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Friday, October 30, 2026
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शिक्षक दिवस पर पूर्ण शराबबंदी: नैतिक सम्मान और सामाजिक चेतना का एक सशक्त विचार

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ – 05/09/2026

छत्तीसगढ़ सर्व ब्राह्मण समाज के दो पदाधिकारी प्रदेश उपाध्यक्ष लेख मणि पांडे और प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडे ने विज्ञप्ति जारी कर मांग की है।

शिक्षक दिवस भारत का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन है, जो केवल एक औपचारिक समारोह नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। शिक्षा समाज की वह चेतना है जो अंधकार को मिटाकर प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करती है।

ऐसे में शिक्षक दिवस के दिन शराब की बिक्री पर रोक (शुष्क दिवस) लगाने की मांग एक अत्यंत सामयिक, नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विचारणीय प्रस्ताव है।

वर्तमान में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती घासीदास जयंती और राष्ट्रीय पर्वों के साथ-साथ कई प्रमुख धार्मिक त्यौहारों पर शराब की दुकानें बंद रखी जाती हैं।

जब गांधी जयंती जैसे अवसरों पर राष्ट्रपिता के विचारों का सम्मान करने के लिए शुष्क दिवस घोषित किया जा सकता है, तो शिक्षकों और शिक्षा जगत के सम्मान में एक दिन शराबबंदी क्यों नहीं की जा सकती?

शिक्षक को राष्ट्रीय संचेतना का वाहक माना जाता है। इस अवसर पर यदि शराब की बिक्री बंद रखी जाती है, तो समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

जब लोग इस विशेष दिन दुकानें बंद देखेंगे, तो वे इसके कारण पर मंथन करेंगे, जिससे शिक्षक दिवस की महत्ता और गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान जन-जन तक पहुँचेगा।

यद्यपि वर्तमान में शिक्षक दिवस (5 सितंबर) को पूरे देश में अनिवार्य शुष्क दिवस के रूप में घोषित करने का कानूनी नियम नहीं है, किंतु इस प्रकार का निर्णय सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

यदि सरकारें इस प्रस्ताव पर विचार कर इसे आधिकारिक शुष्क दिवस घोषित करती हैं, तो यह न केवल राष्ट्र के गुरुओं के प्रति एक सच्चा और सर्वोच्च सम्मान होगा, बल्कि एक नशामुक्त और जागरूक समाज के निर्माण की ओर भी एक प्रभावी प्रयास सिद्ध होगा।

कांग्रेस का ‘चीनी सत्याग्रह’, सरकार पर बोला हमला-

बेमेतरा – 04 सितंबर 2026

“जनता की आवाज ही कांग्रेस की आवाज है। जब तक आमजन को महंगाई से राहत नहीं मिलेगी, कांग्रेस की आवाज और संघर्ष दोनों बुलंद होते रहेंगे।”

बढ़ती महंगाई और आम जनता की बिगड़ती रसोई के मुद्दे को लेकर बेमेतरा में जिला कांग्रेस कमेटी ने एक दिवसीय ‘चीनी सत्याग्रह’ कर भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर नगर बेमेतरा स्थित राम मंदिर प्रांगण, गांधी मैदान में आयोजित प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर जमकर नारेबाजी की और सरकार से आम जनता को तत्काल राहत देने की मांग की।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब, किसान, मजदूर, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। बढ़ते घरेलू खर्च के कारण आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है और रसोई का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।

जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार भले ही विकास और राहत के बड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

छाबड़ा ने कहा कि ‘चीनी सत्याग्रह’ केवल सांकेतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि आम जनता की पीड़ा और आक्रोश की आवाज है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

कांग्रेस ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से जनहित के मुद्दों को उठाने और सरकार की नीतियों पर सवाल करने का उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। प्रदर्शन में मंगत साहू, दिनेश पटेल, सुरित ध्रुव, रश्मि मिश्रा, मिथलेश वर्मा, ईश्वर वर्मा, सुशीला जोशी, बालकुमारी ध्रुव, सुमन गोस्वामी, विजय बघेल, लुकेश वर्मा, मोंटू तिवारी, निलेश ठाकुर, मोहित वर्मा, मनोज शर्मा, शेख शरीफ कुरैशी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, मंदिरों से लेकर गली-मोहल्लों तक गूंज रहा ‘जय श्रीकृष्ण’

