाव आयोग ने नागरिकता साबित करने के लिए 11 दस्तावेजों की सूची जारी की है:
सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा जारी पहचान पत्र/पेंशन ऑर्डर (1 जुलाई 1987 से पहले)
किसी अधिकृत निकाय द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र
भारतीय पासपोर्ट ।
किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय का मैट्रिकुलेशन/शैक्षणिक प्रमाण पत्र ।
स्थायी निवास प्रमाण पत्र (राज्य सरकार द्वारा जारी)
वन अधिकार प्रमाण पत्र ।
जाति प्रमाण पत्र (एससी/एसटी/ओबीसी)।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू) ।
परिवार रजिस्टर (राज्य या स्थानीय निकाय द्वारा तैयार)
सरकार द्वारा भूमि या आवास आवंटन का प्रमाण पत्र
भारत सरकार या प्राधिकरण द्वारा जारी पुराने दस्तावेज (1 जुलाई 1987 से पहले) ।
कौन से दस्तावेज मान्य नहीं हैं?
आधार कार्ड: UIDAI के अनुसार यह केवल पहचान का माध्यम है, नागरिकता का नहीं।
वोटर आईडी कार्ड (EPIC): यह केवल मतदाता सूची पर आधारित होता है, जिसमें गलत प्रविष्टियां संभव हैं।
पैन कार्ड: यह विदेशी नागरिकों को भी जारी हो सकता है।
राशन कार्ड: पहचान और निवास प्रमाण है, नागरिकता का नहीं।
नागरिकता कैसे साबित करें?
भारतीय पासपोर्ट: केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी होता है, इसलिए सबसे सशक्त प्रमाण।
जन्म प्रमाण पत्र: नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अनुसार मान्य।
नागरिकता प्रमाण पत्र: गृह मंत्रालय द्वारा जारी, जैसे विदेशी नागरिक को नागरिकता दिए जाने पर।
डोमिसाइल सर्टिफिकेट: राज्य सरकार द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण।
NRC रिकॉर्ड: जहां लागू हो, वह भी नागरिकता प्रमाण के रूप में मान्य होगा।
ग्रामीण व गरीब वर्ग के लिए बड़ी चुनौती
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ये दस्तावेज़ अधिकांश ग्रामीणों और गरीब वर्ग के पास उपलब्ध नहीं हैं। जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ शहरी या सरकारी सेवा से जुड़े लोगों के पास अधिकतर पाए जाते हैं, जबकि दूरदराज के गांवों में रहने वाले, गरीब और अशिक्षित वर्ग को नाम जुड़वाने में भारी दिक्कत हो रही है।
विपक्ष के आरोप
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग यह प्रक्रिया लागू कर आम नागरिकों को परेशान कर रहा है। उनका कहना है कि
“यह वोटर लिस्ट अपडेट का नाम लेकर नागरिकता साबित करने की कठिन प्रक्रिया थोपने जैसा है, जिससे बड़ी संख्या में गरीबों और हाशिए पर खड़े वर्ग के लोग वंचित हो सकते हैं।”
आम नागरिकों की चिंता
Delhi-NCR से लेकर बिहार के गांवों तक लोग इस बात को लेकर उलझन में हैं कि नागरिकता का प्रमाण आखिर कैसे पेश करें। लोगों का कहना है कि आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज़ ही उनके पास हैं, जो अब मान्य नहीं माने जा रहे।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के लिए है, लेकिन लोगों की आशंकाएं और सवाल इसे केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पहचान के अधिकार का मुद्दा बना रहे हैं।

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