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कोंडागांव में 38 करोड़ की 11 सड़कों का भूमिपूजन, PMGSY से गांवों को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, 06 मई 2026

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री ने जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 38 करोड़ 37 लाख रुपए की लागत वाली 11 नई सड़कों का भूमिपूजन किया। फेज-4 के अंतर्गत बनने वाली ये सड़कें दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी।

परियोजना के तहत ग्राम खड़पड़ी, मटवाल, कुधूर, खोड़सानार, लखापुरी, नहकानार और छोटेउसरी सहित कई गांवों में सड़क निर्माण होगा। इनमें लखापुरी से एहरा तक 7 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण 685.89 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा, जबकि मटवाल में वेतबेड़ा रोड से ढोलमांदरी तक 5.50 किलोमीटर सड़क 503.36 लाख रुपए में बनाई जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि के नेतृत्व में बस्तर क्षेत्र अब माओवाद के प्रभाव से निकलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। उन्होंने छोटेउसरी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पहले पहुंचना कठिन था, वहां अब पक्की सड़कों के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएं पहुंच रही हैं।

ग्राम मटवाल में मंत्री ने ‘लखपति दीदी’ श्रीमती वैदयी से मुलाकात कर उनकी आत्मनिर्भरता की सराहना की और महिलाओं को महतारी वंदन योजना के साथ पशुपालन और मुर्गी पालन जैसे रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इन सड़कों के निर्माण से कोंडागांव के सुदूर गांव मुख्य मार्गों से जुड़ेंगे। इससे आवागमन आसान होने के साथ-साथ शासकीय योजनाओं और आपातकालीन सेवाओं का लाभ भी तेजी से अंतिम छोर तक पहुंच सकेगा।


खबर पर मुख्यमंत्री का त्वरित एक्शन, मैनपाट की बस्ती में पेयजल व्यवस्था के निर्देश

रायपुर, 6 मई 2026

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र की चेराजोबला बस्ती में पेयजल समस्या से जुड़ी खबर पर तुरंत संज्ञान लिया है।

सुबह अखबार पढ़ते ही मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत को फोन किया और तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित बस्ती में जल्द से जल्द साफ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए मौके पर जाकर स्थिति का आकलन करने और आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

उन्होंने निर्देश दिए कि जरूरत के अनुसार हैंडपंप खनन, वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था और स्थायी समाधान पर प्राथमिकता से काम किया जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विशेष पिछड़ी जनजातियों वाले क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसका असर ज़मीन पर दिखना चाहिए।

बंगाल में संवैधानिक महासंग्राम: ममता की ‘नो एंट्री’, हार के बाद भी कुर्सी छोड़ने से इनकार!

डिजटलख़बर- 06/05/2026

संवाद: संवैधानिक संकट या राजनीतिक गतिरोध?

ज्योतिपति: ज्वाला, बंगाल की राजनीति में जो घट रहा है, वह क्या लोकतंत्र के लिए एक नई चुनौती है? ममता बनर्जी चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर रही हैं और पूरी चुनाव प्रणाली पर सवाल उठा रही हैं। क्या हमारा संविधान ऐसी स्थिति के लिए तैयार है?

ज्वाला:ज्योतिपति, तुम्हारा प्रश्न जायज है। भारतीय लोकतंत्र में यह स्थिति दुर्लभ है क्योंकि यहाँ ‘जनादेश’ को सर्वोपरि माना जाता है। यदि कोई मुख्यमंत्री अपनी सीट हार जाता है, तो नैतिक आधार पर उसे तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन कानूनी तौर पर स्थिति थोड़ी पेचीदा है।

ज्योतिपति:कानून क्या कहता है? क्या कोई हारा हुआ मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है?
ज्वाला: देखो, अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं है, वह 6 महीने तक मंत्री या मुख्यमंत्री रह सकता है। लेकिन यह नियम आमतौर पर तब लागू होता है जब कोई नया व्यक्ति पद संभालता है। यदि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री अपनी सीट हार जाए और उसकी पार्टी के पास बहुमत हो, तो तकनीकी रूप से वह 6 महीने के भीतर किसी अन्य सीट से उपचुनाव जीतकर वापस आ सकता है।

