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Friday, October 23, 2026
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मुख्यमंत्री निवास में नवरात्रि का भव्य गरबा उत्सव, सीएम विष्णु देव साय ने नारी सम्मान और महिला सशक्तीकरण को बताया विकास की आधारशिला

मुख्यमंत्री साय ने मां दुर्गा के चरणों में शीश नवाकर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति, बेहतर स्वास्थ्य और जनकल्याण की कामना की। 9

नवरात्रि नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तीकरण का पर्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। भारतीय सनातन परंपरा में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। यह पर्व समाज को महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सशक्तीकरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।

रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आयोजित गरबा महोत्सव में गुजराती समाज के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और बेटियों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति गीतों और पारंपरिक संगीत की धुन पर पूरा मुख्यमंत्री निवास उत्सवमय हो गया।

उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति भक्ति प्रकट करने का माध्यम होने के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है। गुजरात से विकसित हुई गरबा संस्कृति आज देश के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय हो चुकी है। इस तरह के आयोजन विविध सांस्कृतिक परंपराओं के बीच आपसी जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं।

छत्तीसगढ़ के विकास में गुजराती समाज की अहम भागीदारी

मुख्यमंत्री साय ने गुजराती समाज की उद्यमशीलता, मेहनत, सेवा भावना और सामाजिक एकजुटता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुजराती समाज ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। छत्तीसगढ़ में भी इस समाज के लोग व्यापार, उद्योग, शिक्षा, जनसेवा और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशेषता विभिन्न समाजों और संस्कृतियों को सम्मान तथा आत्मीयता के साथ अपनाने में रही है। गुजराती समाज ने भी इस प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि में योगदान दिया है। विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता महत्वपूर्ण है।

त्योहार सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के वाहक

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पर्व और त्योहार समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं। इनके माध्यम से परिवारों और समुदायों के बीच प्रेम, सद्भाव तथा भाईचारे की भावना मजबूत होती है। साथ ही, नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि गरबा आज भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। छत्तीसगढ़ में भी इस पारंपरिक नृत्य के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से महिलाओं और बेटियों की व्यापक भागीदारी इस आयोजन को अधिक उत्साहपूर्ण और विशिष्ट बनाती है।

महतारी वंदन योजना से करीब 68 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल

महिला सशक्तीकरण को राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाना सरकार का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए अनेक स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के तहत करीब 68 लाख महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है। इससे महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और परिवार से जुड़े खर्चों को पूरा करने में सहायता मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि महिलाओं की मेहनत, क्षमता और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को दर्शाती है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्व करने के लिए सक्षम बनाना है।

मां कौशल्या से मां दंतेश्वरी तक, छत्तीसगढ़ में शक्ति उपासना की समृद्ध परंपरा

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या की पावन धरती बताते हुए कहा कि यहां देवी उपासना की परंपरा लंबे समय से जनजीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। बस्तर की मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख देवी स्थल प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट स्वरूप देते हैं।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा, डोंगरगढ़, रतनपुर और चंद्रपुर समेत प्रदेश के प्रमुख देवी धामों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है। इन स्थलों पर उमड़ने वाली आस्था छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपराओं की व्यापकता को दर्शाती है। ये देवी धाम धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के भी महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

गरबा महोत्सव में जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख लोगों की मौजूदगी

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल और तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब शामिल हुए।

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में LoC पर मुठभेड़! 2 आतंकी ढेर, केरन सेक्टर में सर्च ऑपरेशन जारी

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Kupwara Terrorist Encounter: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है. शनिवार तड़के केरन सेक्टर के जुमागुंड इलाके में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए. अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने इलाके में संदिग्ध गतिविधि देखी थी, जिसके बाद कार्रवाई शुरू की गई. मुठभेड़ के बाद भी क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी है.

भारतीय सेना ने शनिवार सुबह करीब 3:30 बजे जुमागुंड इलाके में LoC के नजदीक तैनात जवानों को कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं थीं. सुरक्षाबलों ने संदिग्धों को रुकने की चेतावनी दी. लेकिन, इसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई. जवाबी कार्रवाई में दो आतंकियों के मारे जाने की खबर है.

इलाके में सेना का सर्च ऑपरेशन जारी

आतंकियों के मारे जाने के बाद भी सुरक्षा बल आस पास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चल रहा है. इसके जरिए पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं कोई आतंकी छिपा तो नहीं है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह पुष्टि नहीं हुई है कि संदिग्ध भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे या नहीं.

पुंछ में भी सामने आई थीं आतंकी गतिविधियां

जम्मू-कश्मीर में अक्टूबर के दौरान LoC के आसपास सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं. इससे पहले 12 अक्टूबर को पुंछ जिले में कृष्णा घाटी सेक्टर के पास एक धमाके में चार लोगों की मौत हुई थी. अधिकारियों के मुताबिक, ये लोग भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे.