रायपुर- 4 सितंबर 2026

भगवान विष्णु के आठवें अवतार द्वापर युग के युगपुरुष श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मंदिरों को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया गया है। श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल हो रहे हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज छत्तीसगढ़ में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

रायपुर के समता कॉलोनी स्थित राधाकृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का 101 किलो दूध से अभिषेक किया जा रहा है। वहीं नयापारा के श्री बांके बिहारी मंदिर में विशेष पूजा, श्रृंगार दर्शन और भजन संध्या का आयोजन किया गया है। शाम को भजन कलाकार भगवान कृष्ण की भक्ति से श्रद्धालुओं को सराबोर करेंगे।

इस्कॉन मंदिर समेत कई प्रमुख मंदिरों में विशेष दर्शन, भजन-कीर्तन, महाभिषेक और छप्पन भोग की तैयारियां की गई हैं।

शहरों के साथ गांवों और गली-मोहल्लों में भी जन्माष्टमी का उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चों ने कृष्ण और राधा का रूप धारण किया है, वहीं कई स्थानों पर ऊंचाई पर मटकी बांधकर मटकी फोड़ और दही हांडी की तैयारियां की गई हैं।गोविंदा दल भी उत्सव में भाग ले रहे हैं।

जन्माष्टमी पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश है।

वहीं रायपुर के गुढ़ियारी में विशाल दही हांडी प्रतियोगिता 5 सितंबर को आयोजित होगी।

रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में विशेष आरती, अभिषेक और प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन होगा।

बेरला में किसान कांग्रेस की हुंकार —किसानों की पुकार

किसानों को खाद-बीज और बिजली कब मिलेगी?

बेमेतरा न्यूज डेस्क – 04 सितंबर 2026

पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने बैठक में सीधा सवाल उठाया — जब किसान को सबसे ज्यादा बिजली-पानी की जरूरत है, ठीक उसी वक्त कटौती क्यों? उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठेंगे। हर सोसायटी पर नजर रखी जाएगी, खाद-बीज की कालाबाजारी और कमी को उजागर किया जाएगा, और बिजली विभाग की लापरवाही को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा।

किसान परेशान, सरकार खामोश
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर और जिला कांग्रेस अध्यक्ष आशीष छाबड़ा के नेतृत्व में हुई इस बैठक में साफ कहा गया — किसान आज दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ खाद-बीज की भारी किल्लत है, दूसरी तरफ खेती के सबसे नाजुक समय में बिजली बार-बार काटी जा रही है। सिंचाई ठप है, फसल दांव पर है, और सरकार सुनने को तैयार नहीं।

अब सड़क से लेकर संगठन तक लड़ाई
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मंगत साहू ने कार्यकर्ताओं से कहा — अब सिर्फ बयान नहीं, ठोस काम चाहिए। संगठन को गांव और बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा ताकि हर किसान की समस्या सीधे पार्टी तक पहुंचे और वहां से जिम्मेदार अधिकारियों तक दबाव बनाया जाए।

छाबड़ा ने दोहराया कि कांग्रेस हमेशा किसान के साथ खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी — चाहे वो खाद-बीज की लड़ाई हो या बिजली की अनियमितता का मुद्दा। पार्टी अब गांव-गांव, खेत-खलिहान तक जाकर किसानों की पीड़ा सुनेगी और उसे मजबूती से उचित मंच तक पहुंचाएगी।

नगर पंचायत बेरला में किसान कांग्रेस और मंडल कांग्रेस की बड़ी बैठक हुई। बैठक में एक ही बात गूंजती रही — सरकार किसानों के साथ खड़ी नहीं है, और अब कांग्रेस उनकी आवाज बनकर मैदान में उतरेगी।

बैठक में महिला अध्यक्ष कविता साहू, जिला कोषाध्यक्ष रवि परगनिया, जिला महामंत्री भारत भूषण साहू, ब्लॉक अध्यक्ष सुमित विवेक सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में किसान कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। सबने एक स्वर में संकल्प लिया — किसान का हक छीनने नहीं दिया जाएगा।



कैसा होगा ठंड का मौसम ,क्या ‘गॉडजिला अल नीनो’ करेगा कड़ाके की ठंड गायब ?