ज्योतिपति: लेकिन यहाँ तो वह चुनाव आयोग पर ही सवाल उठा रही हैं! यदि मुख्यमंत्री हार स्वीकार न करे और इस्तीफा न दे, तो क्या यह संवैधानिक संकट या जनमत संग्रह का अपमान नहीं है?
ज्वाला: बिल्कुल है। यदि कोई हार को स्वीकार नहीं करता, तो मामला ‘चुनाव याचिका’ के जरिए हाईकोर्ट जाता है। लेकिन यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार कर दे, तो राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

ज्योतिपति: और विपक्ष का इस पर साथ देना? अगर यह आंदोलन का रूप ले ले, तो क्या होगा?
ज्वाला: ज्योति, लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है। लेकिन यदि कोई बड़ा आंदोलन चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाओं की साख गिराने के लिए किया जाता है, तो यह ‘राजतंत्र’ की मानसिकता को दर्शाता है, ‘प्रजातंत्र’ की नहीं।

अगर मुख्यमंत्री बड़े अंतर से हारी हैं और फिर भी चुनाव प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर रही हैं, तो उन्हें अदालत में सबूत देने होंगे। बिना सबूत के प्रणाली पर उंगली उठाना अराजकता को जन्म दे सकता है।

ज्योतिपति:यानी अंततः फैसला जनता के समर्थन और न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर निर्भर करेगा?
ज्वाला: सही कहा। भारत के इतिहास में यह एक ऐसा उदाहरण बन सकता है जहाँ नैतिकता बनाम कानून की सीधी जंग होगी। यदि कोई हारा हुआ प्रत्याशी पद नहीं छोड़ता, तो अंततः राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय को ही इस नई संवैधानिक व्याख्या को स्पष्ट करना होगा।

नोट: यह संवाद प्रमुख समाचार चैनलों, समाचार पत्रों और जानकार सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें पात्रों की कोई निजी राय शामिल नहीं है; यह पूरी तरह से देखी/सुनी खबरों के विश्लेषण और संवैधानिक तथ्यों पर आधारित चर्चा है।





चाय बाजार:चाय बागानों से आई हल्की सरसराहट, उत्पादन में क्या हुआ बदलाव?

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नई दिल्ली 06 मई 2026

देश में चाय उत्पादन में गिरावट का सिलसिला जारी है। मार्च 2026 में कुल उत्पादन घटकर 66.86 मिलियन किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 67.85 मिलियन किलोग्राम था। इस तरह सालाना आधार पर करीब 1.5% की कमी दर्ज की गई है। मौसम से जुड़ी चुनौतियां इस गिरावट की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।

उत्पादन में कमी का सबसे बड़ा असर उत्तर भारत में देखने को मिला। इस जोन में उत्पादन 5.8% घटकर 49.05 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल 52.08 मिलियन किलोग्राम था। खास तौर पर असम में भारी गिरावट ने कुल उत्पादन को प्रभावित किया है। यहां चाय उत्पादन करीब 39% गिरकर 17.38 मिलियन किलोग्राम रह गया। असम घाटी में उत्पादन 16.77 मिलियन किलोग्राम और कछार क्षेत्र में 0.61 मिलियन किलोग्राम दर्ज किया गया।

हालांकि, वेस्ट बंगाल से राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च में यहां चाय उत्पादन 37% बढ़कर 29.96 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया। डुआर्स, तराई और दार्जिलिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने कुल गिरावट को कुछ हद तक संतुलित किया।

दक्षिण भारत में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। तमिलनाडु और केरला में उत्पादन बढ़ने से दक्षिण भारत का कुल उत्पादन करीब 13% बढ़कर 17.81 मिलियन किलोग्राम हो गया, हालांकि कर्नाटका में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, छोटे चाय उत्पादकों का योगदान बढ़कर 40.79 मिलियन किलोग्राम हो गया है, जबकि बड़े उत्पादकों की हिस्सेदारी घटकर 20.07 मिलियन किलोग्राम रह गई है। यह बदलाव उत्पादन संरचना में धीरे-धीरे हो रहे परिवर्तन का संकेत देता है।

