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Friday, October 30, 2026
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नशा विनाश की जड़,युवाओं ने लिया नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन का संकल्प

रंगोली-चित्रकला से दिया जागरूकता का संदेश।

रायपुर, 02 सितंबर 2026

‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत-संकल्प अभियान’ और ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ के तहत कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और नशे से दूर रहने के साथ स्वस्थ एवं जिम्मेदार जीवन जीने का संकल्प लिया।

स्वर्गीय छोटेलाल श्रीवास्तव स्नातकोत्तर महाविद्यालय में युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के केंद्रीय संचार ब्यूरो, रायपुर द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत जिला पंचायत अध्यक्ष ने चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन कर की। उन्होंने कहा कि युवावस्था जीवन की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण समय है। युवाओं को नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग पढ़ाई, खेल, नए काम सीखने और देश के विकास में करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नशे का असर केवल व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज पर भी पड़ता है। स्वस्थ और जागरूक युवा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी ने पोषण के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन, एनीमिया से बचाव, स्वच्छता और बच्चों के शुरुआती 1000 दिनों में पोषण के महत्व के बारे में बताया।

उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए पोषण संबंधी अच्छी आदतें अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम में नशामुक्ति, पोषण और स्वच्छता को लेकर रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और उपस्थित नागरिकों को नशे से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने की शपथ दिलाई गई।

कोरबा जिला न्यूज -जामबहार में ₹3.40 करोड़ से बनेगा नया विद्युत सबस्टेशन

4,500 से अधिक उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ।

कोरबा- 02 सितंबर 2026

नया सबस्टेशन बनने के बाद क्षेत्र के 4,500 से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इससे बिजली की आपूर्ति पहले से बेहतर और अधिक सुचारू होने की उम्मीद है। आसपास के मौजूदा सबस्टेशनों पर बिजली का भार भी कम होगा।

कोरबा जिले के ग्राम पंचायत जामबहार में ₹3.40 करोड़ की लागत से बनने वाले नए विद्युत सबस्टेशन का भूमिपूजन किया गया। उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने 33/11 केवी और 5 एमवीए क्षमता वाले इस सबस्टेशन का भूमिपूजन किया।

इस सबस्टेशन से जामबहार के अलावा रोकबहरी, सोनपुरी, परसाबातेल, चुहिया, रूमगरा, बेलगिरी बस्ती, मदरसा मोहल्ला, हवाई पट्टी, खान मोहल्ला और जोगियाडेरा क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में सुधार होगा।

भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री देवांगन ने ग्रामीणों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और बिजली बिल समाधान योजना का लाभ उठाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बेहतर बिजली व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुविधा मिलेगी और विकास के कामों को भी गति मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि हर घर तक बेहतर बिजली सुविधा पहुंचाई जाए।

सितंबर में होगा ‘चावल उत्सव’बिलासपुर में राशन कार्डधारकों के लिए बड़ी राहत

छत्तीसगढ़,बिलासपुर। 01 सितंबर 2026

बिलासपुर सहित प्रदेश की उचित मूल्य दुकानों में सितंबर महीने के दौरान ‘चावल उत्सव’ आयोजित किया जाएगा।

सितंबर में मिलेगा दो महीने का चावल
जिले के राशन कार्डधारकों के लिए खाद्य विभाग ने महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की है। सितंबर और अक्टूबर महीने का चावल पात्र राशन कार्डधारकों को सितंबर में ही एकमुश्त वितरित किया जाएगा।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संचालनालय के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था बारिश के मौसम में परिवहन और भंडारण से जुड़ी संभावित दिक्कतों को देखते हुए की गई है।

नई व्यवस्था के तहत पात्र हितग्राहियों को सितंबर और अक्टूबर दोनों महीनों का चावल एक साथ सितंबर में ही दिया जाएगा। यानी अक्टूबर के लिए अलग से राशन दुकान जाने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, चावल के अलावा अन्य राशन सामग्री का वितरण पहले की तरह मासिक आधार पर ही किया जाएगा।

शक्कर, चना, नमक और गुड़ का दो महीने का कोटा एक साथ नहीं मिलेगा। इनका वितरण संबंधित महीने के सामान्य आबंटन के अनुसार ही होगा।

APL कार्डधारकों को नहीं मिलेगा लाभ

एकमुश्त चावल वितरण की यह सुविधा सभी राशन कार्डधारकों के लिए नहीं है। APL यानी सामान्य राशन कार्डधारक इस व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे।

