JAN_CHOUPAL 36
रायपुर। _प्रदेश में सक्रिय मानसून और लगातार हो रही बारिश का असर अब आम लोगों की रसोई पर भी साफ नजर आने लगा है। छत्तीसगढ़ की मंडियों में सब्जियों की आवक घटने से थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतों में तेज़ उछाल देखा जा रहा है। स्थानीय उत्पादन घटने और बाहरी राज्यों पर निर्भरता के चलते आम जनता को सब्जियों के लिए अब अपनी जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।
बारिश के चलते प्रदेश की मंडियों में सब्जियों की आपूर्ति में करीब 25% की हिस्सेदारी स्थानीय जिलों से हो रही है, जबकि 75% से अधिक आपूर्ति कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों से आ रही है। इन राज्यों में भी मूसलाधार बारिश ने फसलों को प्रभावित किया है, जिससे थोक मूल्यों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है।
सब्जियों के थोक बाजार में तेजी से बढ़े भाव:
टमाटर: कर्नाटक से आने वाला टमाटर अब ₹800 प्रति कैरेट तक पहुंच चुका है। सीमित मात्रा में माल भेजा जा रहा है, जिससे थोक व्यापारी घाटे में बेचने को मजबूर हैं।
फूलगोभी और पत्तागोभी: महाराष्ट्र से आने वाली ये सब्जियां भी महंगी हो गई हैं।
शिमला मिर्च: राजस्थान से आ रही शिमला मिर्च की आवक घटने से इसके दाम भी आसमान छू रहे हैं।
परवल और आलू: पश्चिम बंगाल से आ रहे इन सब्जियों में भी परिवहन लागत और बारिश के कारण महंगाई आई है।
धनिया, हरी मिर्च, गाजर और बीट: मध्यप्रदेश से आ रही इन हरी सब्जियों की कीमतों में भी औसतन 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा रही है।
व्यापारियों के अनुसार, लगातार बारिश के चलते माल खराब होने का खतरा अधिक है, जिससे वे घाटा सहकर भी सब्जियां मंगा रहे हैं। कई व्यापारी बारिश के कारण परिवहन व्यवस्था बाधित होने से समय पर माल नहीं मंगा पा रहे हैं।
रायपुर की एक सब्जी विक्रेता रेखा साहू बताती हैं कि, “हर दिन सब्जियों के दाम बदल रहे हैं। ग्राहक नाराज़ होते हैं, लेकिन हमारे पास भी कोई विकल्प नहीं है। बारिश ने हमारे धंधे पर सीधा असर डाला है।”
निष्कर्ष: आने वाले दिनों में यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो सब्जियों की कीमतों में और तेजी आ सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं को संयम बरतने और मौसमी विकल्पों को अपनाने की जरूरत है।
जन चौपाल 36 समाचार डेस्क