 मेंढर सेक्टर के बसोनी इलाके में सेना को सीमा पर लगी बाड़ के पास दो जंग लगी बारूदी सुरंगें मिली थीं. ट्रैक बनाने के दौरान उनका पता चला था. इसके बाद सेना के एक्‍सपर्ट ने विस्फोट कर दोनों सुरंगों को नष्ट कर दिया था.

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दो दिवसीय दौरा, रायपुर में स्मारक सिक्का जारी करेंगी, बस्तर दशहरा में भी होंगी शामिल

 छत्तीसगढ़ में 22 और 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का प्रवास प्रस्तावित है। इस दौरान वे रायपुर और जगदलपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति के दौरे का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। रायपुर में वे पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी करेंगी, जबकि जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन के बाद बस्तर दशहरा के प्रमुख आयोजन में शामिल होंगी।

22 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होंगे कार्यक्रम

राष्ट्रपति 22 अक्टूबर को दोपहर 12:45 बजे रायपुर स्थित लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचेंगी। यहां पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा।इसी दिन शाम 4 बजे वे रायपुर के इंडोर स्टेडियम में नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित समारोह में हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी। आयोजन के तहत सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम भी होंगे।

23 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी मंदिर में करेंगी पूजा

राष्ट्रपति 23 अक्टूबर को सुबह 11 बजे जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद दोपहर 12:45 बजे वे मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी।बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव विकासशील ने हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल, आवास, स्वास्थ्य सुविधाओं और परिवहन से जुड़े इंतजामों की समीक्षा की गई।मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। कार्यक्रम के समन्वय के लिए संस्कृति विभाग को नोडल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

केंद्रीय राज्यमंत्री और संस्कृति मंत्री ने दिया था आमंत्रण

करीब 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा देश के विशिष्ट आदिवासी सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। इसकी परंपराएं और आयोजन की विशिष्ट शैली इसे अन्य दशहरा उत्सवों से अलग पहचान देती हैं।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को इस पर्व में शामिल होने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मुलाकात कर आमंत्रित किया था। राष्ट्रपति का प्रस्तावित प्रवास बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Barwani Murder Case: कर्ज के विवाद और छेड़छाड़ के आरोप में मजदूर की निर्मम हत्या, दो दोषियों को उम्रकैद की सजा

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 मध्य प्रदेश :  बड़वानी जिले में करम सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जांच में सामने आया कि मृतक का सिर पत्थर से कुचलने के साथ उसकी आंखें निकाल दी गई थीं और गुप्तांग भी काट दिया गया था। वारदात के बाद शव को पुलिया के नीचे बने पाइप में छिपा दिया गया था।

2 जनवरी को दर्ज हुई थी गुमशुदगी की शिकायत

मामला 2 जनवरी 2026 का है। सेनानाई गांव निवासी करम सिंह मजदूरी के सिलसिले में दनोद गांव गया था, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी घर नहीं लौटा। उसका मोबाइल फोन भी बंद मिल रहा था। इसके बाद सुभाष नामक व्यक्ति ने पलसूद थाने में शिकायत दर्ज कराई।

तलाश के दौरान पता चला कि करम सिंह का शव छिंदघाटी में एक पुलिया के नीचे पाइप में छिपाया गया है। इसके बाद पुलिस ने हत्या के मामले की जांच शुरू की।

कॉल डिटेल से खुला हत्या का राज

पुलिस ने मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली तो उका उर्फ सीताराम और भाया उर्फ भयराम के साथ उसकी लगातार बातचीत होने की जानकारी मिली। जांच में सामने आया कि करम सिंह ने आरोपियों से 15 हजार रुपये उधार लिए थे।

पुलिस जांच के मुताबिक, कर्ज की रकम वापस मांगने आरोपियों में से एक की पत्नी करम सिंह के पास पहुंची थी। इसी दौरान महिला ने उसके द्वारा छेड़छाड़ किए जाने की बात अपने पति को बताई। इसके बाद आरोपियों ने करम सिंह की हत्या की साजिश रची।

नहर किनारे ले जाकर दिया वारदात को अंजाम

जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी करम सिंह को नहर के किनारे ले गए और उसे बंधक बना लिया। इसके बाद चाकू से उसकी आंखें निकाल दी गईं और गुप्तांग काट दिया गया। आरोपियों ने पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी। वारदात के बाद शव को छिंदघाटी की पुलिया के नीचे पाइप में छिपा दिया गया।

विशेष अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

इस मामले में एट्रोसिटी एक्ट के तहत विशेष न्यायाधीश एलडी सोलंकी की अदालत ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को फैसला सुनाया। अदालत ने उका उर्फ सीताराम और भाया उर्फ भयराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू हो सकती है धान खरीदी, 31 जनवरी 2027 तक चलेगी प्रक्रिया, सरकार ने बनाया 160 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने की संभावना है, जो 31 जनवरी 2027 तक जारी रह सकती है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल ने विभागीय अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को पंजीयन कराने, टोकन प्राप्त करने और धान बेचने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मंत्री ने खरीदी केंद्रों पर बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, बिजली और पेयजल सहित सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा कस्टम मिलिंग में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए धान के उठाव और मिलिंग की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। राशन दुकानों में खाद्यान्न का अग्रिम भंडारण और नियमित वितरण सुनिश्चित करने के लिए भी अधिकारियों को निगरानी रखने को कहा गया है।