इसका लाभ अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित और निःशक्तजन राशन कार्ड धारकों को मिलेगा। इन कार्डधारकों को सितंबर में ही सितंबर और अक्टूबर दोनों महीनों का पात्रतानुसार चावल वितरित किया जाएगा।

बारिश और परिवहन की दिक्कत के कारण फैसला

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संचालनालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, वर्षा ऋतु के दौरान परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना रहती है। आने वाले समय में त्योहारों और बारिश के कारण राशन के परिवहन में परेशानी न हो, इसलिए खाद्य विभाग ने पहले से व्यवस्था करते हुए दो महीने का चावल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

खाद्य विभाग द्वारा इस संबंध में सभी कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

दो बार होगा बायोमेट्रिक सत्यापन

एकमुश्त चावल वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हितग्राही को ई-पॉस मशीन पर सितंबर और अक्टूबर के राशन उठाव के लिए अलग-अलग दो बार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करना होगा।
दुकानों पर लगाना होगा सूचना बोर्ड।

उचित मूल्य दुकान संचालक को दोनों महीनों के राशन की अलग-अलग रसीद निकालकर हितग्राही को देना अनिवार्य होगा। इससे यह रिकॉर्ड रहेगा कि दोनों महीनों का चावल निर्धारित मात्रा के अनुसार वितरित किया गया है।





नवा रायपुर में खुलेगा NMIMS का अत्याधुनिक कैंपस, युवाओं को मिलेंगे उच्च शिक्षा के नए अवसर

नवा रायपुर। 01 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में अब नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) का अत्याधुनिक कैंपस विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से संस्थान के लिए 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूरी हो चुकी है।

NMIMS के आने से प्रदेश के युवाओं को प्रबंधन, कौशल विकास, नवाचार और रोजगार से जुड़ी राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के अवसर अपने ही राज्य में उपलब्ध होंगे। संस्थान में पहला बैच आगामी 2 से 3 वर्षों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

पूरी तरह विकसित होने के बाद इस कैंपस में करीब 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे। इससे नवा रायपुर को शिक्षा और ज्ञान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

NMIMS की स्थापना से उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार, उद्यमिता और उद्योग-अकादमिक सहयोग को भी गति मिलने की संभावना है। इससे प्रदेश के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ अपने कौशल को निखारने और करियर के नए अवसर तलाशने का मंच मिलेगा।

राज्य सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवा रायपुर में NMIMS का कैंपस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

करेंसी अब कागज से प्लास्टिक की ओर – RBI के ₹10 और ₹20 वाले नए नोट

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न्यूज डेस्क – 01/09/2026

सरकार ने भी RBI के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है कि शुरुआत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाए। ये अभी बाजार में नहीं आए हैं, अभी सिर्फ सैंपल और टेस्टिंग का दौर चल रहा है।

भारत में जल्द ही आपकी जेब में जो ₹10 और ₹20 का नोट होगा, वो कागज का नहीं बल्कि प्लास्टिक यानी पॉलीमर का हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिशा में सबसे बड़ा कदम उठा दिया है।

आखिर हुआ क्या है?
RBI छोटे नोटों को ज्यादा टिकाऊ बनाना चाहता है। इसके लिए उसकी अपनी कंपनी BRBNMPL (भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्रा. लि.) ने पॉलीमर शीट खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। f095

शुरुआत में करीब 68,000 रीम पॉलीमर शीट की जरूरत बताई गई है। एक रीम में 500 शीट होती हैं। इन शीट्स को भारत के अलग-अलग मौसम – गर्मी, सर्दी, नमी वाले इलाकों में परखा जाएगा।

RBI ने छोटे नोटों को ही क्यों चुना?
इसका सीधा गणित है:
₹10 और ₹20 के नोट सबसे ज्यादा हाथों में घूमते हैं।ये सबसे जल्दी गंदे, फटे और खराब होते हैं।RBI को इन्हें बार-बार छापना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है। अगर पॉलीमर नोट 5-6 गुना ज्यादा चल जाए तो छपाई का खर्च और बार-बार नोट बदलने का झंझट दोनों कम होंगे।

इस बार टेंडर की दो शर्तें सबसे अलग क्यों हैं?RBI ने इस बार दो सख्त शर्तें रखी हैं:

