30.1 C
Raipur
Friday, October 23, 2026
Home Blog Page 300

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती कार्यक्रम में शामिल हुईं, कहा वामपंथी उग्रवाद को सामाजिक मुख्यधारा में जोड़ने का काम निर्णायक दौर में “”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा छत्तीसगढ़ से मुझे लगाव है। मैं 5-6 बार यहां आ चुकी हूं। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। इसलिए छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया कहते हैं। आप जैसे बरगढ़, संबलपुर को छत्तीसगढ़ का हिस्सा समझते हैं, हम भी रायपुर को ओडिशा का हिस्सा समझते हैं।राष्ट्रपति बोलीं, परिसीमन की सीमा है, लेकिन दिल की कोई दीवार नहीं है। दिल से हम सब एक। चाहे छत्तीसगढ़ हो या ओडिशा हो।

राष्ट्रपति ने ये बातें विधानसभा के रजत जयंती कार्यक्रम के मौके पर कही। इससे पहले उन्होंने जय जोहार कहकर अपने भाषण की शुरुआत की थी।

इससे पहले स्पीकर रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में टोनही प्रताड़ना, खाद्य सुरक्षा सहित अब तक 565 विधेयक पारित हो चुके हैं। विधानसभा में सदस्यों की संख्या 90 है। इनमें अनुसूचित जनजाति के 30, अनुसूचित जाति के 10, OBC के 35 सदस्य, सामान्य वर्ग के 15 और महिला सदस्यों की संख्या 19 है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज रायपुर पहुंचे और छग विधानसभा के रजत जयंती वर्ष समारोह में शामिल हुए। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य जल्द ही इस बुराई से मुक्ति पा लेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ सदन को संबोधित करते हुए कहा, ‘मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ को उग्रवाद से पूर्णत: मुक्त करने के प्रयास में आप सब शीघ्र ही सफलता प्राप्त करेंगे और राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेंगे।”


राष्ट्रपति ने कहा कि सभी विधायकों को प्रयास करना चाहिए कि अगली विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या में वृद्धि हो।मुर्मू ने कहा, ‘वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच गया है।मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोग विकास के मार्गों पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

खुशी की बात 25 साल के इतिहास में मार्शल का नहीं किया गया इस्तेमाल
राष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के 25 साल के इतिहास में सदन में कभी मार्शल का इस्तेमाल नहीं किया गया।राज्यपाल रमेन डेका, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने भी विधायकों को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और आभार जताया।



छावा’ फिल्म में औरंगजेब का रोल निभाने वाले अक्षय खन्ना से AIMIM नेता ने मुलाकात की,बोले- अगर ये रोल किसी मुस्लिम ने निभाया होता तो…

AIMIM नेता वारिस पठान ने ‘छावा’ में औरंगजेब का किरदार निभाने वाले एक्टर अक्षय खन्ना से मुलाकात की है।उन्होंने अक्षय के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है।’छावा’ में अक्षय खन्ना के साथ विकी कौशल लीड रोल में नजर आए हैं।
नेता वारिस पठान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है।फोटो में उनके साथ अक्षय खन्ना नजर आ रहे हैं । इस तस्वीर को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, “आज ‘छावा’ फिल्म में औरंगजेब का किरदार निभाने वाले एक्टर अक्षय खन्ना से मुलाकात हुई.”छावा’ में अक्षय खन्ना के साथ विकी कौशल भी नजर आए हैं।ये फिल्म छत्रपति संभाजी महाराज पर आधारित है और विकी ने इसमें लीड रोल किया है। रश्मिका मंदाना ने संभाजी महाराज की पत्नी का किरदार निभाया है।ये फिल्म 14 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई उसके बाद से हर तरफ इस फिल्म की चर्चा हो रही है। फिल्म को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और बंपर कमाई भी हो रही है।
‘छावा’ ने किया बॉक्स ऑफिस पर धमाका
‘छावा’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका करके रख दिया सैकनिल्क के अनुसार 35 दिनों में ये फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 572.85 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है। इसी के साथ इस फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कमाई के मामले में ‘एनिमल’ और ‘गदर 2’ समेत औ भी कई फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है।

छावा’ अब तक 773 करोड़ रुपये की कमाई कर 2025 की सबसे ज्यादा कमाई वाली मूवी
दुनियाभर में ‘छावा’ अब तक 773 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है. इसी के साथ ये साल 2025 की भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है. ये विकी कौशल के करियर की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म है. इससे पहले उनकी किसी भी फिल्म ने इतनी ज्यादा कमाई नहीं की थी.
नेता वारिस पठान ने फिल्म के रोल पर कहा?
वारिस पठान ने आगे लिखा, “अगर ये रोल ‘छावा’ में किसी मुस्लिम एक्टर ने निभाया होता तो अब तक क्या से क्या हो जाता.” औरंगजेब को लेकर जारी विवाद के बीच सामने आया वारिस पठान का ये पोस्ट चर्चा में आ गया है।


