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Sunday, November 1, 2026
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“सपनों को लक्ष्य बनाकर करें निरंतर प्रयास”: CM साय ने मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित

रायपुर/बलरामपुर, 5 मई 2026

मुख्यमंत्री बिष्णु देव साय ने आज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए मजबूत हौसला और निरंतर प्रयास सबसे जरूरी है।

बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा जताई, वहीं कई छात्रों ने और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि “सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।” उन्होंने छात्रों को अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्कृष्ट विद्यार्थियों से आत्मीय मुलाकात अवसर पर सीएम साय से मिलने में जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्री कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता,   कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन रहे।






गैस कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार: 400 सिलेंडर जब्त, खाद्य विभाग का सख्त एक्शन

रायपुर, 5 मई 2026

रायपुर समेत पूरे प्रदेश में गैस की कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। हाल के दिनों में विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान चलाया गया, जिसके तहत अब तक करीब 400 एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं।

शहरों में अवैध रिफिलिंग और गैस के गैरकानूनी भंडारण के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। जिला प्रशासन रायपुर की खाद्य शाखा ने एलपीजी वितरण व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी है।

खाद्य नियंत्रक ने स्पष्ट किया है कि गैस की अवैध बिक्री और कालाबाजारी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता के लिए डिजिटल पहल
एलपीजी वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग और ट्रैकिंग सुविधा भी शुरू की गई है। इससे उपभोक्ताओं को गैस की उपलब्धता और डिलीवरी की जानकारी आसानी से मिल सकेगी, वहीं अवैध गतिविधियों पर भी रोक लगेगी।

कठोर दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश
         विभागीय अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल प्राथमिक जांच की जाती है। जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें लाइसेंस निलंबन, भारी जुर्माना और सामग्री की जब्ती जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही भी की जा रही है।पारदर्शी वितरण प्रणाली और निगरानी
       
नागरिकों से अपील
       जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है यदि उन्हें गैस की कालाबाजारी या वितरण में कोई अनियमितता की जानकारी मिलती है, तो वे तत्काल इसकी सूचना जिला खाद्य शाखा को दें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि जिले में घरेलू गैस के वितरण और निगरानी हेतु निर्धारित सरकारी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। अनेक स्थानों पर छापेमारी कर गैस वितरकों और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

तमिलनाडु में ‘थलापति’ का जलवा: पहले ही चुनाव में TVK 100 पार, 1 वोट की जीत ने रचा इतिहास

डिजिटल डेस्क चेन्नई/विशेष -05/05/2026

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। अभिनेता से नेता बने की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सियासी समीकरणों को हिला दिया है। 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है, ऐसे में सरकार गठन को लेकर जोड़-तोड़ तेज हो गया है।

चुनाव परिणाम बेहद खास इसलिए भी हैं क्योंकि यह TVK का पहला विधानसभा चुनाव था, फिर भी पार्टी एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरती नजर आ रही है। चेन्नई में विजय के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जहां समर्थकों की भारी भीड़ जुट रही है।

वोट से ऐतिहासिक जीत, लोकतंत्र का रोमांच चरम पर
तमिलनाडु के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा एक सीट की रही, जहां TVK उम्मीदवार ने मात्र 1 वोट से जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया।
उन्हें 83,013 वोट मिले, जबकि के उम्मीदवार को 83,012 वोट मिले।

यह मुकाबला लोकतंत्र के सबसे रोमांचक मुकाबलों में गिना जा रहा है।
फिल्मी स्टार से ‘राजनीतिक नायक’ तक विजय का सफर

दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने अपने फिल्मी करियर में कई ब्लॉकबस्टर दी हैं, लेकिन अब उन्होंने राजनीति में भी ‘मास्टर स्ट्रोक’ खेल दिया है।

पहले ही चुनाव में उनकी पार्टी का 100 पार पहुंचना इस बात का संकेत है कि राज्य में पारंपरिक राजनीति को बड़ी चुनौती मिल रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने और की विरासत वाली राजनीति को सीधी चुनौती दी है।

सरकार गठन को लेकर तेज हलचल, कांग्रेस की नजर TVK पर

तमिलनाडु में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में सरकार गठन के लिए गठजोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार TVK के साथ जाने पर विचार कर सकती है।वहीं, ‘INDIA’ गठबंधन की स्थिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, खासकर तमिलनाडु और बंगाल के नतीजों के बाद।