पहली – चीन-पाकिस्तान से दूरी: बोली लगाने वाली कंपनी को हलफनामा देना होगा कि भारत में उसका काम चीन और पाकिस्तान से पूरी तरह अलग है। ये राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम है।

दूसरी – जानवरों की चर्बी नहीं: कंपनी को साबित करना होगा कि पॉलीमर शीट में किसी जानवर की चर्बी या DNA नहीं है। दरअसल, ब्रिटेन में जब पॉलीमर नोट आए थे तो उनमें जानवरों की चर्बी होने पर विवाद हुआ था। RBI पहले से ही इस विवाद से बचना चाहता है।

दौड़ में कौन-कौन है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन कंपनियों ने बोली लगाई है:
कॉस्मो फर्स्ट (भारत) + डी ला रू (ब्रिटेन): भारत की सबसे बड़ी BOPP एक्सपोर्टर कंपनी, तकनीक ब्रिटेन की मशहूर नोट छापने वाली कंपनी देगी।
CCL Secure (ऑस्ट्रेलिया): दुनिया के 40 से ज्यादा देशों को पॉलीमर नोट देती है, दावा है कि इनके नोट कागज से 6 गुना टिकाऊ होते हैं।
Q&T Hi-Tech Polymer (वियतनाम): दावा है कि इनकी तकनीक से नोट बनाने की लागत कॉटन वाले नोट से 78% तक कम होगी।

पॉलीमर नोट में खास क्या होगा? – आम भाषा में
टिकाऊ: आसानी से फटेगा नहीं, 15 साल तक चलने का अनुमान है।
पानी से बचाव: पानी, पसीना, नमी से खराब नहीं होगा। धोने पर भी चल सकता है।
नकली नोट पर रोक: इसमें बीच में पारदर्शी खिड़की (Window Transparency) जैसे फीचर होंगे, जिसे नकली बनाना बहुत मुश्किल है।
साफ-सुथरा: गंदगी कम चिपकेगी।

चुनौती क्या है?
महंगा शुरू में: पॉलीमर शीट बनाना शुरू में कागज से महंगा है।
आम आदमी की आदत: दुकानदार, ऑटो वाले क्या इसे आसानी से स्वीकार करेंगे? पहले जब प्लास्टिक के ₹10 के नोट का ट्रायल हुआ था तो कई जगह मशीनों ने इसे नहीं पकड़ा था।
गर्मी का असर: भारत में 45 डिग्री गर्मी में पॉकेट में रखा नोट सिकुड़ तो नहीं जाएगा, यही टेस्टिंग से पता चलेगा।

अभिनेत्रियों के कपड़ों का ‘दायरा’ कौन तय करेगा?करीना की चुप्पी और मेघना गुलजार का जवाब__

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बॉलीवुड डेस्क- 01/09/2026

अभिनेत्रियों के कपड़ों पर सवाल उठाने की जरूरत क्यों पड़ती है और ‘दायरा’ आखिर किसका होना चाहिए—कपड़ों का या सोच का?

मेघना गुलजार का जवाब इस बहस को एक अलग दिशा देता है। उनका कहना था कि किसी अभिनेता या अभिनेत्री का पहनावा उसके किरदार, कहानी और निर्देशक की सोच से जुड़ा विषय है। ऐसे में किसी एक अभिनेत्री से उसके कपड़ों की सीमा पर सवाल करना शायद बहस को व्यक्ति से जोड़ देता है, जबकि मुद्दे को व्यापक नजरिए से देखना चाहिए।

फिल्म ‘दायरा’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान एक ऐसा सवाल सामने आया, जिसने फिल्म के नाम को ही चर्चा का विषय बना दिया। अभिनेत्री करीना कपूर खान से अभिनेत्रियों के कपड़ों की सीमा को लेकर सवाल पूछा गया, लेकिन करीना ने इस पर सीधे जवाब देने के बजाय अपना माइक निर्देशक मेघना गुलजार की ओर बढ़ा दिया।

इसके बाद मेघना ने सवाल का जवाब देते हुए कलाकारों की व्यक्तिगत पसंद और किरदार की जरूरत को महत्व दिया।

दरअसल, यह सवाल अभिनेत्री कृति सेनन के एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर हुए विवाद के संदर्भ में पूछा गया था। विज्ञापन में कृति के इंडो-वेस्टर्न पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे थे।

अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी विज्ञापन के पहनावे को लेकर आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद विज्ञापन हटाए जाने की बात सामने आई।

वहीं, कृति सेनन ने अपने पक्ष में कहा था कि संस्कृति और परंपरा इंसान के दिल में होती है, कपड़ों की नेकलाइन में नहीं। इस बयान को सोशल मीडिया के एक बड़े वर्ग का समर्थन भी मिला।

यहीं से मामला केवल एक विज्ञापन या एक अभिनेत्री की ड्रेस तक सीमित नहीं रहता। असली सवाल यह है कि महिलाओं के कपड़ों की सीमा तय करने का अधिकार आखिर किसके पास है?