ग्राम सण्डी(बेमेतरा) स्थित सिद्धि माता मंदिर और आसपास के इलाके में हो रहे बलि प्रथा से निरीह जानवरों की हत्या पर रोक लगवाने देवरबीजा में सर्व समाज की बैठक”

सरपंच मंदिर समिति शासन प्रशासन और पुलिस से सहयोग की गुहार

बेमेतरा 23/03/25

आज देवरबीजा में सिद्धि माता मंदिर के नाम पर आसपास चल रहे बलि प्रथा को बंद कराने के लिए बैठक बुलाई गई थी। बैठक में कबीर पंथ के लोग,सिध्दि माता समिति संडी, सामाजिक संगठन,ग्राम सरपंच संडी तथा संडी से लगे सरहदी ग्रामों के सरपंच,शासन के लोग एवं पुलिस और ग्रामीण उपस्थित रहे।
सलधा सपाद लक्षेश्वर धाम के स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती महराज की अध्यक्षता मे ग्राम संडी में चल रहे निरीह पशुबलि के खिलाफ बैठक रखी गई।जिसमें उपस्थित सभी सदस्य और ग्रामीणों ने मंदिर और मंदिर के आसपास बलि रोकने की सहमति जाहिर की।जिसमें सभी सदस्यों द्वारा स्वयं के लेटर पैड में स्वलिखित स्वहस्ताक्षरित पत्र देने सहमति बनी।

आज की बैठक में स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी ने कहा कि यहां सिद्धी माता मंदिर में या आसपास पशुओं की बलि दी जा रही है ,जिससे चारों तरफ अव्यवस्था फैल रही है,जो धर्म_विरुद्ध कार्य भी है ।बलि प्रथा के आड़ में लोग यहां पंडाल लगाकर शराब की व्यवस्था कर रहे हैं, और यहां खूब शराब का सेवन किया जा रहा है। इस पर हम चाहते हैं प्रशासन उन लोगों के ऊपर सख्त कार्रवाई करें जो इस प्रकार के बलि प्रथा के आड़ में गलत कामों को बढ़ावा दे रहे हैं।
आज की बैठक में उपस्थित कबीर पंथ के लोगों ने कहा कि आज के समय में बलि प्रथा को बढ़ावा देना कोई अच्छी बात नहीं है । किसी भी धर्म में जीव हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया गया है,अतः प्रशासन से मांग करते हैं, कि इस प्रकार की बलि प्रथा पर रोक लगाने में सहयोग प्रदान करें और नियमानुसार बलि प्रथा पर चलने वाले लोगों के खिलाफ निरीही प्राणी हत्या के आरोप में केस दर्ज कर उन पर कार्रवाई करें।

आज की बैठक में मंदिर समिति,सभी उपस्थित सरपंच सण्डी सलधा,डंगनिया देवरबीजा सोढ़ शामिल है। बैठक मे कवर्धा न० पा०परिषद् जिला कबीरधाम के आदेश क्र 3229/ ज.क शा०/ 2015-16 का एक आदेश की कॉपी भी दिखाई गई जिसमें 30/01/2025 के तहत सार्वजनिक जगहो पर बलि प्रथा पर रोक लगाई गई है।यहां इसका अनुपालन हेतु निर्णय लिया गया।
आगे कहा गया आज के वैज्ञानिक युग में भी धर्म के आड़ में निरीह प्राणी का बलि देना उचित नहीं है,अतः उन ग्रामो पर जहाँ भी निजी या शासकीय भूमि पर बलि संबंधी कार्य किया जा रहा है,उनके उपर आर्थिक दंड तथा कार्यवाही ग्राम पंचायत द्वारा करने का निर्णय हुआ।
सभी ने एकमत से कहा इस प्रकार के बलि प्रथा के आड़ में अहाता जैसे पंडाल लगाकर लोग स्वार्थ सिद्ध कर रहे उस पर कार्यवाही करना शासन प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है।यहां किसी प्रकार के भविष्य में अराजकता न बढे इसलिए हम चाहते है, इसमें शासन प्रशासन हस्तक्षेप कर सहयोग करते हुए बलि प्रथा पर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई कर निरीह पशुओं की बलि पर रोक लगाए।
सभी ने कहा बैठक के निर्णय और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर तहसीलदार एसडीएम और कलेक्टर को पत्र सौंप कर कार्रवाई का इंतजार करेंगे।
आज की बैठक में एसडीओपी बेमेतरा मनोज तिर्की,तहसीलदार जयंत कुमार पटले सेवाराम सरपंच सण्डी रामकुमार अध्यक्ष सण्डी,लेख मणि पांडेय प्रदेश उपाध्यक्ष सर्व ब्राह्मण समाज जितेंद्र शुक्ला जिला अध्यक्ष सर्व ब्राह्मण समाज बेमेतरा मोहित राम,रोमन पाण्डेय,हेमलाल देवांगन सरपंच देवर बीजा, सियाराम सरपंच सलधा, गणेश साहू सरपंच डगनिया सुशील कुमार साहू ग्राम सोढ,डोमार दास परपोड़ा,वेद कुमार साहू,बिल्लू दास ,संतु किशन साहू अजय और चौहान सहित काफी संख्या में ग्रामीण एवं पत्रकार साथी बेमेतरा और पुलिस उपस्थित थे।

भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु,,भारत मां के सच्चे वीर सपूत””शहीद दिवस 23 मार्च

23 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर जेल में फांसी दी गई। इससे पहले, इन तीनों को लाहौर कॉन्सपिरेसी केस में गिरफ्तार किया गया था और मुकदमे के बाद फांसी की सजा सुनाई गई थी।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने भी अंग्रेजी हुकूमत का जमकर विरोध किया। अपनी आवाज पूरे देश तक पहुंचाने के लिए भगत सिंह जेल गए। 
भगत सिंह ने अपने जीवन का उद्देश्य देश की आजादी को बनाया और कम उम्र में ही उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई ऐसे कदम उठाए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला डाली थी। 
1929 में उन्होंने असेंबली में बम फेंककर अंग्रेज सरकार को चेतावनी दी थी। उनका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना था। इन्होंने लाला लाजपत राय की मौत का प्रतिशोध लेने का भी फैसला लिया था, जिसके बाद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सॉन्डर्स हत्या कांड में दोषी ठहराया गया।
राजगुरु और सुखदेव भी भगत सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। इन तीनों ने मिलकर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी और देशवासियों के मन में आजादी की अलख जगाई। इनके साहस और दृढ़ संकल्प ने पूरे देश को प्रेरित किया।
आज आजाद भारत के लिए एक ऐसा खास दिन है, जिसे इतिहास के पन्नों में हमेशा याद किए जाने की जरूरत है। देश की आजादी के लिए कई क्रांतिकारियों और सपूतों ने अपने प्राण हंसते-हंसते कुर्बान कर दिए। उन्हीं वीर देशभक्तों में भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का नाम भी शामिल है, जिनकी शहादत की याद में 23 मार्च को हर साल शहीद दिवस के रूप मे मनाया जाता है।

23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। हालांकि उन्हें फांसी देने की तारीख एक दिन बाद की थी लेकिन अंग्रेजी हुकूमत देशवासियों के आक्रोश से खौफजदा थी, इसलिए चुपके से एक रात पहले ही उन्हें फांसी के फंदे से लटका दिया गया। देश के वीर सपूतों ने भी हंसते -हंसते अपनी जान भारत के नान कर दी। उनकी पुण्यतिथि पर शहीदों को नमन किया जाता है और  श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

इस शहीद दिवस के मौके पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के साथ हर क्रांतिकारी और भारतीय सैनिकों को सम्मान देते हुए उन्हें सलाम करें। साथ ही देशभक्ति के जज्बे को बढ़ाने के लिए शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार पढ़ें जो युवाओं को जोश से भर देंगे। 

छत्तीसगढ़ में बिहार तिहार” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भिलाई में’बिहार – तिहार स्नेह मिलन’ कार्यक्रम में शामिल,सर्व समाज प्रमुखों का किया सम्मान

रायपुर।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि बिहार और छत्तीसगढ़ की संस्कृति,परंपराएं, त्योहार और पारिवारिक मूल्य सब कुछ एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।ये रिश्ता केवल भूगोल का नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कारों का है। वे आज भिलाई में बिहार तिहार स्नेह मिलन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

यह आयोजन एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत बिहार स्थापना दिवस के अवसर पर हुआ।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिहार और छत्तीसगढ़ के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता केवल कहावत नहीं, अब सामाजिक हकीकत बन चुकी है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी माता जी भी
अविभाजित बिहार से थीं और उनका झारखंड से पुराना संबंध रहा है।

छठपूजा पर बोलते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब छठ_पर्व
छत्तीसगढ़ में भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। राज्य भर के तालाबों और नदियों पर सुंदर छठ घाटों का निर्माण किया गया है।


उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी जशपुर जिले के कुनकुरी में एक करोड़ की लागत से छठ घाट बनवाया है। मुख्यमंत्री साय ने बिहार के गौरवशाली इतिहास को नमन करते हुए कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बिहार से थे नालंदा विश्वविद्यालय,जिसने भारत को विश्वगुरु बनाया, बिहार की देन है। आर्यभट्ट, जिन्होंने शून्य की खोज की, बिहार की महान विभूति हैं।कर्पूरी ठाकुर जैसे सामाजिक न्याय के पुरोधा यहीं की धरती से निकले।

