रायपुर, 20 जुलाई | जनचौपाल36
छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून आशाप्रद और संतोषजनक
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं सामान्य से अधिक तो कहीं कम वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि अधिकांश जिलों में औसत से अधिक वर्षा हो सकती है। फिलहाल प्रदेशभर में बादल छाए हुए हैं और तेज हवाओं की सरसराहट से वातावरण में ठंडक घुल गई है।राज्य में लगातार हो रही वर्षा ने जल संकट से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के जलाशयों को राहत की सांस दी है। जल संसाधन विभाग द्वारा 19 जुलाई को जारी टैंक गेज रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 46 प्रमुख सिंचाई जलाशयों में औसतन 49.78 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। इस मौसम की यह अब तक की सबसे सकारात्मक स्थिति है।
बिलासपुर स्थित खारंग डेम और दुर्ग का खपरी जलाशय शत-प्रतिशत भराव के साथ लबालब हो चुके हैं। झुमका (कोरिया) डेम 98.84% और छिरपानी (कबीरधाम) 91.14% जलभराव के साथ छोटे जलाशयों की सूची में शीर्ष पर हैं। वहीं मनियारी (मुंगेली) 93.17% और गंगरेल (धमतरी) 50% से ऊपर के स्तर पर हैं।
गंगरेल बांध में तेज़ी से जलस्तर वृद्धि
धमतरी और कांकेर जिलों में हो रही लगातार बारिश के चलते गंगरेल डेम में जबरदस्त आवक बनी हुई है। 22 जुलाई की रात तीन बजे, गंगरेल के कैचमेंट क्षेत्र से 90555 क्यूसेक प्रति सेकेंड की दर से पानी की आवक दर्ज की गई, जिससे बांध में 16 टीएमसी से अधिक जलभराव हो गया है। गंगरेल के साथ सोंढूर, मुरूमसिल्ली और दुधावा जैसे अन्य बांधों में भी जलस्तर में तीव्र वृद्धि हो रही है।
अन्य प्रमुख जलाशयों की स्थिति
रविशंकर जलाशय (धमतरी): 53.26%
मिनीमाता बांगो डेम (कोरबा): 52.78%
तांडुला डेम (बालोद): 29.29%
सोंढूर डेम: 23%
मुरूमसिल्ली डेम: 21.57%
केलो डेम: 30.96%
कोडार डेम: 38.11%
सूख चुके बांधों में अब जीवन संचार
कुछ सप्ताह पहले तक सूखे पड़े मुरूमसिल्ली बांध में अब 15682 क्यूसेक की दर से पानी की आवक हो रही है और जलभराव तीन टीएमसी पार कर चुका है। दुधावा डेम में 5000 क्यूसेक से अधिक आवक से चार टीएमसी, और सोंढूर डेम में 3500 क्यूसेक के साथ साढ़े तीन टीएमसी जलभराव दर्ज हुआ है।
जल निकासी भी जारी
जल संसाधन विभाग ने जल नियंत्रण नीति के तहत खारंग, मनियारी, केलो और सीतानदी बेसिन के डेमों से नहरों और स्लूइस गेट्स के माध्यम से नियंत्रित जल निकासी शुरू कर दी है। जल स्तर की निगरानी को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी के निर्देश जारी किए गए हैं।
कुछ जलाशय अब भी नीचे स्तर पर
जहाँ कई डेम लबालब हैं, वहीं अरपा भैंसाझार, मायना, मटियामोती, बलार जैसे जलाशयों में अब भी जलस्तर 30 प्रतिशत से कम है, जिन्हें आने वाले दिनों में और वर्षा की दरकार है।
विशेष टिप्पणी:
राज्य के जलाशयों में हो रही यह सकारात्मक भराव न केवल आने वाले कृषि सत्र के लिए शुभ संकेत है, बल्कि जल संकट से राहत भी प्रदान करेगा। जल संसाधन विभाग की त्वरित रिपोर्टिंग और निगरानी ने इस बार हालात पर बेहतर नियंत्रण दिखाया है।