हालांकि, यहां एक दूसरा पक्ष भी है। त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए—यह तर्क भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। विज्ञापन केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति नहीं होते, वे किसी ब्रांड और अवसर की सार्वजनिक प्रस्तुति भी होते हैं।

लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब सांस्कृतिक मर्यादा के नाम पर केवल महिलाओं के पहनावे को ही कसौटी बना दिया जाए।

करीना का चुप रहना भी इस पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प हिस्सा है। उन्होंने बहस में उतरने के बजाय माइक आगे बढ़ा दिया। शायद यह चुप्पी भी एक संदेश है—हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं, खासकर तब जब सवाल किसी दूसरे विवाद को आपके ऊपर रखकर पूछा जा रहा हो।

फिल्म का नाम ‘दायरा’ है, इसलिए सवाल स्वाभाविक रूप से इसी शब्द के इर्द-गिर्द घूम गया। मगर इस पूरे विवाद की समीक्षा करें तो सवाल शायद यह नहीं होना चाहिए कि अभिनेत्रियों के कपड़ों का दायरा कितना हो, बल्कि यह होना चाहिए कि हमारी सोच का दायरा कितना बड़ा है।

बॉलीवुड में पहनावा कभी किरदार का हिस्सा होता है, कभी फैशन, कभी विज्ञापन की रणनीति और कभी व्यक्तिगत पसंद। इसलिए हर परिस्थिति को एक ही नैतिक पैमाने से देखना भी उचित नहीं।

आखिर कपड़ों की लंबाई-चौड़ाई नापने से पहले सोच की गहराई नापना ज्यादा जरूरी है।

और शायद ‘दायरा’ फिल्म के नाम से निकला सबसे बड़ा सवाल भी यही है—सीमा कपड़ों की होनी चाहिए या नजरिए की?





एलन मस्क की चेतावनी: पृथ्वी को बचाने के लिए हमारे पास करीब 50 साल

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बड़े पैमाने पर जियो-इंजीनियरिंग की जरूरत!

नई दिल्ली- 31 अगस्त 2026

एलन मस्क ने 30 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि केवल स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ना भविष्य के सभी खतरों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

दुनिया के चर्चित उद्योगपति और SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने पृथ्वी के भविष्य को लेकर एक बार फिर गंभीर चेतावनी दी है। मस्क का कहना है कि मानवता को जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते स्तर जैसे खतरों से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। उनके मुताबिक, यदि इंसान आज जैसे हालात में समुद्र तटों के आसपास रहना जारी रखना चाहता है, तो उसके पास कार्रवाई के लिए करीब 50 साल का समय है।

मीडिया की दी गई जानकारी अनुसार उन्होंने भविष्य में अंतरिक्ष आधारित सैटेलाइट और बड़े पैमाने पर जियोइंजीनियरिंग की जरूरत की बात कही।

समुद्र का बढ़ता स्तर बड़ी चुनौती
मस्क ने समुद्र के बढ़ते स्तर को गंभीर खतरा बताया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने विशेष रूप से फ्लोरिडा जैसे तटीय क्षेत्रों का उदाहरण दिया और आशंका जताई कि आने वाले दशकों में समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण बड़े इलाकों में नियमित बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

एक रिपोर्ट में 2070 तक फ्लोरिडा के करीब 5 प्रतिशत हिस्से पर नियमित बाढ़ के संभावित जोखिम का उल्लेख किया गया है।

अंतरिक्ष से पृथ्वी का तापमान नियंत्रित करने का विचार
मस्क ने एक बेहद महत्वाकांक्षी तकनीकी विचार भी सामने रखा है। उनका कहना है कि भविष्य में सूर्य से पृथ्वी तक पहुंचने वाली ऊर्जा को नियंत्रित करने के लिए पृथ्वी-सूर्य के बीच विशेष कक्षाओं में अत्याधुनिक सैटेलाइट तैनात किए जा सकते हैं। उन्होंने चंद्रमा से बड़े पैमाने पर लॉन्चिंग सिस्टम के जरिए ऐसे “सेंटिएंट सैटेलाइट्स” भेजने की कल्पना की है।