मोदी की गारंटी वादा नहीं,संकल्प है

मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी पर भरोसा किया और हमें सेवा का अवसर मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार ने बीते सवा साल में जनहित की कई योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक
70 लाख से अधिक विवाहित माताओं-बहनों को हर महीने 21000 की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सम्मान में वृद्धि हुई है।धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 20लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में भगवान राम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रा योजना को नए वित्तीय वर्ष से पुनः प्रारंभ किया जा रहा है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों और श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा का अवसर फिर से सुलभ हो सके।
एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को मिल रहा समर्थन ।

ऐसे आयोजनों से भाषायी
सामाजिक और सांस्कृतिक दूरियाँ कम होती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिहार की जास्त लिट्टी-चोखा हो या छत्तीसगढ़ का चीला -मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से भाषायी
सामाजिक और सांस्कृतिक दूरियाँ कम होती हैं। आज का यह समारोह दो राज्यों के बीच भाईचारे और सांस्कृतिक समझ का सेतु बना है।

सर्व समाज प्रमुखों का सम्मान,नई पीढ़ी को प्रेरणा मुख्यमंत्री साय ने मंच से सर्व समाज प्रमुखों को शाल और फल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि समाजसेवियों का सम्मान हमारी परंपरा है,जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेती है।

फरा, तीजा हो या छठ दोनों राज्यों की संस्कृति में गहरा साम्य है खमरछठ और छठ पूजा, दोनों ही पर्व मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति आभार के प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री साय ने सभी बिहारी भाइयों और बहनों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि हम सब मिलकर प्रधानमंत्री मोदी जी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएँ। यह आयोजन आपसी प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता की मिसाल है।

बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि बिहार दिवस का उद्देश्य हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के क्षेत्र में बिहार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस अवसर पर विधायक रिकेश सेन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष मती सरस्वती बंजारे, नगर निगम दुर्ग की महापौर मती अल्का बाघमार एवं अन्य जनप्रतिनिधि, और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

अवैध रेत खनन पर सख्त कार्रवाई खनिज विभाग ने लगाया 70 करोड़ 37 लाख का बड़ा जुर्माना

जयपुर(राजस्थान)
राजस्थान के नागौर जिले में खनिज विभाग ने 70 करोड़ 37 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अवैध खनन के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई की। इसमें रवन्नाओं के दुरुपयोग और खनिज चोरी का भी पर्दाफाश किया गया। 4 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है जिससे खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।


राजस्थान के नागौर जिले में अवैध खनन के खिलाफ खनिज विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 70 करोड़ 37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और तीन एफआईआर दर्ज करवाई। विभाग को गुप्त सूचना के आधार पर यह सफलता मिली, जिसके तहत तीन अलग-अलग टीमों का गठन कर गोपनीय रूप से छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में अवैध खनन, रवन्नाओं के दुरुपयोग और खनिज चोरी के बड़े मामले सामने आए। राज्य सरकार की सख्ती के चलते खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

जानकार सूत्रों के अनुसार खनन विभाग की ओर से गैरकानूनी खनन गतिविधियों के खिलाफ गठित दलों की ओर से लगातार छापेमारी जारी है। गुरुवार तक विभाग की ओर से 100 कार्रवाई की गई, जिनमें 8 FIR दर्ज हुई है।

मुख्य सचिव ले रहे कलेक्टर से फीडबैक:अवैध खनन पर सरकार की सख्ती के बाद मुख्य सचिव लगातार जिला कलेक्टरों से समीक्षा बैठकों के जरिए जुड़ रहे हैं और अवैध माइनिंग की गतिविधियों पर होने वाली कार्रवाई की जानकारी ले रहे हैं।खुद खनिज सचिव भी विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों में और वर्चुअल बैठकों में अवैध खनन गतिविधियों पर होने वाली कार्रवाई की डिटेल मॉनिटरिंग कर रही है।
राजस्थान में माइनिंग माफिया के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है,,
राज्यभर में खनिज विभाग ने भीलवाड़ा, भरतपुर, सवाई माधोपुर, दौसा, डूंगरपुर में दो जेसीबी समेत 64 मशीनरी और वाहन जब्त किए हैं। इसके साथ ही माइनिंग माफिया पर नकेल कसने के लिए भीलवाड़ा में 35 और भरतपुर में 4 एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

सवाल छत्तीसगढ़ अवैध रेत खनन पर है

क्या ??

छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन पर ऐसी ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा सकती है!!राज्य में भी अवैध रेत खनन ,रेत भरी हाइवा की सुपर रफ्तार, रेत माफियाओं का हौसला और रेत चोरी पर राजनीतिक संरक्षण पर सरकार लगाम लगाएगी??