पांच राज्यों में सियासी सुनामी: बंगाल-असम-पुडुचेरी में ‘कमल’, केरल में ‘पंजा’, तमिलनाडु में त्रिशंकु—विजय बने नए केंद्र-बिंदु

नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई 05/05/2026

पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए ‘कमल’ खिला दिया, जबकि केरल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ‘पंजा’ चला। वहीं तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा के हालात बन गए हैं, जहां अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।

बंगाल में पहली बार खिला ‘कमल’, ममता को बड़ा झटका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित जी के नेतृत्व में भाजपा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कर्मभूमि बंगाल में पहली बार सत्ता का स्वाद चखा। यह जीत भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और जनता के सामूहिक प्रयास का परिणाम मानी जा रही है।

सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी को लगा, जो अपनी ही सीट से चुनाव हार गईं। वहीं तृणमूल कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा पसरा नजर आया, जबकि भाजपा समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

काउंटिंग के बीच बवाल, सड़कों पर टकराव
मतगणना के दौरान बंगाल के कई इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई। कोलकाता में भाजपा और TMC समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, TMC कार्यालय में तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
इसी बीच कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी के आवास के बाहर ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए।

हुमायूं कबीर का डबल धमाका
इस चुनाव में हुमायूं कबीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो सीटों पर जीत दर्ज की। कथित स्टिंग विवाद के बावजूद जनता ने उन पर भरोसा जताया, जो इस चुनाव का अप्रत्याशित पहलू रहा।

तमिलनाडु में विजय का उदय, स्टालिन तीसरे स्थान पर
तमिलनाडु में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।विजय थलापति की पार्टी पहले नंबर पर पहुंच गई है, जबकि एम के स्टालिन की पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गई है। राज्य में सरकार गठन को लेकर सियासी जोड़-तोड़ तेज हो गया है।



असम में फिर खिला ‘कमल’: भाजपा बहुमत पार, बाजार में भी दिखा भरोसे का असर

दिसपुर/चुनाव विशेष -05/05/2026

विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे राज्य में एक बार फिर ‘कमल’ खिलता नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों से ही भाजपा बढ़त बनाए हुए है, जो अब स्पष्ट बहुमत में बदलती दिख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह जीत राज्य में किए गए विकास कार्यों और पीएम मोदी के नेतृत्व पर जनता के भरोसे का परिणाम है। साथ ही स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं की मजबूत पकड़ ने भी भाजपा की राह आसान बनाई।

जनता का भरोसा, विकास पर मुहर
असम में भाजपा ने बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर जो काम किए, उन्हें जनता ने स्वीकार किया है। यही वजह है कि चुनावी नतीजों में पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।

बाजार में भी दिखा असर, उतार-चढ़ाव के बीच तेजी
चुनावी रुझानों का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। और दोनों में शुरुआती तेजी दर्ज की गई, हालांकि ऊपरी स्तर से हल्की गिरावट भी देखने को मिली।
फिलहाल सेंसेक्स करीब 200 अंकों और निफ्टी 60 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आ रहा है।

चौपाल विशेष
असम विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसे विकास कार्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर जनता के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी नतीजों का असर शेयर बाजार पर भी दिखा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच बढ़त दर्ज की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा“ अविस्मरणीय जीत”, बंगाल चुनाव परिणाम पर देशभर में चर्चा

बंगाल विजय – 04/05/2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अविस्मरणीय जीत” करार दिया है। चुनाव नतीजों के सामने आने के बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता का आभार जताते हुए कहा कि यह जीत केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि विकास और जनविश्वास की जीत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में एक कार्यक्रम में भाग लिया।

“भाजपा को एकतरफा जीत मिलती दिख रही है, वहीं टीएमसी के विजय रथ का पहिया थम चुका है। खबर लिखे जाने तक भाजपा करीब 200 और टीएमसी लगभग 100 सीटों पर बताई जा रही है। यह प. बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत मानी जा रही है।”

चर्चा में पश्चिम बंगाल की जनता ने लोकतंत्र को मजबूती देने का काम किया है और बदलाव के लिए अपना समर्थन स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य के विकास के लिए पहले से भी अधिक प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी।