मस्क के अनुसार, यह तकनीक लंबे समय तक ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 50 साल की समयसीमा मस्क का आकलन है, वैज्ञानिक रूप से तय की गई वह तारीख नहीं है जिसके बाद पृथ्वी खत्म हो जाएगी।

उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि जलवायु और समुद्री स्तर से जुड़े जोखिमों को टालने के बजाय मानवता को अभी से बड़े स्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए।

ताजा मीडिया रिपोर्टों में मस्क ने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में गंभीर विलुप्ति की घटनाओं का खतरा भी बना रहेगा और केवल ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव से सभी संभावित खतरों का समाधान नहीं होगा।
बिल्कुल।


3 माह की मासूम के लिए 25वीं बार रक्तदान, रवि सरकार ने पेश की इंसानियत की मिसाल

किरंदुल -31 अगस्त 2026
रिपोर्ट रवि सरकार।

बच्ची की हालत गंभीर थी और उसे तत्काल रक्त की जरूरत थी। परिवार की चिंता के बीच रवि सरकार ने बिना किसी स्वार्थ के रक्तदान कर बच्ची के इलाज में सहयोग किया।

महज तीन माह की मासूम जिंदगी, हीमोग्लोबिन बेहद कम और सांस लेने में गंभीर परेशानी… ऐसे मुश्किल वक्त में समाजसेवक रवि सरकार मदद के लिए आगे आए और अपना 25वीं बार रक्तदान किया।

बताया गया कि रवि सरकार पिछले 17 वर्षों से लगातार रक्तदान कर रहे हैं। सिर्फ स्वयं रक्तदान ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था कराने में भी उनकी टीम सक्रिय रहती है।

उनका मानना है कि रक्तदान किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद बन सकता है। दुर्घटना, बीमारी, ऑपरेशन या अन्य आपात परिस्थितियों में समय पर रक्त मिलना किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रवि सरकार युवाओं और समाज के सक्षम लोगों से भी रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि रक्त न जाति पूछता है, न धर्म और न पहचान—जरूरत के वक्त सिर्फ इंसानियत काम आती है।

तीन माह की मासूम के लिए किया गया यह रक्तदान इसी इंसानी जज्बे की मिसाल है। रवि सरकार का कहना है कि पिछले 17 वर्षों से जारी सेवा का यह सफर आगे भी जारी रहेगा।

एक यूनिट रक्त किसी के लिए सिर्फ रक्त नहीं, बल्कि जिंदगी की एक नई उम्मीद हो सकता है।

पीएम मोदी ताशकन्द यात्रा – शास्त्री स्मारक पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि

डिजिटल डेस्क- 31 अगस्त 2026

प्रधानमंत्री की यह ताशकंद यात्रा, और विशेषकर शास्त्री स्मारक पर पुष्पांजलि, भावनात्मक स्मरण और कूटनीतिक रणनीति का समन्वय है। यह स्मरण न केवल शास्त्री जी की विरासत को उजागर करता है, बल्कि भारत‑उज़्बेकिस्तान रिश्तों को सांस्कृतिक, शैक्षिक और मानवीय आधार पर सुदृढ़ करने का एक यादगार और महत्वपूर्ण अवसर भी है।

ताशकंद की वह सुबह — जहां प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की — दिखाने वाला एक क्षण था कि कूटनीति केवल राजनयिक कागज़ पर सिमटी नहीं रहती, बल्कि स्मृतियों, सांस्कृतिक कड़ियों और साझा इतिहास से भी गढ़ी जाती है। इस वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री की देहान्त की 60वीं बरसी के मौके पर दिया गया यह श्रद्धांजलि भावनात्मक महत्व के साथ रणनीतिक मायने भी रखती है।

क्यों यह आवश्यक है
प्रतीकात्मक सामंजस्य:
किसी राष्ट्र के वरिष्ठ नेता का विदेशी भूमि पर शांति और सम्मान के साथ संवर्धन यह दर्शाता है कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ औपचारिक aren’t — वे साझा सम्मान और सामान्य मूल्यों पर टके हैं। शास्त्री जी का नाम और उनकी विचारधारा, विशेषकर सादगी, जवाबदेही और न्याय के विचार, भारतीय लोकतांत्रिक पहचान के प्रतीक रहे हैं, इनका स्मरण दूसरे देश में रिश्तों को गहरा मानवीय आधार देता है।

