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Friday, October 30, 2026
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सिकल सेल उन्मूलन की ओर बड़ा कदम, रायपुर में राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित

रायपुर – 07 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ में सिकल सेल रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान और बेहतर उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में सोमवार को रायपुर में सिकल सेल रोग पर राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस परामर्श में सिकल सेल के सर्वाधिक मरीजों वाले 11 जिलों, बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर, गरियाबंद, कबीरधाम, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, धमतरी और महासमुंद के प्रतिनिधियों को विशेष रूप से बुलाया गया था।

मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संजीव कुमार झा के मार्गदर्शन में राज्य नोडल अधिकारी डॉ. के. आर. सोनवानी ने सिकल सेल उन्मूलन मिशन के लक्ष्यों पर मुख्य संबोधन दिया।

तकनीकी सत्रों में प्रदेश में सिकल सेल की वर्तमान स्थिति, प्रमुख केंद्रों की प्रगति, स्क्रीनिंग, प्रबंधन और उपचार अनुपालन को बेहतर बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। मेडिकल कॉलेजों की भूमिका पर हुए सत्र में बस्तर मेडिकल कॉलेज की डॉ. स्मिता वर्मा, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डॉ. ओंकार खंडवाल और सरगुजा मेडिकल कॉलेज के डॉ. आलोक सिंह ने अनुभव साझा किए।

परामर्श में बहु-विभागीय समन्वय पर भी जोर दिया गया। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, स्कूल शिक्षा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों ने प्रभावित बच्चों और परिवारों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर अपने विचार रखे।

सत्र के दौरान सिकल सेल को लेकर सामाजिक कलंक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा हुई। परिवारों में जागरूकता और समुदाय में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इस दौरान ‘जशपुर मॉडल फॉर सिकल सेल केयर’ को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में यूनिसेफ के डॉ. गजेन्द्र सिंह, एम्स रायपुर के डॉ. सुनील व डॉ. अमित कुमार मिश्रा, सिकल सेल संस्थान, संगवारी संस्था सहित कई सहयोगी संस्थाओं के विशेषज्ञ शामिल हुए।

परामर्श में प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटकर स्क्रीनिंग कवरेज बढ़ाने, उपचार अनुपालन में सुधार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की कवरेज और रेफरल तंत्र मजबूत करने पर कार्ययोजना तैयार की गई। अंत में जमीनी स्तर की चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर खुली चर्चा हुई।

8 सितंबर को दुर्ग में UCC पर होगी चर्चा, उच्च स्तरीय समिति की बैठक में जुटेंगे संगठन प्रमुख

बेमेतरा- 07 सितंबर 2926

दुर्ग में 8 सितंबर को UCC पर मंथन, उच्च स्तरीय समिति की बैठक में रखे जाएंगे सुझाव।

बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के विभिन्न संगठनों के प्रमुखों को शामिल होने तथा अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने और इसके प्रारूप को तैयार करने की दिशा में शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक दुर्ग में आयोजित की जाएगी।

बैठक में समान नागरिक संहिता के प्रावधानों, संभावित प्रभावों और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों की उपस्थिति में 8 सितंबर को दोपहर 12 बजे लोक निर्माण विभाग, दुर्ग के सभाकक्ष में परिचयात्मक बैठक एवं समूह चर्चा आयोजित की जाएगी।

बैठक का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक संगठनों और संबंधित प्रतिनिधियों से संवाद के माध्यम से समान नागरिक संहिता से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करना बताया गया है। समिति द्वारा विभिन्न पक्षों के विचार और सुझावों को भी चर्चा के दौरान सामने रखा जाएगा।

बैठक के लिए वीरेंद्र सिंह, अपर कलेक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के संबंधित संगठनों से समन्वय कर बैठक में प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के प्रारूप और इसके प्रावधानों को लेकर गठित यह समिति विभिन्न वर्गों और संगठनों से संवाद के माध्यम से सुझाव जुटाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। दुर्ग में होने वाली बैठक को इसी प्रक्रिया की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

झीरम मामले में एनआईए की जांच पर उठे सवाल- अधूरा न्याय: आशीष छाबड़ा

बेमेतरा -07 सितंबर 2026

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने कहा है कि झीरम घाटी नरसंहार को लेकर जो एनआईए अदालत का फैसला आया है, वह आधा-अधूरा न्याय है। कांग्रेस न्यायालय का सम्मान करती है, किंतु इसमें एक बात यह भी देखने लायक है कि न्यायालय ने उन्हीं तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर यह फैसला दिया है, जो एनआईए ने अदालत में रखे थे।

एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाविहीन रही, वह राजनीतिक षड्यंत्र को उजागर नहीं कर पाई। जिन 10 लोगों को एनआईए ने गिरफ्तार किया था, उन्हें दोषी पाया गया और यह नक्सली अपने काडर के छोटे नक्सली थे, जो इतनी बड़ी घटना को बिना किसी बड़े नक्सली नेताओं के अंजाम नहीं दे सकते थे। एनआईए ने बड़े नक्सली नेताओं का नाम शुरू के एफआईआर में शामिल किया था, किंतु बाद में उसे हटा दिया।

इस फैसले से यहां एक और यह सवाल पैदा होता है कि क्या इस फैसले से इस घटना में रची गई साजिश का पर्दाफाश हुआ? कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा हटाने के निर्देश किसने दिए थे? यात्रा के मार्ग को किसने बदलवाया था? हमले की योजना किसने बनाई थी?

जब-जब बड़े नक्सली नेताओं ने सरेंडर किया, तब सरकार ने दावा किया कि यह झीरम हमले में शामिल थे, तो एनआईए ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं की? घटना के प्रत्यक्षदर्शी, जो इस नक्सली घटना में घायल थे, उनसे एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की? झीरम हमले के दौरान घायल और जीवित बचे पीड़ितों का बयान क्यों नहीं लिया गया? एनआईए ने कांग्रेस सरकार के द्वारा गठित एसआईटी को जांच से क्यों रोका?

यह ऐसे सवाल हैं, जिनके उत्तर अंत तक नहीं मिल पाए और बिना इन प्रश्नों के उत्तर के यह जांच और न्याय अधूरा है। वास्तविकता यह है कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी छुपाने और तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका सामने ना आ पाए, इसे ध्यान में रखकर झीरम नरसंहार में शामिल सरेंडर करने वाले नक्सली, जो बड़े इनामी नक्सली थे, उन्हें सरेंडर तो कराया, किंतु उनसे कभी एनआईए ने पूछताछ नहीं की।

आज भी झीरम नरसंहार में मारे गए कांग्रेस नेताओं की आत्मा न्याय के लिए इंतजार कर रही है। इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी विधि विशेषज्ञों की राय लेकर आगे निर्णय लेगी।

रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के हाथों हुआ छात्र सम्मान

रायपुर – 07 सितंबर 2026


पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय द्वारा किया गया सम्मान समारोह एवं उत्साहवर्धन कार्यक्रम।

विकास उपाध्याय एवं डॉ. विकास पाठक द्वारा दसवीं एवं बारहवीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का किया गया सम्मान।

सम्मान कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के पालकगण भी रहे विशेष रूप से उपस्थित – डॉ. विकास पाठक।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं मेहनत को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के अंत में सभी सम्मानित छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

– हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वार्ड न. 19, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड में छाया पार्षद डॉ. विकास पाठक द्वारा सम्मान समारोह एवं उत्साहवर्धन कार्यक्रम मनाया गया। इस सम्मान समारोह कार्यक्रम में कांग्रेस के पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. विकास पाठक ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी उत्कृष्ट छात्र-छात्राओं का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया। सम्मान समारोह में छात्रों के पालकगण भी उपस्थित रहे।

विकास उपाध्याय ने अपने हाथों से दसवीं एवं बारहवीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र व मेडल देकर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की मेहनत और सफलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी लगन एवं मेहनत के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस सम्मान कार्यक्रम में हर्ष दुबे, खुशी दुबे, श्रद्धा साहू, कुणाल गुप्ता, कृष्णा दुबे, ऋषिता मौर्य, याशू वर्मा, सुनीता साहू, प्रीति साहू, पायल नागवंशी, इच्छा रावड़े, भावना खरोले, निहारिका खरोले, वरदान, जतिन एवं समस्त छात्र उपस्थित रहे।

इसके साथ ही इस सम्मान समारोह कार्यक्रम में कविता सैन, सुनीता साहू, विजय दुबे, विनोद तिवारी, देवेंद्र साहू, मोहन गुप्ता, साधना एवं वार्ड के समस्त सदस्य उपस्थित रहे।

बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप: इसे जड़ से मिटाना छत्तीसगढ़ का संकल्प

रायपुर – 06 सितंबर 2026

बाल विवाह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि यह मानव अधिकारों, बाल अधिकारों और विशेष रूप से बालिकाओं के स्वर्णिम भविष्य पर एक गंभीर कुठाराघात भी है।

सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने बाल विवाह जैसी जड़ जमा चुकी सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़ने के लिए प्रशासनिक तत्परता और सामाजिक भागीदारी का एक बेहतरीन मॉडल पेश किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा हाल ही में 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने का निर्णय एक ऐसा वैश्विक मील का पत्थर है, जो इस कुप्रथा के खिलाफ जारी संघर्ष को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा।

यह भारत के लिए भी एक गर्व का क्षण है, क्योंकि ठीक दो वर्ष पूर्व 27 नवंबर 2024 को ही देश में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के राष्ट्रव्यापी संकल्प की नींव रखी गई थी।

भारत की इस जन-मुहिम को अब वैश्विक स्तर पर मिली यह मान्यता यह सिद्ध करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से शुरू की गई सामाजिक पहलें सीमाओं को लांघकर वैश्विक क्रांति का रूप ले सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनते इस अनुकूल माहौल के बीच, यदि हम क्षेत्रीय धरातल पर नजर डालें, तो छत्तीसगढ़ राज्य की भूमिका इस वैश्विक संकल्प को साकार करने में अत्यंत अनुकरणीय रही है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े राज्य की इस सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं।

सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली बालिकाओं का प्रतिशत 12.1 था, जो सर्वेक्षण-6 (2023-24) में घटकर 10.1 प्रतिशत पर आ गया है।

आंकड़ों का यह गिरावट का रुझान केवल संख्यात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन हजारों बेटियों के मुस्कराते चेहरों और उनके सुरक्षित भविष्य का प्रमाण है, जिन्हें समय रहते इस कुप्रथा के भंवर से निकाला गया।

छत्तीसगढ़ में इस परिवर्तन के पीछे शासन, पुलिस तंत्र, स्थानीय निकायों, धर्मगुरुओं और नागरिक समाज की समन्वित रणनीति रही है।

‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) जैसे सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों में राज्य के 33 जिलों से 8,414 संभावित बाल विवाहों को रुकवाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जब शासन की नीति और समाज की नीयत एक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो परिणाम अभूतपूर्व होते हैं।

हालांकि, 10.1 प्रतिशत का आंकड़ा यह चेतावनी भी देता है कि राह अभी पूरी निष्कंटक नहीं हुई है। ग्रामीण और सुदूर जनजातीय अंचलों में आज भी अशिक्षा, गरीबी और पारंपरिक जड़ता के कारण बाल विवाह के मामले सामने आते हैं।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने का जो सतत विकास लक्ष्य (SDG) तय किया गया है, उसे हासिल करने के लिए निगरानी तंत्र को और अधिक चुस्त बनाना होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह संकल्प कि प्रत्येक बालिका को सुरक्षा, शिक्षा और समान अवसर प्राप्त हों, न केवल राज्य के सामाजिक ढांचे को मजबूती प्रदान कर रहा है, बल्कि 27 नवंबर को वैश्विक पटल पर गूंजने वाले ‘बाल विवाह उन्मूलन दिवस’ के संकल्पों को जमीनी धरातल पर चरितार्थ करने का काम भी कर रहा है।

समय की मांग है कि इस मुस्तैदी को और धार दी जाए, ताकि कोई भी बचपन कुरीतियों की भेंट न चढ़े और हर बेटी अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आकाश छू सके।

छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेगा लोकरंग पर्व

रायपुर- 06 सितंबर 2026

6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर भरथरी-पंडवानी, पंथी और करमा की जमने वाली है महफिल। मंच पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, सुआ और ददरिया तक की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां।

6 से 8 सितंबर तक आयोजित यह पर्व प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के तहत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है।

यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर के सिविल लाइंस स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर प्रतिदिन शाम 7 बजे से होगा।

लोकरंग पर्व के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की विविध रंगारंग प्रस्तुतियां एक ही मंच पर देखने को मिलेंगी।

भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दर्शकों को रोमांचित करेंगी। वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी गायन शैलियों से सांस्कृतिक विविधता उजागर होगी।

लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत ‘लोकरंग पर्व’ सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम पहल है।

इसके माध्यम से ग्रामीण व जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक देखने को मिलेगी। पारंपरिक लोक वाद्यों की धुन और गीतों की मिठास से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में सराबोर रहेगा।

मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी जड़ों से जोड़ना है।

अवैध रेत-गिट्टी परिवहन में 8 ट्रैक्टर जब्त,जब्त वाहनों पर होगी कार्रवाई

रायपुर- 06 सितंबर 2026

शिकायतों के समयबद्ध निराकरण और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन की सतत निगरानी।सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई, अवैध रेत-गिट्टी परिवहन में 8 ट्रैक्टर जब्त।

जब्त वाहनों पर खनिज अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले में खनिज विभाग ने अवैध रेत एवं गिट्टी परिवहन के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 ट्रैक्टरों को जब्त किया है। यह कार्रवाई जिले में अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के उद्देश्य से की गई।

खनिज विभाग की टीम ने मैदानी निगरानी के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से इन वाहनों को पकड़ा।

कार्रवाई के तहत ग्राम खंता से रेत परिवहन करते 2 ट्रैक्टर, रूमगा से 2, चिचगोहना से 1, कोरजा से 1, लालपुर से 1 तथा कोटमी से गिट्टी का अवैध परिवहन करता 1 ट्रैक्टर जब्त किया गया।

पुलिस थानों और चौकी में सुरक्षित रखे गए वाहन जब्त किए गए वाहनों में से 4 ट्रैक्टर गौरेला थाना, 3 ट्रैक्टर कोटमी चौकी और 1 ट्रैक्टर मरवाही थाना में नियमानुसार सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का गंभीरता से परीक्षण कर समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। इसी निर्देश के परिपालन में खनिज विभाग ने शिकायत मिलते ही मैदानी स्तर पर जांच कर तुरंत जब्ती की कार्रवाई की।

मैदानी अमले की सतत निगरानी से कसा शिकंजा इस कार्रवाई में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, नगर सैनिक शिवकुमार लहरे, साहिब गनी एवं सतीश साहू शामिल रहे। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वैध दस्तावेजों के बिना खनिजों के परिवहन पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

शिकायत से कार्रवाई तक – प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता सीएम हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों द्वारा उठाए गए मामलों पर त्वरित जांच और सख्त कदम उठाने से जहां एक ओर राजस्व का संरक्षण होगा, वहीं खनिज संसाधनों के नियमविरुद्ध दोहन पर भी रोक लगेगी।



राज्यस्तरीय सम्मान समारोह: राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने उत्कृष्ट शिक्षकों को किया सम्मानित

रायपुर – 05 सितंबर 2026

शिक्षक दिवस में राज्य,जिला व ब्लॉक स्तर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं प्राचार्यों को सम्मानित किया गया।

शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित पूरे राज्य में गरिमामय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सम्मानित किया गया।

शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर सही दिशा देते हैं: राज्यपाल समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि शिक्षक ही विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा दे सकते हैं। ज्ञान, अनुभव और समर्पण के बल पर बच्चों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा, “जीवन में एक ऐसा काम जरूर करें, जिसमें Transaction नहीं, Transformation हो।” उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे प्रयास बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाते हैं, जिसके लिए संसाधनों से अधिक शिक्षक के समर्पण की आवश्यकता होती है।

मुख्यमंत्री ने किया उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया और उनके प्रयासों की सराहना की।

नारायणपुर में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप नारायणपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह’ में वन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि रहे।

उन्होंने 15 सेवानिवृत्त शिक्षकों, 6 शिक्षा दूतों और 3 ज्ञानदीप पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर अबूझमाड़ की संस्कृति पर आधारित पुस्तक ‘बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां’ का विमोचन भी किया गया।

सरगुजा (अम्बिकापुर) में जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान अम्बिकापुर के जिला कलेक्टरेट सभाकक्ष में आयोजित रजत जयंती महोत्सव के तहत जिला स्तरीय समारोह में कलेक्टर श्री विलास भोसकर ने जिले के 32 शिक्षकों को सम्मानित किया और उन्हें पूरी जिम्मेदारी व गंभीरता से अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज ने किया शिक्षकों का सम्मान