इस चुनाव में सत्तारूढ़ और प्रमुख विपक्षी दल के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कई सीटों पर कांटे की टक्कर रही, जिससे चुनाव परिणाम और भी दिलचस्प बन गए।

चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहा, जबकि उच्च मतदान प्रतिशत ने लोकतंत्र में जनता की सक्रिय भागीदारी को दर्शाया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम राज्य की राजनीति में नए समीकरण स्थापित कर सकता है। वहीं, विपक्षी दलों ने भी नतीजों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है और कई जगह पुनर्गणना की मांग उठाई है।

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रतिशत इस बार उल्लेखनीय रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण मतदान कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

जनसंख्या केवल “संख्या” नहीं, बल्कि एक आर्थिक और सामाजिक चुनौती है।

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डिजिटल डेस्क – 04/05/2026

आंकड़ों की जुबानी—जनसंख्या वृद्धि का असली सच
जब हम जनसंख्या वृद्धि की बात करते हैं, तो अक्सर हम केवल ‘भीड़’ देखते हैं, लेकिन आंकड़ों के पीछे छिपे संकेत भविष्य की रणनीति तय करते हैं। आइए जानते हैं कि वर्तमान में आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं।

वृद्धि दर का गणित: रफ्तार कम, लेकिन संख्या ज्यादा
भारत की वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन समस्या ‘आधार जनसंख्या’ (Base Population) की है।1951-1981 के बीच वृद्धि दर लगभग 2.2\% प्रति वर्ष थी।

वर्तमान (2024-2026 अनुमान) पर यह घटकर लगभग 0.8\% से 0.9\% के बीच रह गई है।तथ्य यह है कि भले ही दर कम हुई है, लेकिन भारत हर साल एक औसत देश (जैसे ऑस्ट्रेलिया या ग्रीस) के बराबर आबादी अपनी कुल जनसंख्या में जोड़ देता है।

प्रजनन दर (TFR): सफलता और चुनौती
‘टोटल फर्टिलिटी रेट’ (एक महिला द्वारा अपने जीवनकाल में बच्चों को जन्म देने की औसत संख्या) में भारी सुधार हुआ है।
रिप्लेसमेंट लेवल: जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए 2.1 का TFR आदर्श माना जाता है।

वर्तमान स्थिति में भारत का राष्ट्रीय औसत 1.9 से 2.0 के करीब पहुँच गया है। इसका मतलब है कि भविष्य में आबादी स्थिर होना शुरू हो जाएगी।
क्षेत्रीय असमानता: छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह दर राष्ट्रीय औसत के करीब है, लेकिन कुछ राज्यों में अब भी जागरूकता की कमी के कारण यह 2.1 से ऊपर है।

जनसांख्यिकीय – लाभांश /अवसर/जोखिम
भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है (लगभग 65\% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है)। यदि इन युवाओं को सही शिक्षा और रोजगार मिले, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।यदि जनसंख्या नियंत्रण और संसाधनों का प्रबंधन सही नहीं हुआ, तो यही ‘युवा शक्ति’ बेरोजगारी और असंतोष का कारण भी बन सकती है।(उपलब्ध तथ्य और आंकड़ों पर एक लेख)

ज्योतिपति और ज्वाला का संवाद: आंकड़ों का विश्लेषण
(स्थान: वही चौपाल, ज्योतिपति हाथ में एक चार्ट लिए हुए हैं)
ज्वाला: “ज्योतिपति भैया, लोग कह रहे हैं कि अब दर कम हो रही है, तो फिर चिंता किस बात की? हमें तो अभी भी बस और ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं मिलती!”
ज्योतिपति: (मुस्कुराते हुए) “ज्वाला, यही तो गणित का खेल है। मान लो एक बड़ी नदी में बाढ़ आ रही है। अगर पानी बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो जाए, तो इसका मतलब ये नहीं कि बाढ़ उतर गई। पानी अभी भी बढ़ रहा है, बस पहले से धीरे।”

ज्वाला: “इसका मतलब हमारी आबादी अभी और बढ़ेगी?”
ज्योतिपति: “हाँ, विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2047 या उसके आस-पास भारत की आबादी अपने शिखर (Peak) पर होगी, और उसके बाद स्थिर होकर कम होना शुरू होगी। असली चुनौती इस बीच के समय की है। हमें इन बढ़ते हाथों को काम देना है और सीमित संसाधनों को बचाना है।”