चाय की किस्मों की बात करें तो सीटीसी चाय का दबदबा कायम है, जिसका उत्पादन 60.33 मिलियन किलोग्राम रहा। वहीं ऑर्थोडॉक्स चाय 5.59 मिलियन किलोग्राम और ग्रीन टी 0.94 मिलियन किलोग्राम पर रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में उत्पादन पर और दबाव पड़ सकता है।




WhatsApp का बड़ा फैसला: 8 सितंबर 2026 से पुराने Android फोन पर ऐप बंद

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नई दिल्ली 06/05/2026

व्हाट्सएप ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए अहम बदलाव का ऐलान किया है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि 8 सितंबर 2026 से एंड्रॉयड 6.0 से पुराने वर्जन पर चलने वाले स्मार्टफोन्स में व्हाट्सएप काम करना बंद कर देगा। यानी एंड्रॉयड 5.0 और 5.1 वाले फोन पूरी तरह ऐप सपोर्ट से बाहर हो जाएंगे।

दरअसल, मेटा प्लेटफार्म समय-समय पर पुराने डिवाइस का सपोर्ट खत्म करता रहता है, ताकि नए फीचर्स और मजबूत सिक्योरिटी सिस्टम को बनाए रखा जा सके। पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम में न तो लेटेस्ट अपडेट ठीक से काम करते हैं और न ही जरूरी सिक्योरिटी पैच मिलते हैं, जिससे डेटा चोरी और हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है।

इस फैसले का असर खास तौर पर इंडिया जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक पुराने स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर में लाखों यूजर्स अभी भी पुराने एंडॉयड वर्जन पर निर्भर हैं और उन्हें व्हाट्सएप इस्तेमाल जारी रखने के लिए नया डिवाइस लेना पड़ सकता है।

कंपनी ने अपने आधिकारिक पोर्टल पर भी इस बदलाव की जानकारी अपडेट कर दी है और यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजना शुरू कर दिया है। ऐप ओपन करते ही कई यूजर्स को अलर्ट मैसेज दिख रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि उनका डिवाइस जल्द ही सपोर्टेड नहीं रहेगा।

कुछ पुराने स्मार्टफोन मॉडल जैसे Samsung Galaxy S4, Nexus 4 और LG G2 पहले ही इस सपोर्ट लिस्ट से बाहर हो चुके हैं या जल्द हो जाएंगे।

यूजर्स के लिए क्या हैं विकल्प?
अगर आपका फोन पुराना है, तो दो रास्ते हैं—
अगर डिवाइस में अपडेट का विकल्प मौजूद है, तो उसे एंड्रॉयड 6.0 या उससे ऊपर के वर्जन पर अपग्रेड करें।
अगर अपडेट संभव नहीं है, तो नया स्मार्टफोन लेना ही पड़ेगा।
इसके साथ ही, यूजर्स को सलाह दी गई है कि वे अपने व्हाट्सएप चैट्स का बैकअप जरूर ले लें, ताकि महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित रहे।

कंपनी का कहना है कि यह कदम ऐप को ज्यादा सुरक्षित, तेज और फीचर-रिच बनाने के लिए जरूरी है, जिससे यूजर्स को बेहतर अनुभव मिलता रहे।


पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत पर ट्रंप ने दी मोदी को बधाई, बोले—जनता के भरोसे की बड़ी जीत

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न्यूज आर्टिकल-06/05/2026

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के मजबूत विश्वास का प्रतीक बताया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के हवाले से आई प्रतिक्रिया में ट्रंप ने कहा कि यह जीत निर्णायक और ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार भाजपा ने राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाया है। उन्होंने मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए इसे परिवर्तन और सुशासन के प्रति जनसमर्थन करार दिया।

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि सत्तारूढ़ की तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। 2021 के मुकाबले टीएमसी को भारी नुकसान हुआ, जबकि भाजपा का वोट शेयर बढ़कर करीब 45.8% तक पहुंच गया। ममता बनर्जी को अपनी भवानीपुर सीट पर पूर्व सहयोगी से हार का सामना करना पड़ा, वहीं कई कैबिनेट मंत्रियों को भी पराजय झेलनी पड़ी।

