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Friday, October 23, 2026
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नगालैंड से रायपुर के लिए लेकर निकले दो हिमालयन भालू, एक ही पहुंचा जंगल सफारी

नंदनवन जंगल सफारी की टीम दो भालू को लेकर 18 फरवरी को नगालैंड से निकली थी। भालू की मौत हजारीबाग (झारखंड) के पास हुई है। बताया जाता है कि जिस गाड़ी में भालू को लाया जा रहा था, उसे पांच से छह जगहों पर रोका गया।

नगालैंड के दीमापुर जू और नंदनवन जंगल सफारी के बीच वन्यजीवों की अदला-बदली हुई। एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत यहां से पांच चीतल और दो ब्लैक बैग लेकर दो विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गई और वापसी में वहां से दो हिमालयन भालू लेकर निकली।

 मगर, टीम सिर्फ एक मादा हिमालयन भालू जंगल सफारी में तीन दिन पहले पहुंची है, जिसे क्वारेंटाइन में रखा गया है। दरअसल, नर हिमालयन भालू की रास्ते में 19 फरवरी को मौत हो गई। इस मौत को लेकर वन विभाग छुपाता रहा है। भालू की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है।

बताते चलें कि टीम दो भालू को लेकर 18 फरवरी को नगालैंड से निकली थी। भालू की मौत हजारीबाग (झारखंड) के पास हुई है। बताया जाता है कि जिस गाड़ी में भालू को लाया जा रहा था, उसे पांच से छह जगहों पर रोका गया।इस दौरान वेटनरी डॉक्टर भी मौजूद थे, फिर भी भालू की मौत हो गई।

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि मौत डाक्टरों की लापरवाही के चलते हुई होगी। उन्होंने मांग की है कि इस संबंध में जांच-पड़ताल की जानी चाहिए। आखिर रास्ते में भालू की मौत कैसे हुई? यह वन विभाग की लापरवाही भी सामने आ सकती है।

वन्यजीव प्रेमियों में रोष

रायपुर के वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने भालू की मौत को लेकर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि वे कौन डॉक्टर थे, जो भालू लेकर आए थे? भालू कैसे मरा, कहां मरा, कब मरा? अगर मरा तो पोस्टमार्टम कहां किया गया? पोस्टमार्टम गोपनीय तरीके से क्यों किया गया? पोस्टमार्टम में सिविल सोसायटी का प्रतिनिधि कौन था?

दोनों डॉक्टरों में से एक डॉक्टर को किसका संरक्षण मिला है कि जिसे सदन में हटाने का आदेश होने के बावजूद भी हटाया नहीं गया है। सिंघवी ने आरोप लगाया कि लापरवाही से वन्य जीवों की हो रही मौतों से वन विभाग कभी सबक नहीं लेगा।

अभी हाल ही में बारनवापारा अभयारण्य से डाक्टर की अदूरदर्शिता और नादानी के चलते एक सब-एडल्ट मादा बाइसन को पड़कर अकेले गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व भेजा गया। वहां पहुंचने पर उसकी मौत हो गई, उससे भी कोई सबक नहीं लिया। सिंघवी ने मांग की है कि जंगल सफारी और कानन पेंडारी से सफेद भालू सहित सभी वन्य प्राणियों के एक्सचेंज प्रोग्राम पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।

दिल्ली के नरेला में सीवर सफाई के दौरान दर्दनाक हादसा, 2 मजदूरों की मौत, एक गंभीर

दिल्ली के नरेला में सीवर सफाई के दौरान दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीसरा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है.
विजय मोची और नंदू जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गए, बचाने गए अनिल कुमार भी चपेट में आ गए. अनिल कुमार गंभीर हालत में
अस्पताल में भर्ती हैं और अभी बयान देने की स्थिति में नहीं हैं. पुलिस ने लापरवाही का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

राजधानी दिल्ली के नरेला इलाके में शुक्रवार दोपहर सीवर की सफाई के दौरान दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गई. वहीं, तीसरा व्यक्ति बेहोश हो गया. यह हादसा नरेला के पॉकेट-6 स्थित मानसा देवी अपार्टमेंट के पास हुआ. जहां सफाई कार्य के दौरान तीनों मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आ गए. फिलहाल, तीसरा व्यक्ति बयान देने में असमर्थ है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

दिनभर आराम, फिर भी खूब हो रही थकान? हो जाएं सावधान, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

बिना काम किए भी अगर थकान और कमजोरी महसूस हो रही है तो सावधान हो जाएं. इसके लिए कई तरह की बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं. ये समस्या ज्यादा दिनों रहने पर डॉक्टर से जाकर सलाह लेनी चाहिए.

Fatigue- Weakness Causes : ज्यादा काम और भागदौड़ से थकान होना काफी आम है. यह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हो सकती है. लेकिन अगर अच्छा-खासा आराम करने के बावजूद भी थकान और कमजोरी हो रही है तो स्थिति गंभीर है. ये किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, थकान और कमजोरी के एक नहीं कई कारण हो सकते हैं. खानपान में पोषण की कमी, मानसिक तनाव, खराब लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद न लेना या फिर बीमारियों की वजह से ऐसा हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं बिना काम थकान-कमजोरी महसूस होना कितनी खतरनाक, क्या करना चाहिए..

बहुत ज्यादा थकान होने का कारण

1. पोषक तत्वों की कमी

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे लोग जिन्हें पोषक तत्व सही तरह नहीं मिल पाते हैं, उन्हें ज्यादा थकान महसूस हो सकती है. खासतौर पर शरीर में आयरन की कमी होने से हीमोग्लोबिन का लेवल घट जाता है और ऑक्सीजन की सही तरह सप्लाई नहीं हो पाती है. जिससे ज्यादा थकान महसूस होती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में करीब 30% लोगों में आयरन की कमी है. इसके अलावा विटामिन-D और B12 की कमी से भी थकान हो सकती है.

2. डिप्रेशन (Depression)

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, लंबे समय तक तनाव बने रहने से शरीर की एनर्जी खत्म होने लगती है. क्रॉनिक स्ट्रेस और डिप्रेशन से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे थकान महसूस होने लगती है. इसका एक कारण यह भी है कि ज्यादा चिंता नींद को प्रभावित करने लगती है, जिससे थकान ज्यादा होने लगती है.

3. एनीमिया या थायरॉइड 

एनीमिया (Anemia) की वजह से भी ज्यादा थकान महसूस हो सकती है. दरअसल, इस बीमारी में शरीर पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता है और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने लगती है,जो थकान और कमजोरी का कारण बन सकती है. इसके अलावा थायरॉइड (Thyroid) में भी शरीर में सुस्ती और थकान हो सकती है.

थकान होने के अन्य कारण

1. स्लीप एपनिया में सोते समय बार-बार सांस रुकने से नींद प्रभावित होती है, जिस कारण थकान हो सकती है.

2. ल्यूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों में इम्यून सिस्टम हेल्दी कोशिकाओं पर अटैक कर उनकी एनर्जी को कम कर देता है, जिससे थकान होती है.

3. हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर सही तरह एनर्जी का इस्तेमाल नहीं कर सकता है, जो थकान का कारण बन सकता है.