ज्वाला: “ओह! तो इसका मतलब है कि ‘आंकड़े’ हमें चेतावनी दे रहे हैं कि अभी चैन से बैठने का समय नहीं आया है।”
ज्योतिपति: “बिल्कुल सही! आंकड़ों का संदेश साफ है— नियोजन ही समाधान है, चाहे वो परिवार का हो या देश का।”

चर्चा के लिए कुछ चौपाल बिंदु:संसाधन और शहरीकरण
प्रति व्यक्ति जमीन और जल की उपलब्धता लगातार घट रही है। 2030 तक भारत की 40% आबादी शहरों में होगी, जिससे शहरी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ेगा।










बढ़ती जनसंख्या: क्या हम सीमित संसाधनों के साथ एक ‘विस्फोट’ की ओर बढ़ रहे हैं?

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डिजिटल डेस्क – 04/05/2026

आज जब हम विकास की बात करते हैं, तो एक बड़ी चुनौती हमारे सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती है— जनसंख्या विस्फोट। संसाधन (जमीन, पानी, अनाज) सीमित हैं, लेकिन उनका उपभोग करने वाले हाथ निरंतर बढ़ रहे हैं।

क्या यह आने वाले समय के लिए भयावह स्थिति है?
जी हाँ, यदि जनसंख्या वृद्धि की दर और संसाधनों के प्रबंधन में तालमेल नहीं बैठा, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है।

सीमित संसाधन और पर्यावरण:
कृषि योग्य भूमि घट रही है और जल संकट गहरा रहा है।बेरोजगारी मुंह बाएं खड़ी है जितनी अधिक आबादी होगी, रोजगार के अवसरों पर उतना ही अधिक दबाव बढ़ेगा।अधिक आबादी का अर्थ है अधिक प्रदूषण और जंगलों की कटाई।

सरकार के प्रयासऔर नीतियां परिवार नियोजन कार्यक्रम
भारत सरकार और राज्य सरकारें (जैसे छत्तीसगढ़ शासन) इस दिशा में कई कदम उठा रही हैं। ‘हम दो हमारे दो’ के नारे के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गर्भनिरोधक साधनों और नसबंदी शिविरों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है।

मिशन परिवार विकास महिला सशक्तिकरण
देश के उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ प्रजनन दर (TFR) अधिक है। लड़कियों की शादी की उम्र और उनकी शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि शिक्षित महिला परिवार नियोजन को बेहतर समझती है।

जन जागरूकता: सबसे बड़ा समाधान।कानून से ज्यादा असर जागरूकता का होता है।छोटे परिवार के आर्थिक और स्वास्थ्य लाभों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना।धार्मिक और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना।

युवाओं को जिम्मेदारी का अहसास कराना कि जनसंख्या नियंत्रण ‘देश सेवा’ का ही एक रूप है।

चौपाल चर्चा: ज्योतिपति और ज्वाला का संवाद
(स्थान: गाँव की चौपाल, हाथ में अखबार लिए ज्योतिपति और ज्वाला बैठे हैं)

ज्वाला:(चिंता में) “ज्योतिपति भैया, ये जो हर दिन आबादी की खबरें आ रही हैं, क्या आपको नहीं लगता कि एक दिन पैर रखने की जगह भी नहीं बचेगी? जमीन तो उतनी ही है, पर घर बढ़ते जा रहे हैं।”

“सही पकड़े हो ज्वाला। देखो, धरती एक थाली की तरह है। अगर थाली में चार लोगों का खाना है और दस लोग बैठ जाएं, तो कोई भी पेट भर के नहीं खा पाएगा। यही हाल हमारे संसाधनों का है।”ज्योतिपति ने कहा।

“तो सरकार क्या कर रही है? क्या कोई सख्त कानून नहीं आना चाहिए?”ज्वाला का प्रश्न

ज्योतिपति अपनी जानकारी पर कहा “सरकार नीतियां तो बना रही है ज्वाला, लेकिन असली ‘परिवर्तन’ तो तब आएगा जब आम आदमी अपनी जिम्मेदारी समझेगा। जब तक हम ये नहीं समझेंगे कि छोटा परिवार ही सुखी परिवार है, तब तक कोई भी कानून पूरी तरह सफल नहीं होगा। आखिर आने वाली पीढ़ी को हम विरासत में भीड़ देंगे या बेहतर सुविधा, ये हमें आज तय करना होगा।”

