39 C
Raipur
Thursday, June 18, 2026

मोदी-ट्रंप वार्ता: G-7 शिखर सम्मेलन में व्यापार, रक्षा और पश्चिम एशिया में शांति पर बनी सहमति

Must read

डिजिटल न्यूज डेस्क/एवियन 18/06/2026

भारत और अमेरिका के रिश्तों को नई गति देने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई।दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, रणनीतिक प्रौद्योगिकी और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति सहित कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की तथा आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव प्रमुख विषय रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य का निर्बाध रूप से खुला रहना बेहद आवश्यक है।

दोनों नेताओं ने नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और नाविकों सहित आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

वार्ता के दौरान भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने अधिकारियों को जल्द से जल्द एक ऐसा समझौता तैयार करने का निर्देश दिया जो संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक दृष्टि से प्रभावी हो।

इसी क्रम में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अगले सप्ताह भारत दौरे का भी उल्लेख किया गया।
दोनों नेताओं ने रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए फरवरी 2025 में वाशिंगटन में हुई पिछली बैठक के बाद हासिल प्रगति की समीक्षा की।

दोनों नेताओं ने व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और दोनों देशों के नागरिकों के हित में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मुलाकात सकारात्मक और उपयोगी रही। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन किया।

तात्कालिक लाभ
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को गति मिलने की संभावना बढ़ेगी।रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा।

दीर्घकालिक परिणाम
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत हो सकती है।व्यापार एवं निवेश बढ़ने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की संभावना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता बनी रहने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को मजबूती मिलेगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव विश्व अर्थव्यवस्था और भारत के ऊर्जा हितों पर पड़ सकता है।






- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article