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Tuesday, October 20, 2026

शिक्षक दिवस पर पूर्ण शराबबंदी: नैतिक सम्मान और सामाजिक चेतना का एक सशक्त विचार

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बेमेतरा/छत्तीसगढ़ – 05/09/2026

छत्तीसगढ़ सर्व ब्राह्मण समाज के दो पदाधिकारी प्रदेश उपाध्यक्ष लेख मणि पांडे और प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडे ने विज्ञप्ति जारी कर मांग की है।

शिक्षक दिवस भारत का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन है, जो केवल एक औपचारिक समारोह नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। शिक्षा समाज की वह चेतना है जो अंधकार को मिटाकर प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करती है।

ऐसे में शिक्षक दिवस के दिन शराब की बिक्री पर रोक (शुष्क दिवस) लगाने की मांग एक अत्यंत सामयिक, नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विचारणीय प्रस्ताव है।

वर्तमान में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती घासीदास जयंती और राष्ट्रीय पर्वों के साथ-साथ कई प्रमुख धार्मिक त्यौहारों पर शराब की दुकानें बंद रखी जाती हैं।

जब गांधी जयंती जैसे अवसरों पर राष्ट्रपिता के विचारों का सम्मान करने के लिए शुष्क दिवस घोषित किया जा सकता है, तो शिक्षकों और शिक्षा जगत के सम्मान में एक दिन शराबबंदी क्यों नहीं की जा सकती?

शिक्षक को राष्ट्रीय संचेतना का वाहक माना जाता है। इस अवसर पर यदि शराब की बिक्री बंद रखी जाती है, तो समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

जब लोग इस विशेष दिन दुकानें बंद देखेंगे, तो वे इसके कारण पर मंथन करेंगे, जिससे शिक्षक दिवस की महत्ता और गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान जन-जन तक पहुँचेगा।

यद्यपि वर्तमान में शिक्षक दिवस (5 सितंबर) को पूरे देश में अनिवार्य शुष्क दिवस के रूप में घोषित करने का कानूनी नियम नहीं है, किंतु इस प्रकार का निर्णय सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

यदि सरकारें इस प्रस्ताव पर विचार कर इसे आधिकारिक शुष्क दिवस घोषित करती हैं, तो यह न केवल राष्ट्र के गुरुओं के प्रति एक सच्चा और सर्वोच्च सम्मान होगा, बल्कि एक नशामुक्त और जागरूक समाज के निर्माण की ओर भी एक प्रभावी प्रयास सिद्ध होगा।
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