“बात तो सोलह आने सच है भैया। अब जन-जन को जागना ही होगा।”ज्वाला का समर्थन।


ईश्वर का स्वरूप अनुभूति में है दिखावे में नहीं ज्ञान और तर्क में भी नहीं

रविवारीय – 03/05/2026

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ” यह अध्यात्म है अनुभूति है।अनुभूति से अनुभव है ईश्वर की वास्तविक अनुभूति वह गूढ़, आंतरिक अनुभव है जो मनुष्य की साधारण इंद्रियों और शब्दों से परे होती है। इसे शब्दों और सोच के माध्यम से व्यक्त करना कठिन इसलिए होता है क्योंकि यह अनुभूति ज्ञान या तर्क से नहीं, बल्कि एक गहरी भावना या आंतरिक चेतना से जुड़ी होती है। यह अनुभूति हमारे मन और हृदय की गहराइयों में होती है, जहां शब्द सीमित और अनुभव असीमित होता है।

अनुभूति के लिए आवश्यक है मन की शांति, एकाग्रता और अंदर की तरफ झांकने की क्षमता। जब मन सभी बाहरी विचारों, भावनाओं और मानसिक हलचल से मुक्त होता है, तभी वह उस गहन अनुभूति को महसूस कर पाता है जिसे हम ईश्वर की अनुभूति कहते हैं। यह ऐसी स्थिति होती है जहां न तो सोच की कोई बाधा रहती है और न ही शब्दों की जरूरत होती है।

इस प्रकार, ईश्वर की अनुभूति कोई बाहरी वस्तु या विचारधारा नहीं है बल्कि एक सहज, आंतरिक अनुभव है जो मन और भावनाओं की सीमा को पार करके होती है। इसे महसूस करना ‘मन की छठी इंद्रिय’ या ‘भावना की अनुभूति’ जैसा होता है, जो हृदय की गहराई में होती है और जिसका कोई सटीक वर्णन शब्दों में संभव नहीं होता।

साधारण उदाहरण दें तो जैसे प्रकाश को हम आंखों से देख पाते हैं लेकिन उसकी प्रकृति को पूरी तरह समझाना शब्दों में मुश्किल होता है, उसी तरह ईश्वर की अनुभूति भी मन और हृदय की गहन संवेदना है, जिसका अनुभव केवल अनुभव के द्वारा ही संभव है, न कि केवल शब्दों या सोच के माध्यम से।

इसलिए कहा जाता है कि ईश्वर को “देखना” नहीं बल्कि “अनुभव करना” होता है और यह अनुभव उच्चतम चेतना का परिणाम है जो साधना, ध्यान और आंतरिक समझ से प्राप्त होता है

नील-हरित शैवाल: सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल जैव-उर्वरक से टिकाऊ कृषि की नई राह

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बेमेतरा, 03 मई 2026

जिले में कृषि को पर्यावरण अनुकूल एवं किफायती बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से शासकीय प्रक्षेत्र मोहगांव में नील-हरित शैवाल (ब्लू ग्रीन एल्गी) का उत्पादन सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया है। यह जैव उर्वरक धान सहित अनेक फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है और रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम करने में सहायक होगा।

कृषि विभाग ने मोहगांव में तैयार मदर कल्चर के माध्यम से इस तकनीक को जिलेभर में विस्तार देने की कार्ययोजना तैयार की है। इसी कड़ी में ग्राम मौहाभाठा के प्रगतिशील कृषक टोकेश्वर साहू के खेत में भी इसका उत्पादन शुरू किया गया है। नील-हरित शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर कर फसलों को प्राकृतिक पोषण प्रदान करता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और मृदा की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहती है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को फील्ड डेमोन्स्ट्रेशन, कार्यशालाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने जिले के सभी किसानों से इस उन्नत तकनीक को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यह खेती को लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

यह पहल राज्य एवं केंद्र सरकार की जैविक खेती नीति के अनुरूप है और आने वाले समय में बेमेतरा जिला इस क्षेत्र में अन्य जिलों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।