न्यूज डेस्क – 04 सितंबर 2026

खबर है कि वैज्ञानिकों को आशंका है कि दिसंबर-जनवरी में पड़ने वाली पारंपरिक हाड़ कंपाने वाली ठंड और शीत लहरें कमजोर पड़ सकती हैं।

प्रशांत महासागर में बन रहा एक शक्तिशाली अल नीनो इस साल दुनिया भर के मौसम चक्र को हिला सकता है, और भारत के लिए भी यह चिंता का विषय बन गया है।

मौसम एजेंसियों की मानें तो यह घटना इतनी तीव्र हो सकती है कि इसे “सुपर अल नीनो” या “गॉडजिला अल नीनो” तक कहा जा रहा है — यह वही नाम है जो 1997-98 के ऐतिहासिक अल नीनो के लिए गढ़ा गया था।
भारत की सर्दी पर क्या असर पड़ सकता है
अल नीनो के दौरान आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की प्रवृत्ति देखी जाती है, जिससे उत्तर और मध्य भारत में सर्दी के मौसम की तीव्रता घट सकती है। इतिहास गवाह है कि 1982, 1987, 2002, 2009 और 2015 जैसे प्रमुख अल नीनो वर्षों में भारत में सूखे और असामान्य मौसम की स्थितियां देखी गई थीं।

तो क्या इस बार सर्दी नहीं पड़ेगी?
पूरी तरह से “नहीं” कहना गलत होगा।

इतना जरूर तय है कि इस बार सर्दी अपने सामान्य रूप में नहीं आएगी — कड़ाके की ठंड और शीत लहरों की तीव्रता व अवधि, दोनों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन IOD जैसे स्थानीय कारकों के चलते सर्दी पूरी तरह बेअसर होगी, यह कहना अभी संभव नहीं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन हर तिमाही में अपडेट जारी करता है, और सितंबर 2026 का अगला अपडेट इस तस्वीर को और स्पष्ट कर देगा।

क्या हो रहा है प्रशांत महासागर में
साल की शुरुआत में प्रशांत महासागर में हल्की ला नीना की स्थिति थी, जो धीरे-धीरे न्यूट्रल हुई और मई 2026 तक तेजी से अल नीनो में बदलने लगी।

अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने जून 2026 में आधिकारिक तौर पर अल नीनो के बनने की पुष्टि कर दी, और अनुमान है कि यह पतझड़ (फॉल) के दौरान मध्यम से तेज स्तर तक पहुंच सकता है।

कुछ पूर्वानुमान मॉडल तो प्रशांत महासागर में तापमान विसंगति 3-4°C तक जाने की बात कह रहे हैं, जो इसे अब तक का सबसे तेज अल नीनो बना सकता है।

हालांकि, यह तस्वीर उतनी सीधी भी नहीं है। भारतीय मौसम विशेषज्ञ एक और अहम कारक — इंडियन ओशन डायपोल (IOD) — पर भी करीब से नजर रखे हुए हैं। अगर आने वाले महीनों में पॉजिटिव IOD मजबूत होता है, तो यह अल नीनो के असर को काफी हद तक संतुलित कर सकता है और भारत में नमी व सर्दी दोनों को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

यही वजह है कि अभी से यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस बार सर्दी बिल्कुल गायब हो जाएगी — असल तस्वीर आने वाले हफ्तों में साफ होगी।

वैश्विक स्तर पर भी बड़ा असर
यह सिर्फ भारत की चिंता नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह शक्तिशाली अल नीनो पहले से गर्म हो रही जलवायु प्रणाली पर असर डालेगा, तो 2026 और संभवतः 2027 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शुमार हो सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और दक्षिणी अफ्रीका में सूखे की आशंका है, जबकि पेरू, इक्वाडोर और पूर्वी अफ्रीका में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।

भारतीय महासागर भी वैश्विक औसत से तेज गति से गर्म हो रहा है, जो बारिश के पैटर्न, समुद्री तापमान और चक्रवाती गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

(यह न्यूज आर्टिकल उपलब्ध मौसम पूर्वानुमानों और वैज्ञानिक विश्लेषणों पर आधारित है। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए ताजा जानकारी के लिए भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आधिकारिक अपडेट देखते रहें।)

कृष्ण: रहस्य, लीला और 2026 की जन्माष्टमी का सही दिन

धर्म- 03 सितंबर 2026

कृष्ण को आध्यात्म में कृष्णम वंदे जगत गुरु कहा गया है । श्रीराम जो त्रेता युग में 12 कलाओं के साथ अवतार लिए थे ,वहीं कृष्णा द्वापर में 16 कलाओं से परिपूर्ण संसार में अवतरित हुए।