दुर्ग:-05 सितंबर 2026

शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा संगठन के राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत तिवारी के नेतृत्व में शिक्षकों के निवास स्थान पहुँचकर उनका भावभीनी आत्मीयता के साथ सम्मान किया गया।

इसी कड़ी में समाज के पदाधिकारियों ने केलाबाड़ी स्थित सेवानिवृत्त शिक्षक श्री राजेंद्र कुमार दुबे के निवास पहुँचकर उन्हें शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंटकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि श्री दुबे को उनके उत्कृष्ट सेवाकाल के दौरान वर्ष 2014 में ‘महानिदेशक राष्ट्रीय कैडेट कोर सम्मान’, 2015 में तत्कालीन राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन के कर-कमलों से ‘बेस्ट टीचर अवॉर्ड’, 2016 में ‘राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार’ तथा इसी वर्ष ‘शिक्षा मंत्री अवॉर्ड’ सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इस अवसर पर शशिकांत तिवारी ने श्री दुबे की उल्लेखनीय सेवाओं की सराहना करते हुए शिक्षा, शिक्षक और शिक्षक दिवस के महत्व पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

तत्पश्चात, आर्य नगर पहुँचकर शासकीय प्रोन्नत पूर्व माध्यमिक विद्यालय, थनोद में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती कविता शर्मा को भी शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। शशिकांत तिवारी ने उनकी निष्ठापूर्ण शैक्षणिक सेवाओं की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. विश्वनाथ पाणिग्राही ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत तिवारी, प्रदेश सलाहकार डॉ. विश्वनाथ पाणिग्राही, प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित शर्मा, महिला मंच प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती नविता शर्मा, शहर अध्यक्ष हेमंत तिवारी, बृजमोहन तिवारी, मुकेश तिवारी, नंदकिशोर शर्मा, रमेश शर्मा, संजय पांडेय, काजल मिश्रा, किरण शर्मा एवं कांता जोशी सहित अन्य सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

शिक्षक दिवस पर औपचारिकता का आडंबर बंद करे सरकार: लेख मणि पांडे

बेमेतरा/छत्तीसगढ़- 05 सितंबर 2026

आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने और बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर गंभीरता से विचार करना होगा।

जब युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हों, शिक्षा व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही हो और नशे का प्रभाव बढ़ रहा हो, तब केवल शिक्षक दिवस मनाने की औपचारिकता पर्याप्त नहीं है।

छत्तीसगढ़ सर्व ब्राह्मण समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष लेखमणि पांडेय और प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडेय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त प्रेस बयान जारी कर देश और प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर, बढ़ती बेरोजगारी और आबकारी नीति को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, लेकिन केवल सम्मान समारोह आयोजित करने से शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति नहीं बदलेगी।

लेखमणि पांडेय ने कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार, समाज और शिक्षा—क्या इन तीनों की दिशा सही है? एक ओर निजी स्कूल आधुनिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई सरकारी स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, बेहतर शौचालय और आवश्यक सुविधाओं की कमी दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि जिस शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, उसके सामने शराब की बढ़ती उपलब्धता और दुकानों के विस्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर देने के बजाय शराब की बिक्री से राजस्व जुटाने की नीति को प्राथमिकता देती नजर आ रही है। “समाज को शिक्षा चाहिए या शराब—सरकार को अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करनी होगी।”

बयान में हाल की एक घटना का हवाला देते हुए स्कूलों में शिक्षकों के नशे की हालत में पहुंचने के आरोपों पर भी चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के मंदिर में ही नशे जैसी प्रवृत्तियां प्रवेश कर रही हैं, तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडेय ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या शिक्षा का स्तर सुधारना जरूरी है या शराब बेचकर राजस्व कमाना? उन्होंने कहा कि आज घर और कॉलेज के बीच शराब की दुकानें नजर आ रही हैं।

कई स्थानों पर विद्यालय, महाविद्यालय और सभ्रांत बस्तियों के आसपास शराब दुकानों की मौजूदगी को लेकर समाज में सवाल उठ रहे हैं।

संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में सरकार से मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, सरकारी स्कूलों का स्तर बेहतर बनाया जाए और शैक्षणिक संस्थानों तथा आबादी वाले संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास शराब दुकानों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

विज्ञप्ति में कहना है कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य केवल आयोजनों से नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा और स्वस्थ सामाजिक वातावरण से सुरक्षित होगा।