विकसित भारत युवा संसद/VBYP 2025 के आयोजन में युवाओं की सहभागिता”

बेमेतरा

आयोजन देश भर के 300 चयनित नोडल जिलों में किया जा रहा है
विकसित भारत और राष्ट्रीय युवा संसद का कॉलेज में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसके समापन दिवस में मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा और अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्या श्रीमती वीणा त्रिपाठी रही।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बेमेतरा नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा,

माननीय कार्यक्रम अध्यक्ष प्राचार्या महोदया ,माननीय कॉलेज सदस्यों,मेरे प्यारे विद्यार्थियों आप सभी को बधाई आज का कार्यक्रम युवा संसद का अर्थ युवाओं को राजनीति में भागीदारी तय करना है।उनके स्वविचार राष्ट्र के प्रति युवा उद्गार को समझना है।यह कार्यक्रम ” युवा व्यक्तियों को संसदीय शैली की बहस, चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल होने के लिए एक मंच प्रदान करता है। ये कार्यक्रम वास्तविक संसद के कामकाज की नकल करते हैं।केंद्र सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद कार्यक्रम से छात्रों के बीच नेतृत्व कौशल, नागरिक जागरूकता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की गहरी समझ को बढ़ावा देते हैं।इस बार हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम के प्रति विशेष ध्यान दिए हैं।चुने हुए प्रतिभागी छात्र दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर नेताओं के सामने जिनमें प्रधानमंत्री,लोकसभा अध्यक्ष जैसे शामिल रहते हैं,अपना प्रस्तुति दिखाते है।आज के कार्यक्रम में राजेश शर्मा,गौरव साहू,लक्की साहू आकिब मलकानी नरेश साहू साथ रहे।
शास. पी.जी महाविद्यालय बेमेतरा मे बतौर अध्यक्षता कर रहे प्राचार्या वीणा त्रिपाठी ने अपने संबोधन में उपस्थित अतिथि
कॉलेज स्टाफ प्रतिभागी छात्रों को शुभकामनाएं प्रेषित करते कहा ,
विकसित भारत युवा संसद राज्य स्तरीय (वन नेशन वन इलेक्शन ) आयोजन कार्यक्रम दो दिवसीय है।जिसमें छात्रों को संसद की गरिमा रखते युवा विचार को राष्ट्रीय स्तर पर रखना है।जिसमे नोडल जिला के रूप मे कबीरधाम एवं हमारा बेमेतरा जिला रहा जिसमे 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया टॉप 10 प्रतिभागी सलेक्ट होकर वन नेशन वन इलेक्शन पर दिल्ली संसद मे अपना विचार साझा करेंगे ।

शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बेमेतरा में 21 और 22 मार्च को विकसित भारत युवा संसद 2025 का आयोजन किया गया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निर्देशन में राज्य एन एस एस अधिकारी डॉ नीता वाजपई, कार्यक्रम समन्वयक हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग श्री जैनेंद्र दिवान, एवं जिला संगठक डॉ कामटी सिंह परिहार के निर्देशन में इस कार्यक्रम में 150 युवाओं को जिला नोडल स्तर बेमेतरा में 3 मिनट के” एक राष्ट्र एक चुनाव” विषय पर स्पीच के लिए आमंत्रित किया गया था । जिसमें 100 युवाओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
समापन अवसर पर उत्कृष्ट 20 युवाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ श्रीमती वीणा त्रिपाठी,दिनेश साहू निर्णायक एवं विधायक प्रतिनिधि,पार्षद गौरव साहू, लक्की साहू, आकिब मलकानी और समाजसेवी राजेश शर्मा ने युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास किया। उत्कृष्ट 10 युवाओं को राज्य स्तर पर अपनी बातों को रखने का अवसर प्राप्त होगा जहां से उनको देश के संसद में भी जाने का अवसर प्राप्त होगा। कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में एम डी पटेल रिटायर्ड प्रोफेसर, दिनेश साहू विधायक प्रतिनिधि, उमेश पाठक प्रोफेसर, श्रीमती रीना साहू सामाजिक कार्यकर्ता, और ओ पी मरकाम राजनीतिक विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर डॉ डॉशन साहू और नर्मदा खुटियारे ने किया। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन नोडल अधिकारी प्रोफेसर जितेन्द्र बारले के नेतृत्व मे डी आर साहू, एम एफ़ खान, सुश्री शैल शर्मा, बी आर साहू, डीपी जँघेल , श्रीमती ज्योति , सुश्री श्वेता साहू, डॉ पायल गोस्वामी, आशुतोष शुक्ला के साथ समस्त प्राध्यापकगण और बेरला, नवागढ़,थानखमहरिया, बोड़ला के साथ काफी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

यज्ञ में लगे बाउंसर ने पुजारियों पर चलाई गोली:_हुआ हंगामा, बासी भोजन को लेकर विवाद” एक घायल,,

कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित केशव पार्क में यज्ञ के आयोजन के दौरान फायरिंग होने की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फायरिंग में एक शख्स गोली लग गई है। ऐसा कहा जा रहा है कि इसमें 23 लोग घायल हो गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि यज्ञ में लगे बाउंसर ने पुजारियों पर फायर कर दिया। घटना में जख्मी हुए पुजारी का इलाज चल रहा है। पुजारी को गोली लगने के बाद उसके सैकड़ों साथियों ने जमकर हंगामा किया और थीम पार्क के सामने सड़क पर जाम लगा दिया। घटना के पीछे बासी भोजन को लेकर हुआ विवाद बताया जा रहा है।
आशीष तिवारी नाम के ब्राह्मण को लगी गोली
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यज्ञ में शामिल ब्राह्मणों को बासी भोजन परोसा गया था, जिसका उन्होंने विरोध किया। लगातार हो रहे विरोध के चलते सुबह आयोजकों के सुरक्षा गार्डों और ब्राह्मणों के बीच काफी तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते माहौल गरमा गया और गार्डों ने गुस्से में आकर फायरिंग कर दी। इस हमले में लखनऊ से आए आशीष तिवारी नामक ब्राह्मण को गोली लग गई। घायल को तुरंत LNJP अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस बीच तनाव को देखते हुए मौके पर भारी मात्रा में पुलिसबल की तैनाती की गई है।
1500 से ज्यादा ब्राह्मणों को बुलाया गया था
बता दें कि केशव पार्क में 18 मार्च से 1008 कुंडीय शिव-शक्ति महायज्ञ आरंभ हुआ था। इस वृहद आयोजन में देश भर से 1500 से ज्यादा ब्राह्मणों को बुलाया गया था। इन ब्राह्मणों के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था यज्ञ के आयोजकों ने की थी। ब्राह्मणों का आरोप है कि पहले दिन से ही बाबा के सुरक्षा गार्ड (बाउंसर) उनके साथ किसी न किसी बात को लेकर परेशान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे कभी भी किसी के साथ मारपीट कर देते थे और कोई घूमता दिखाई देता तो उसे भी थप्पड़ या डंडा मार देते थे। कुरुक्षेत्र में यह महायज्ञ 27 मार्च तक चलना है।

राम ने निरंतर देव और कृष्ण ने लगातार मनुष्य बनने की कोशिश की’” राम मनोहर लोहिया समाजवाद के प्रखर चिंतक(23 मार्च जयंती विशेष)

डॉ राममनोहर लोहिया (जन्म 23 मार्च 1910 – मृत्यु -12 अक्टूबर,1967) भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता थे।1

‘कृष्ण’ नामक लेख में डॉ राम मनोहर लोहिया ने लिखा है, ‘कृष्ण की सभी चीजें दो हैं।दो मां, दो बाप, दो नगर, दो प्रेमिकाएं या यों कहिए अनेक।जो चीज संसारी अर्थ में बाद की या स्वीकृत या सामाजिक है, वह असली से भी श्रेष्ठ और अधिक प्रिय हो गई है।



देश में गैर-कांग्रेसवाद की अलख जगाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया चाहते थे कि दुनियाभर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाए।

ब्रिटिश हुकूमत को खुली चुनौती देने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया डॉ. राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महानायकों में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के सामने निर्भीकता और साहस के साथ अपनी आवाज बुलंद की। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं,बल्कि एक प्रखर समाजवादी विचारक और कुशल राजनीतिज्ञ भी थे।उन्होंने समाजवाद के प्रचार-प्रसार और जातिवाद, ऊँच-नीच तथा धार्मिक भेदभाव से मुक्त भारत का सपना देखा।
उनका मानना था कि सर्वजन समभाव की भावना से ओत प्रोत समाज ही सही मायने में स्वतंत्र और समृद्ध हो सकता है।डॉ. लोहिया का जन्म 23 मार्च1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर के शहजादपुर मोहल्ले में हुआ था। उनके पिता हीरालाल लोहिया एक शिक्षित व्यक्ति थे और स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय थे.जिससे लोहिया जी को भी स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बचपन से ही मिली। उन्होंने 1916 में अपनी प्राथमिक शिक्षा टंडन पाठशाला,अकबरपुर से प्राप्त की और बाद में विश्वेश्वर नाथ हाई स्कूल, अकबरपुर से माध्यमिक शिक्षा पूरी की। उच्च_शिक्षा के लिए वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय गए, जहां से उन्होंने बी.ए. किया और इसके बाद बर्लिन विश्वविद्यालय (जर्मनी) से अर्थशास्त्र में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की ।

लेख का निष्कर्ष (जनचौपाल36)
देश में रामराज्य की बातें होती हैं,राष्ट्र में रामराज्य लाएंगे!!इसके लिए राम और कृष्ण का जीवन समाजवाद का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।जिसे हर व्यक्ति द्वारा आत्मसात व अंगीकार करके राष्ट्र में वृहत समाजवाद लाया जा सकता है।बिना समाजवाद के विकसित राष्ट्र की परिकल्पना एक खयाल ही हो सकता है।