श्रीकृष्ण का जीवन चरित्र वाकई रहस्य और अलौकिक दृश्यों से भरा है—कारागृह में जन्मा बालक जो गोकुल में माखनचोर बना, कंस-शिशुपाल जैसे योद्धाओं को हराया, कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया और द्वारकाधीश बनकर एक ऐसी नगरी बसाई जहाँ “बिना इजाजत परिंदे भी पर नहीं मार सकते” थे।

हमें धर्म उपदेशों में दिखता है कि, कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान देने वाला बड़े बड़े शूरवीर योद्धाओं के बीच निहत्था सारथी श्रीकृष्ण। भीषण संग्राम, भयंकर युद्ध मैदान में जो निहत्था खड़ा है वही तो है असली वीर_माधव। जब युद्ध की बात हो तो वीर योद्धा हथियार उठा ही लेते हैं, लेकिन यहां पर माधव ने मधुरता का परिचय दिया और कहा मैं हथियार नहीं उठाऊंगा

2026 में जन्माष्टमी: 4 सितंबर या 5 सितंबर?

2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी, न कि 5 सितंबर को। भ्रम इसलिए पैदा होता है क्योंकि जन्मोत्सव का मुख्य निशीथ पूजा मुहूर्त रात 11:57 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की सुबह 12:43 बजे तक जाता है, यानी आधी रात के बाद।

परंपरागत रूप से त्योहार की तारीख वह मानी जाती है जिस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग हो और व्रत-पूजा का मुख्य भाग उसी दिन माना जाता है।

अलग-अलग परंपराओं में एक दिन का अंतर क्यों?

स्मार्त और वैष्णव पंचांग कभी-कभी एक दिन का अंतर दिखाते हैं क्योंकि वे अष्टमी-रोहिणी संयोग और निशीथ काल की प्राथमिकता अलग-अलग देते हैं। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों या मंदिरों में उत्सव एक दिन पहले या बाद में भी देखा जा सकता है, पर राष्ट्रीय स्तर पर और अधिकांश मंदिरों/संस्थाओं (जैसे ISKCON) के अनुसार 2026 की मुख्य जन्माष्टमी 4 सितंबर को है।

पूजा और व्रत के प्रमुख मुहूर्त जानकारी पर

व्रत: 4 सितंबर को दिनभर (कुछ परंपराओं में निशीथ के बाद पारण)।
निशीथ पूजा: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक (स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है)।

दही हांडी/नंदोत्सव अक्सर 5 सितंबर को। स्थानीय पंचांग और मंदिर की घोषणा जरूर देखें, क्योंकि निशीथ काल शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

अपने शहर के अनुसार निशीथ काल और पारण समय का सटीक मुहूर्त जानकर पूजा आराधन करें।

माताओं ने संतानों की सुख-समृद्धि के लिए रखा कमरछठ व्रत, हलषष्ठी पूजा में उमड़ी श्रद्धा

रायपुर – 03 सितंबर 2026

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, 2 सितंबर को मठपारा रायपुर में माताओं ने अपनी संतानों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना से हलषष्ठी व्रत रखा। छत्तीसगढ़ में यह पर्व कमरछठ के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर श्री दूधाधारी मठ सत्संग भवन में विधि-विधान से हलषष्ठी महारानी की पूजा-अर्चना की गई।

हिंदू धर्म में हलषष्ठी व्रत को संतान के मंगल और उनकी लंबी आयु की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। माताएं संतान के प्रति अपने वात्सल्य और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के प्रतीक के रूप में यह कठिन व्रत रखती हैं। इसी कारण इस पर्व में महिलाओं की विशेष भूमिका मानी गई है।

पूजन में भैंस के दूध, घी और दही सहित हल से न जोते गए स्थान से प्राप्त अनाज, साग-सब्जियों का उपयोग किया गया। पूजा-अर्चना पंडित राजीव लोचन त्रिपाठी, जय शुक्ला और अंकुश दुबे ने संपन्न कराई।
इस अवसर पर श्रीमती पांडे, सुधा ओझा, संध्या वैष्णव, पूजा, भावना, लक्की दुबे, सती साहू, रोशनी, बुटिया कर्ष सहित बड़ी संख्या में मोहल्ले की माताएं शामिल हुईं।

