छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में खाद्य मंत्री की मौजूदगी में जले 6 लाख 30 हजार दीये — ‘खबर पर ताल'(एक व्यंग्य)
बेमेतरा न्यूज़ – 18 सितंबर 2026
(अगर तेल का उपयोग कम करेंगे तो यह भी देशभक्ति के लिए एक प्रमाण सिद्ध होगा- आकाशवाणी दिल्ली)
ज्योतिपति:सवालिया नजर उठाते हुए, लो ज्वाला, बेमेतरा जिले की भी खबर आ गई! माता भद्रकाली मंदिर परिसर में 11,101 दीये जलाए गए। छत्तीसगढ़ खाद्य मंत्री ने ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की शुरुआत की और पूरे बेमेतरा जिले में कुल 6 लाख 30 हज़ार से भी ज़्यादा दीये जलाए गए!
ज्वाला: (माथे पर बल लाते हुए) 6 लाख 30 हज़ार दीये! बेमेतरा से लेकर बेरला, साजा, नवागढ़ तक दीयों की जगमगाहट… नगर पालिकाओं में 51 हज़ार, पंचायतों में 2.25 लाख! मंत्री जी कह रहे हैं कि यह 140 करोड़ देशवासियों की कृतज्ञता का प्रतीक है और विधायक बेमेतरा तो 25 साल की देश सेवा की बात कर रहे हैं।
ज्योतिपति: और सुनो, लखपति दीदी ग्राम माटरा में ड्रोन शॉट लिए गए, नदी के तटों पर ड्रोन वीडियोग्राफी हुई, स्वच्छता और पौधारोपण के कार्यक्रम भी हुए!
ज्वाला: ड्रोन शॉट और भव्यता तो ठीक है ज्योतिपति, लेकिन जो बात हम कर रहे थे, यह खबर उसी पर मुहर लगाती है। बेमेतरा जैसे एक छोटे से जिले में अगर 6 लाख से ज़्यादा दीये जल रहे हैं, तो पूरे देश के आंकड़े जोड़ लो! जिस तेल और खर्च की बचत की बात कभी देश सेवा के रूप में सिखाई गई थी, आज उसी तेल को रिकॉर्ड बनाने और उत्सव के नाम पर बहाया जा रहा है।
ज्योतिपति: (गंभीर होते हुए) बात तो तुम्हारी सोचने वाली है ज्वाला। जश्न और शुभकामनाओं से किसी को ऐतराज नहीं, पर जब आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज के बोझ तले दबी हो, तब यह भव्यता और करोड़ों दीयों का आडंबर किस सोच का नतीजा है?
दृष्टिकोण की स्पष्टता: यह संवाद यह साफ दिखाता है कि विरोध उत्सव या शुभकामनाओं से नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संसाधनों व तेल के इस तरह के व्यापक उपयोग और दिखावे की प्रवृत्ति से है।
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