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Saturday, March 7, 2026

भक्ति, परंपरा और गौरव का संगम: मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर किया कांवड़ियों का स्वागत

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भोरमदेव (कवर्धा)/रायपुर, 28 जुलाई 2025।
सावन मास के तीसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ की धरती श्रद्धा और शिवभक्ति से सराबोर हो गई, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भोरमदेव मंदिर में हजारों कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। “हर-हर महादेव” के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठा।

इस ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य के साक्षी बने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और श्री अरुण साव, जो इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे।

भक्ति और प्रशासन का अभूतपूर्व संगम

पुष्पवर्षा के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं बाबा भोरमदेव मंदिर में पहुंचकर विशेष पूजा, मंत्रोच्चार और रुद्राभिषेक किया तथा प्रदेशवासियों की समृद्धि, सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से आत्मीय संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा—

“श्रावण मास के इस पावन सोमवार को बाबा भोरमदेव की धरती पर भक्तों के साथ होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और आस्था की अद्वितीय मिसाल है।”

इस मौके पर उन्होंने 151 किमी पदयात्रा कर भोरमदेव पहुंचने वाली पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा का भगवा वस्त्र व श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना स्वीकृत की गई है। यह परियोजना मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुवा, सरोदा जलाशय तक के समग्र धार्मिक क्षेत्र का कायाकल्प करेगी।

इसके साथ ही अनूपपुर (म.प्र.) में 5 एकड़ भूमि पर श्रद्धालु भवन के निर्माण की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे अमरकंटक यात्रा और अधिक सुविधाजनक होगी।

पौराणिक परंपरा और ऐतिहासिक महत्व

11वीं शताब्दी का भोरमदेव मंदिर, कवर्धा से 18 किमी दूर चौरा ग्राम में स्थित है, जिसे छत्तीसगढ़ का “खजुराहो” भी कहा जाता है। श्रावण मास में यहां कबीरधाम, बेमेतरा, खैरागढ़, मुंगेली, राजनांदगांव समेत मध्यप्रदेश के अमरकंटक से हजारों कांवड़िए पदयात्रा कर जलाभिषेक हेतु पहुंचते हैं।

“बोल बम”, भजनों और शिव नाम संकीर्तन के बीच श्रद्धालु 150 किलोमीटर की यात्रा तय कर भोरमदेव, डोंगरिया के बूढ़ा महादेव और जलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते हैं।


जनचौपाल 36 विशेष

सावन की महिमा, शिव की भक्ति और शासन की संकल्पशक्ति—भोरमदेव में एक साथ सजीव हुईं।


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