राज्य के उत्तर बंगाल, दक्षिण-पश्चिम इलाकों और कोलकाता के कई हिस्सों में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार के आरोप, संदेशखली और आरजी कर जैसे मुद्दों के साथ-साथ विकास की मांग ने सत्ता विरोधी लहर को मजबूत किया। कांग्रेस को 2 और वाम दलों को 1 सीट मिली। 9 मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही पश्चिम बंगाल में पहली बार दक्षिणपंथी सरकार का गठन होगा।

हालांकि, टीएमसी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए धांधली के आरोप लगाए हैं। ममता बनर्जी ने इसे ‘लूट’ करार दिया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को हार की निराशा बताया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल के ये नतीजे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और आवास निर्माण में पारदर्शिता पर होगा विशेष फोकस

कवर्धा, 05 मई 2026 (पवन तिवारी)

कबीरधाम जिले की सभी 471 ग्राम पंचायतों में 7 मई को ‘चावल महोत्सव’ के साथ रोजगार सह आवास दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर ग्रामीणों को जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन, विभिन्न योजनाओं में पारदर्शिता तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्यों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों का निर्माण अधिकतम 90 दिनों में पूर्ण कराने के लिए ग्रामीणों के साथ कार्ययोजना तैयार की जाएगी। साथ ही, हितग्राहियों को जारी की गई राशि की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से साझा की जाएगी। स्व-सहायता समूह की महिलाओं (दीदियों) को निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जोड़कर उन्हें आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढा जैसे छोटे-छोटे उपायों के माध्यम से वर्षा जल संग्रहण के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।

इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ‘नवा तरिया, आय के जरिया’ अभियान के अंतर्गत नए कार्यों की पहचान और उनसे सृजित होने वाले रोजगार एवं आजीविका के अवसरों पर चर्चा होगी।

उन्होंने आगे बताया कि मनरेगा के तहत अधिक से अधिक नए कार्य प्रारंभ कर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। ‘आजीविका डबरी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से अन्य विभागों से मिलने वाले लाभों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी जाएगी।



पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से मनरेगा एवं आवास योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया भी बताई जाएगी। इन क्यूआर कोड को स्कैन कर पिछले तीन वर्षों का पूरा विवरण आसानी से देखा जा सकेगा।



उल्लेखनीय है कि जिले में प्रत्येक माह की 7 तारीख को ‘चावल महोत्सव’ के साथ रोजगार एवं आवास दिवस का आयोजन किया जाता है। इस दौरान ग्रामीणों को शासन की योजनाओं, उनके लाभ एवं प्रक्रियाओं की जानकारी देकर अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसी कड़ी में 7 मई को यह आयोजन जिले की सभी 471 ग्राम पंचायतों में किया जाएगा।




घोटमर्रा उपकेंद्र में 5 एमवीए ट्रांसफार्मर स्थापित, 11 गांवों को बेहतर बिजली सुविधा

बेमेतरा 05 मई 2026:-

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (दुर्ग क्षेत्र) द्वारा ग्रामीण विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए साजा संभाग के देवरबीजा वितरण केंद्र अंतर्गत 33/11 केवी घोटमर्रा उपकेंद्र की क्षमता बढ़ाने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

पुराने की जगह लगा नया 5 MVA पावर ट्रांसफार्मर

भीषण गर्मी और बिजली मांग वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, उपकेंद्र में लगे पुराने 3.15 MVA ट्रांसफार्मर को हटाकर उसकी जगह 5 MVA क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर उसे सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत (चार्ज) किया गया है। यह कार्य कार्यपालक निदेशक संजय खंडेलवाल के मार्गदर्शन एवं अधीक्षण अभियंता श्री आर.के. मिश्रा के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

क्षमता वृद्धि से घोटमर्रा, हड़गांव, भेड़नी, चोटमर्रा, केछवई, कड़ई, हाड़ाहुली, कातुलबोड, मोतेसरा, रौद्र और डरजरा सहित कुल 11 गांवों के लगभग 2410 घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से बेहतर बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे ग्रामीणों को अब राहत मिलेगी। नए ट्रांसफार्मर के लगने से क्षेत्र में वोल्टेज की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी, जिससे किसानों को सिंचाई कार्यों के लिए पर्याप्त और स्थिर बिजली मिल सकेगी, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्राप्त होगी।