नरम‑शक्ति और संस्कृति :
स्मारक‑पूजन के बाद की शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ (यूनिवर्सिटी निरीक्षण, विद्वानों से संवाद, छात्रवृत्ति की घोषणा) दिखाती हैं कि ये यात्रा सिर्फ राजनयिक बैठकों तक सीमित नहीं’ ये दीर्घकालीन व्यावहारिक सहयोग (शिक्षा, भाषा, सांस्कृतिक आदान‑प्रदान) को प्रोत्साहित करती है।

व्यावहारिक परिणाम:
‘लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृति’ जैसी पहलें तात्कालिक प्रशंसा से बढ़कर अगले दशकों के संबंधों का बीज बोती हैं

सम्मान और वैधानिक मान्यता:
उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को ‘‘ओली दाराजली दोस्तलिक’’ (सर्वोच्च मित्रता सम्मान) से विभूषित करना दोनों देशों के बीच बढ़ती राजनीतिक‑सांस्कृतिक निकटता का औपचारिक और सार्वजनिक प्रतिबिंब है। यह किसी भी राजनयिक यात्रा में मिलने वाला सबसे ठोस मान्यता‑चिह्न है और इसके तहत रिश्तों में एक उच्च स्तर की मित्रता की पुष्टि होती है।

शिक्षा और संस्कृति: दीर्घकालिक निवेश 80 वर्ष तक चले हिंदी शिक्षण का सम्मान:
ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में हिंदी पढ़ाने का 80वां वर्ष इस तथ्य की पुष्टि है कि भाषा और साहित्य के माध्यम से गहरे संबंध बने हुए हैं।

भाषाई निकटता:
उज़्बेक और हिंदी में 3000 से अधिक सामान्य शब्द होने का तथ्य दर्शाता है कि भाषा‑विज्ञान के स्तर पर भी सांस्कृतिक संपर्क के अवसर मौजूद हैं — इससे सीखना और स्वीकारना दोनों आसान होते हैं।



छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड: दूसरे वर्ष का आयोजन विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026

रायपुर – 31 अगस्त 2026

खबर पर नजर डालें तो दो बिंदु सबसे महत्वपूर्ण हैं – स्थानीयता और स्थिरता। होमस्टे पुरस्कार में स्थानीय उत्पादों, व्यंजनों और ग्रामीण रोजगार को, जबकि इको-टूरिज्म में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और आदिवासी समुदाय की भागीदारी को मूल्यांकन का आधार बनाया गया है।


छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ की घोषणा राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल है। 30 अगस्त को जारी इस योजना का उद्देश्य पर्यटन को सिर्फ दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रखकर, उससे जुड़ी पूरी श्रृंखला को प्रोत्साहित करना है।

इस पुरस्कार की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक दायरा है। कुल 10 श्रेणियों – सर्वश्रेष्ठ होटल, पंजीकृत टूर ऑपरेटर, जिला टूरिज्म प्रमोशन, पर्यटन स्टार्टअप, रिसॉर्ट, पर्यटक सूचना केंद्र, होमस्टे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, इको-टूरिज्म साइट और एडवेंचर टूरिज्म में सम्मान दिया जाएगा। प्रत्येक विजेता को 11 हजार रुपये और मेमेंटो मिलेगा।

यह योजना परंपरागत आतिथ्य के साथ-साथ नए युग के पर्यटन को भी समान महत्व देती है। एक ओर होटल और रिसॉर्ट के लिए MICE सुविधा, टर्नओवर और ऑक्यूपेंसी जैसे व्यावसायिक मानदंड रखे गए हैं, तो दूसरी ओर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेणी को जोड़कर डिजिटल ब्रांडिंग को मान्यता दी गई है।

यह छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और वन्यजीव को रील्स और वीडियो के जरिए वैश्विक मंच पर ले जाने वाले युवाओं के लिए बड़ा मंच है।

जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड से जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे स्वच्छता और कचरा प्रबंधन जैसे जमीनी मुद्दों पर काम होगा।

कुल मिलाकर यह पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि पर्यटन में नवाचार, रोजगार सृजन और सतत विकास को गति देने वाला प्रयास है। इच्छुक उद्यमी और संस्थान 15 सितंबर 2026 तक it@visitcg.in पर आवेदन कर सकते हैं।