रायपुर, 25 जून 2025 – छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” के चलते अब राज्य में कोई भी स्कूल शिक्षक-विहीन नहीं बचा है। यही नहीं, एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या में भी 80% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
🖋️📝:_यह अभियान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य है सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार। राज्य में पहले जहां 453 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं था, वहीं अब सभी स्कूलों में कम से कम एक शिक्षक की तैनाती सुनिश्चित कर दी गई है।
👍:_स्कूलों की ग्रेडिंग के साथ जनप्रतिनिधि जांच करेंगे
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस अभियान के तहत स्कूलों की नियमित ग्रेडिंग, सामाजिक ऑडिट, और अभिभावक-शिक्षक संवाद को संस्थागत रूप दिया गया है। जिलों में प्रशासनिक अधिकारी, विधायक और मंत्रिगण स्वयं स्कूलों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
राज्य शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान सिर्फ ढाँचागत सुधार नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सीखने के स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयास है।”
👉 निजी स्कूलों की भूमिका पर भी चर्चा
अभी तक इस अभियान का फोकस पूरी तरह से सरकारी स्कूलों पर रहा है। हालाँकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी इस योजना में स्वैच्छिक प्रशिक्षण की सुविधा दी जाए, तो राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर और ऊँचा हो सकता है।
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि निजी स्कूलों को इस अभियान के तहत प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा, लेकिन कुछ ज़िलों में निजी विद्यालयों की सहभागिता को लेकर स्थानीय स्तर पर संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
✅ इस अभियान का सार
छत्तीसगढ़ का “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” अब सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि एक आंदोलन बनता जा रहा है, जो गाँवों से लेकर शहरों तक शिक्षा के हर कोने को छूने का प्रयास कर रहा है। अब जबकि राज्य में शिक्षक विहीन स्कूलों की समस्या खत्म हो चुकी है, आगे की चुनौती होगी – सीखने के स्तर को बढ़ाना और निजी व सार्वजनिक शिक्षा के बीच सामंजस्य बनाना।
छत्तीसगढ़ में अब नहीं कोई शिक्षक-विहीन स्कूल.? शिक्षा गुणवत्ता अभियान एक आंदोलन