इस कार्य को सफल बनाने में विभागीय अधिकारियों एवं तकनीकी स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस दौरान कार्यपालन अभियंता एस.के. राय एवं एम.के. शुक्ला, सहायक अभियंता सी.एल. वर्मा, जी.पी. बंजारे तथा कनिष्ठ अभियंता अभिषेक राठी सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ने से बढ़ते विद्युत लोड को आसानी से प्रबंधित किया जा सकेगा, जिससे गर्मी के मौसम में बिजली ट्रिपिंग की समस्या में कमी आएगी और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।








ग्राम टेमरी के किसान उठा रहे किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ

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बेमेतरा, 05 मई 2026:-

जिले का ग्राम टेमरी आज कृषि विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। प्रदेश के राज्यपाल श्री रमेन डेका के ‘गोद ग्राम’ के रूप में विशेष पहचान प्राप्त कर चुके इस गांव ने शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए कृषि और किसान कल्याण में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

ग्राम टेमरी में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड योजना का व्यापक अभियान चलाया गया। लक्ष्य 733 किसानों के विरुद्ध सभी 733 किसानों को केसीसी प्रदान कर शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई, जो प्रशासन और ग्रामीणों के बेहतर समन्वय का परिणाम है। इससे किसानों को समय पर ऋण, बीज, खाद एवं अन्य कृषि संसाधन आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे खेती की लागत और निर्भरता में संतुलन आया है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत भी ग्राम टेमरी ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 559 कृषकों के लक्ष्य के विरुद्ध 527 किसानों का पंजीकरण किया गया है, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिल रही है और उनकी आय में स्थिरता आई है। साथ ही, कृषि विभाग के मार्गदर्शन में गांव में पहली बार 4 हेक्टेयर क्षेत्र में रागी की खेती कर नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिससे किसानों के लिए नए अवसर खुले हैं।

ग्राम टेमरी की सफलता यह दर्शाती है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशासन और किसानों के बीच समन्वय तथा नवाचार को अपनाने की सोच ग्रामीण विकास को मजबूत आधार प्रदान करती है। आज टेमरी न केवल बेमेतरा जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है, जो यह साबित करता है कि सामूहिक प्रयास और सही दिशा से गांव आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकते हैं।

इनोवेशन महाकुंभ में छत्तीसगढ़ पर्यटन का जलवा, जगदलपुर में स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

ब्रोशर और डिजिटल माध्यमों से पर्यटकों को दिखी राज्य की विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक


रायपुर/जगदलपुर, 05 मई 2026

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से द्वारा विशेष पहल की जा रही है। इसी कड़ी में में आयोजित (4-5 मई) में पर्यटन मंडल का स्टॉल आगंतुकों और नवाचारियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
स्टॉल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों को कलात्मक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से के विश्व प्रसिद्ध जलप्रपातों, घने वनों, प्राचीन मंदिरों और अद्वितीय जनजातीय संस्कृति की जानकारी दी जा रही है। पर्यटक सूचना केंद्र के अधिकारी आगंतुकों को राज्य के कम प्रसिद्ध लेकिन अत्यंत आकर्षक स्थलों के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दे रहे हैं।
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टॉल पर आकर्षक ब्रोशर, गाइड बुक्स और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न पर्यटन सर्किट, परिवहन व्यवस्था, स्थानीय खान-पान और ठहरने की सुविधाओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करना और उन्हें राज्य की प्राकृतिक वादियों से परिचित कराना है।

“इनोवेशन महाकुंभ 1.0” जहां नवाचार और उद्यमिता का मंच बना हुआ है, वहीं पर्यटन मंडल की सक्रिय भागीदारी ने इसे सांस्कृतिक आयाम भी प्रदान किया है। इस आयोजन के जरिए विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा के साथ-साथ नई साझेदारियों के अवसर भी तलाशे जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की इस पहल से राज्य को एक उभरते वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूती मिल रही है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।