दो युगों में दो युगपुरुष जो समाजवाद के उदाहरण है
देवत्व की दिव्यता और मनुष्य की मानवता को एक रूप में समाहित कर एक उत्कृष्ट समाज बनाना,जहां ज्ञान हो,विचार हो,सेवा और समृद्धि का भाव हो ।अनुकरणीय राम पूरा वैभव महल त्याग कर वनवास जाके कंदमूल खाकर दिन बिताए वहीं कृष्ण कारावास में पैदा होकर ग्वाला जीवन व्यतीत कर द्वारिकापुरी बना 56 पकवान खाए।

  1. ↩︎

कैरियर यात्रा की शुरुआत ही जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण होता है

कोई व्यक्ति जीवन के विभिन्न कालावधियों में जिस क्षेत्र में काम करता है या जो काम करता है, उसी को उसकी आजीविका या ‘वृत्ति’ या रोजगार या करिअर (Career) कहते हैं। आजीविका प्रायः ऐसे कार्यों को कहते हैं जिससे जीविकोपार्जन होता है।

करियर यात्रा शुरू करना किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण होता है। आज आप जो निर्णय लेंगे वह आपके भविष्य को आकार देगा, आपकी खुशी, वित्तीय स्थिरता और समग्र संतुष्टि को प्रभावित करेगा। अनगिनत संभावनाओं और उपलब्ध मार्गों के साथ, सही करियर पथ का चयन करना कठिन लग सकता है। हालाँकि, एक संरचित दृष्टिकोण का पालन करके और विभिन्न कारकों पर विचार करके, आप एक ऐसा निर्णय ले सकते हैं जो आपके कौशल, जुनून और आकांक्षाओं के अनुरूप हो। इस लेख में, हम आपको सही करियर पथ चुनने की प्रक्रिया में मार्गदर्शन करेंगे और आपको लाभकारी “रोज़गार मेला” योजना से परिचित कराएंगे जो इस प्रयास में आपकी सहायता कर सकती है।

1. स्व-मूल्यांकन: अपनी शक्तियों और रुचियों को समझना

सही करियर पथ चुनने में पहला कदम खुद को समझना है। अपनी शक्तियों, कौशलों, रुचियों और मूल्यों का आकलन करने के लिए समय निकालें। आप स्वाभाविक रूप से किसमें अच्छे हैं? कौन सी गतिविधियाँ आपको ऊर्जावान बनाती हैं? अपने शौक, शैक्षणिक उपलब्धियों और यहां तक कि दोस्तों और आकाओं से मिली प्रतिक्रिया पर भी विचार करें। आत्म-जागरूकता आपके अनुरूप करियर विकल्पों की पहचान करने की कुंजी है।

2. अनुसंधान: विभिन्न प्रकार के करियर विकल्पों का अन्वेषण करें

दुनिया ढेर सारे करियर विकल्प पेश करती है, जिनमें से कई के बारे में आप शायद जानते भी नहीं होंगे। विभिन्न उद्योगों, कार्य भूमिकाओं और व्यवसायों पर शोध करें। उनकी जिम्मेदारियों, आवश्यक योग्यताओं और संभावित विकास संभावनाओं के बारे में जानें। क्षेत्र में पहले से ही मौजूद पेशेवरों से जानकारी प्राप्त करने के लिए नौकरी मेलों, सेमिनारों और कार्यशालाओं में भाग लें। यहीं पर “रोज़गार मेला योजना” लागू होती है।

3. रोजगार मेले का परिचय: अवसरों का पता लगाना

“रोज़गार मेला” योजना एक मूल्यवान पहल है जिसका उद्देश्य नौकरी चाहने वालों को नियोक्ताओं से जोड़ना है। ये नौकरी मेले ऐसे मंच के रूप में काम करते हैं जहां विभिन्न कंपनियां और संगठन अपने काम और उपलब्ध पदों को प्रदर्शित करने के लिए बूथ स्थापित करते हैं। रोज़गार मेले में भाग लेने से आपको संभावित नियोक्ताओं तक सीधी लाइन मिल सकती है, जिससे आपको बातचीत करने, नौकरी की भूमिकाओं के बारे में पूछताछ करने और यहां तक कि अपना बायोडाटा जमा करने का मौका मिलता है। यह योजना एक पुल के रूप में कार्य करती है, जो नौकरी चाहने वालों और रोजगार के अवसरों के बीच अंतर को कम करती है। यदि आप विविध प्रकार के करियर अवसरों की खोज करने और संभावित नियोक्ताओं से सीधे जुड़ने में रुचि रखते हैं, तो [रोजगार मेला योजना] को अवश्य देखें। यह पहल नौकरी चाहने वालों के लिए उद्योग के पेशेवरों के साथ बातचीत करने, विभिन्न नौकरी भूमिकाओं के बारे में जानने और अपने आवेदन जमा करने के लिए एक शानदार मंच के रूप में कार्य करती है। यह एक पुरस्कृत और सफल करियर यात्रा की दिशा में एक कदम है।

