पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने अर्धशासकीय संस्थानों में कार्यरत प्रोफेसर, बाबू, लिपिक, प्यून सहित समस्त कर्मचारियों की पेंशन बंद किए जाने पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की पेंशन बंद करना न्यायसंगत नहीं, बल्कि अत्याचार है।
उपाध्याय ने कहा कि 70, 80 और 90 साल के बुजुर्गों के जीवनयापन का एकमात्र साधन पेंशन है। अधिकांश पेंशनरों का दवाई का खर्च, घर का राशन और घरों के लोन पेंशन से ही चल रहा है। ऐसे में पेंशन बंद करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय शासन और संस्थानों की सेवा में समर्पित करते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन उनके और उनके परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार होती है। प्रोफेसर से लेकर प्यून तक सभी कर्मचारियों ने ईमानदारी से संस्थानों के संचालन में भूमिका निभाई है।
विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने हिटलर को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने मांग की कि 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को पेंशन व ग्रेच्युटी बंद करने के आदेशों पर सरकार तत्काल पुनर्विचार करे और सभी पेंशनर्स की पेंशन यथावत लागू करे।
उन्होंने माननीय न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जिस वेतनमान से कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी के अनुरूप पेंशन दी जाए। साय सरकार को इस आदेश का पालन करना चाहिए।
उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती और जुलाई-अगस्त से रोकी गई पेंशन का भुगतान नहीं करती, तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन करेगी और पेंशनभोगियों को न्याय दिलाकर ही दम लेगी।