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Saturday, March 7, 2026

श्रावण के पहले सोमवार पर उज्जैन में महाकाल की भक्ति में डूबी अवंतिका नगरी

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भव्य भस्मारती, हजारों श्रद्धालु, सजे-धजे नगर में निकली बाबा महाकाल की सवारी

उज्जैन, 14 जुलाई 2025 | जनचौपाल36
श्रावण मास के पहले सोमवार को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। तड़के से ही महाकाल मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। सम्पूर्ण अवंतिका नगरी “जय श्री महाकाल” और “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठी।
मंदिर के पट सोमवार रात 2:30 बजे खोल दिए गए। इसके बाद भस्मारती का पावन आयोजन हुआ, जिसे देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु उमड़े। कार्तिकेय मंडपम की अंतिम पंक्तियों से चलित भस्मारती दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी। सुबह 5 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ हुए, जो रात तक शयन आरती तक जारी रहेंगे।
महाकाल की पालकी सजे-धजे नगर भ्रमण पर
परंपरा अनुसार, श्रावण-भादो मास में बाबा महाकाल की सवारी प्रत्येक सोमवार को नगर भ्रमण के लिए निकलती है। इस वर्ष यह छह बार निकाली जाएगी। पहली सवारी आज दोपहर 4 बजे भव्य श्रृंगार और विधिविधान के साथ निकलेगी। पालकी को फूल-मालाओं और रत्नाभूषणों से सजाया गया है, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़ेंगे।
प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्थाएँ
श्रावण के पावन पर्व और श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर परिसर में पेयजल, छांव, बैठने की जगह और स्वास्थ्य सुविधा के इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और वालंटियर्स तैनात हैं।
श्रावण मास में शिव भक्ति का विशेष पुण्य
मंदिर के पुजारी के अनुसार, “श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायक मानी जाती है। बाबा महाकाल की पूजा से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।”
स्थानीय निवासी और श्रद्धालु इस दिन को अत्यंत पुण्यकारी मानते हैं। एक श्रद्धालु ने कहा, “श्रावण का पहला सोमवार हमारे जीवन का सबसे पवित्र दिन होता है, बाबा की सवारी देखना परम सौभाग्य है।”
🛕✍️ जनचौपाल36 न्यूज डेस्क

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