चित्रकूट में बाढ़ की भारी तबाही, मंदाकिनी का थमा कहर तो सामने आया विनाश का मंजर

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चित्रकूट बाढ़ – 30/09/2026

बाढ़ के पानी से घर में रखा गेहूं-चावल, कपड़े, कूलर, फ्रिज और अन्य सामान बर्बाद हो गया। पानी उतरने के बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार हैं। टूटे मकान, कीचड़ से भरे घर, खराब अनाज, नष्ट फसलें और पशुओं के चारे का संकट सामने है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर राहत और उचित मुआवजा देने की मांग की है।

लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट में भारी तबाही मचा दी। रामघाट समेत नदी किनारे के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। कई घरों, दुकानों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों में पानी भर गया, जबकि सड़क और पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंच गया था। रिपोर्टों के अनुसार, इस बार की बाढ़ ने दो दशक से अधिक पुराने बाढ़ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। रामघाट पूरी तरह जलमग्न हो गया था और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।

प्रशासन और बचाव दलों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाकर सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला। चित्रकूट में 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। राहत केंद्रों में भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

बारिश और बाढ़ ने छोड़े तबाही के निशान

बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के बाद अब तबाही की तस्वीर सामने आ रही है। नदी किनारे की दुकानों और निर्माणों को नुकसान पहुंचा है। कई सड़कें और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। वहीं चित्रकूट में भारी बारिश से एक कच्चे मकान की दीवार गिरने से पिता और उसके दो बच्चों की मौत की दर्दनाक घटना भी सामने आई है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए हैं।
मौसम विभाग ने 3 सितंबर को चित्रकूट में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

चित्रकूट में बाढ़ ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ नदी के आसपास बढ़ता अतिक्रमण और निर्माण भविष्य में ऐसे संकट को कितना गंभीर बना सकता है।

महानदी के बढ़ते जलस्तर – गंगरेल के 3 गेट खुले,धमतरी में भारी बारिश

रायपुर -03/09/2026

“ये तस्वीरें धमतरी के रविशंकर बांध की हैं। भारी बारिश के बाद बांध के तीन गेट खोलने पड़े। महानदी उफान पर है, प्रशासन ने किया अलर्ट जारी।”

छत्तीसगढ़ के जलाशयों में बढ़ते जलस्तर और मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए महानदी तटीय एवं निचले इलाकों के गांवों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।

धमतरी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और कैचमेंट एरिया से पानी की भारी आवक के चलते गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के 3 गेट खोल दिए गए हैं। बांध से कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिसमें 3,360 क्यूसेक महानदी में और 1,410 क्यूसेक रुद्री बैराज के रास्ते मुख्य नहर में प्रवाहित हो रहा है।

प्रशासन ने अधिकारियों और मैदानी अमले को 24 घंटे सतर्क रहने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।

मुरूमसिल्ली जलाशय 98.61%, गंगरेल 97.40%, दुधावा 86.86% और सोंढूर 69.25% भर चुका है।

ग्रामीणों से नदी-नालों, जल_भराव वाले क्षेत्रों और उफनती नदी को पार करने से बचने तथा केवल अधिकृत प्रशासनिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।

सुशासन सरकार में प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे तैयार है।

बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ ने इतिहास रच दिया है – देश में नंबर-1!

रायपुर 03 सितंबर 2026

ये सिर्फ आंकड़ा नहीं, जनभागीदारी की जीत है:

  1. JSJB 3.0 और कैच द रेन में देश में प्रथम
    जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के पहले दो चरणों में छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर रहा था, अब तीसरे चरण में प्रदेश ने पहला स्थान हासिल किया है। तीसरे चरण में करीब 78 हजार जल संरक्षण संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं।
  2. 5 जिले देश के टॉप-10 में
    सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदा बाजार-भाटापारा और कबीरधाम – इन जिलों ने दिखा दिया कि जब गांव ठान ले तो पानी की कमी नहीं रहती।
  3. कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय मिसाल
    कोरिया जिले में किसानों ने भू-जल पुनर्भरण के लिए अपनी कृषि भूमि का लगभग 5% हिस्सा स्वेच्छा से दिया है। खेत में ही वर्षा जल रोकने से भू-जल बढ़ेगा और सिंचाई की सुविधा बेहतर होगी।
  4. दिल्ली में राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति
    नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के इस जनभागीदारी मॉडल को देश के सामने रखा।
  5. JSJB 1.0 में 4,05,561 संरचनाएं बनाकर जो यात्रा शुरू हुई थी, आज वो जन-आंदोलन बन गई है।

छत्तीसगढ़ ने साबित किया – जल है तो कल है!