4. कौशल विकास: अंतर को पाटना

संभावित करियर पथों की पहचान करने के बाद, आपको कुछ कौशल संबंधी कमियाँ नज़र आ सकती हैं। स्वयं को अधिक आकर्षक उम्मीदवार बनाने के लिए इन कमियों को दूर करना आवश्यक है। आवश्यक कौशल हासिल करने के लिए कार्यशालाओं, पाठ्यक्रमों या ऑनलाइन कक्षाओं में नामांकन करने पर विचार करें। “रोज़गार मेला” योजना अक्सर कौशल विकास सत्र भी प्रदान करती है, जिससे आपकी क्षमताओं में वृद्धि होती है और आपकी वांछित नौकरी पाने की संभावना बढ़ जाती है।

5. लक्ष्य निर्धारित करना: अल्पकालिक और दीर्घकालिक

एक अच्छी तरह से परिभाषित लक्ष्य आपके करियर की यात्रा को दिशा प्रदान कर सकता है। अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों लक्ष्य निर्धारित करें। अगले कुछ वर्षों में आप क्या हासिल करने का लक्ष्य रखते हैं? यह आपकी दीर्घकालिक आकांक्षाओं से कैसे मेल खाता है? स्पष्ट लक्ष्य रखने से आपको ध्यान केंद्रित और प्रेरित रहने, अपने निर्णयों और कार्यों का मार्गदर्शन करने में मदद मिल सकती है।

6. मार्गदर्शन की तलाश: नेटवर्किंग और मेंटरशिप

नेटवर्किंग और मेंटरशिप की शक्ति को कम मत आंकिए। लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने इच्छित क्षेत्र के पेशेवरों से जुड़ें। मूल्यवान संबंध बनाने के लिए उद्योग कार्यक्रमों और सम्मेलनों में भाग लें। एक गुरु जिसने उस रास्ते का अनुभव किया है जिस पर आप विचार कर रहे हैं, वह अमूल्य अंतर्दृष्टि, सलाह और सहायता प्रदान कर सकता है।

7. परीक्षण और त्रुटि: परिवर्तन को अपनाना

करियर का रास्ता चुनने का मतलब यह नहीं है कि आप जीवन भर के लिए उसमें बंध कर रह जाएं। कई व्यक्ति सही फिट पाने से पहले कई बार करियर बदलते हैं। यदि आपको एहसास हो कि आपकी प्रारंभिक पसंद उतनी संतोषजनक नहीं है जितनी आपने उम्मीद की थी, तो बदलाव की संभावना को स्वीकार करें। प्रत्येक अनुभव आपके विकास में योगदान देता है और आपको आपकी सच्ची बुलाहट के करीब लाता है।

8. करियर काउंसलिंग:

करियर काउंसलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्तियों को उनके करियर पथ के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें किसी व्यक्ति की रुचियों, कौशलों, मूल्यों, व्यक्तित्व लक्षणों और आकांक्षाओं को समझने के उद्देश्य से गतिविधियों और मूल्यांकनों की एक श्रृंखला शामिल है ताकि उन्हें उपयुक्त करियर विकल्पों की ओर मार्गदर्शन किया जा सके। करियर काउंसलिंग का लक्ष्य व्यक्तियों को ऐसे करियर पथों की पहचान करने और आगे बढ़ाने में सहायता करना है जो उनकी ताकत और लक्ष्यों के अनुरूप हों, जिससे नौकरी में अधिक संतुष्टि और सफलता मिले। आपको जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की ओर से एक ऐसी योजना है जिसका लाभ आप उठा सकते हैं। कैरियर परामर्श योजना आपके कैरियर की यात्रा शुरू करने में सहायक होगी, स्कीम अवश्य देखें।

निष्कर्ष: सफलता की ओर अपना मार्ग प्रशस्त करना

सही करियर पथ चुनने के लिए आत्मनिरीक्षण, अनुसंधान, कौशल विकास और नेटवर्किंग की आवश्यकता होती है। “रोज़गार मेला” योजना, नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं के बीच एक पुल के रूप में कार्य करते हुए, आपकी यात्रा में महत्वपूर्ण सहायता कर सकती है। याद रखें, एक सफल करियर की राह शायद ही कभी सीधी रेखा होती है। प्रक्रिया को अपनाएं, अनुकूलनशील बने रहें और अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में निवेश करना कभी बंद न करें। आपका सपनों का करियर पहुंच के भीतर है—वहां जाएं और उसका पीछा करें