160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य

राज्य सरकार ने इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। खरीदी व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से प्रतिदिन खरीदे जाने वाले कुल धान का 70 प्रतिशत हिस्सा उनके लिए निर्धारित रखने की व्यवस्था बताई गई है। वहीं, शेष 30 प्रतिशत धान बड़े किसानों से खरीदे जाने की बात कही गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की कोशिश है कि खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था सुचारु रहे और किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

सामान्य और ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य

वर्ष 2026 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी सामान्य धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है। किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टोकन प्राप्त करने के बाद ही खरीदी केंद्र पर धान बेचने का अवसर मिलेगा।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित तारीख से लगभग सात दिन पहले टोकन के लिए आवेदन करना होगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन की समयसीमा और जरूरी दस्तावेजों के संबंध में अपने संबंधित सहकारी समिति कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर लें।

छोटे किसानों को दो और बड़े किसानों को तीन टोकन का प्रावधान

धान खरीदी के लिए छोटे किसानों को अधिकतम दो टोकन और बड़े किसानों को तीन टोकन दिए जाने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। टोकन प्रणाली के माध्यम से खरीदी केंद्रों पर भीड़ नियंत्रित करने और धान की खरीद को व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाता है।

हालांकि, टोकन की संख्या, आवेदन की समयसीमा और पात्रता से संबंधित नियमों की पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों से करना जरूरी है, ताकि किसानों को खरीदी के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

प्रदेश में 2,739 खरीदी केंद्र, जरूरत के अनुसार बढ़ेगी संख्या

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 2,739 धान खरीदी केंद्र संचालित होने की जानकारी दी गई है। यदि खरीदी के दौरान मौजूदा केंद्रों की संख्या अपर्याप्त रहती है, तो आवश्यकता के अनुसार नए केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।

सरकार ने खरीदी केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ धान का समय पर उठाव और कस्टम मिलिंग में तेजी लाने पर जोर दिया है। इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खरीदी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने और किसानों को सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर फुटपाथों से अतिक्रमण नहीं हटा तो धरने पर बैठ सकते हैं जज, 25 नवंबर तक समाधान का अल्टीमेटम

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 नई दिल्ली। देश के कई शहरों में फुटपाथों पर अतिक्रमण और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्तों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। इसका असर आम लोगों की आवाजाही से लेकर सड़क सुरक्षा तक पर पड़ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के आसपास फुटपाथों की बदहाल स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पैदल चलने वालों की सुरक्षा के मामले में प्रशासन की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि 25 नवंबर 2026 तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो जज दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर धरने पर बैठने जैसा कदम उठा सकते हैं।

बैठकों और समितियों से नहीं चलेगा काम

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने फुटपाथों की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल बैठकें आयोजित करने और समितियां गठित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासन को मौके पर ठोस सुधार करके दिखाना होगा।अदालत ने संकेत दिया कि यदि निर्धारित समय तक जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को भी तलब किया जा सकता है। इस टिप्पणी के जरिए कोर्ट ने साफ कर दिया कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से अधिकारी बच नहीं सकते।

पैदल चलने वालों की सुरक्षा भी मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय

सुनवाई के दौरान अदालत ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(d) से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना। फुटपाथों पर कब्जे, अवैध पार्किंग और सड़क पार करने के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मुख्य सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।अदालत का जोर इस बात पर रहा कि सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। शहरों में सड़क निर्माण के साथ पैदल चलने वालों की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही के दौरान जोखिम का सामना न करना पड़े।

देशभर में अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ बनाने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फुटपाथों की उपलब्धता और उनकी उपयोगिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया है। अदालत की चिंता केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी है।फुटपाथों पर रेहड़ी-पटरी, अवैध पार्किंग, कचरे और दूसरी बाधाओं के कारण पैदल चलने वालों को होने वाली परेशानी दूर करने की आवश्यकता जताई गई है। साथ ही, सड़क विकास योजनाओं में फुटपाथों को भी अनिवार्य महत्व देने पर जोर दिया गया है।

पांच शहरों में पायलट योजना शुरू करने के निर्देश

अदालत ने केंद्र सरकार से फुटपाथों की निगरानी के लिए केंद्रीय स्तर पर व्यवस्था विकसित करने को कहा है। इसके शुरुआती चरण में पांच शहरों में फुटपाथ निर्माण से संबंधित पायलट योजना शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य पैदल यात्रियों के लिए बेहतर और सुरक्षित बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में ठोस पहल करना है।

फुटपाथ निर्माण में दिव्यांगों की सुविधाओं का भी ध्यान

सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथों के निर्माण में इंडियन रोड्स कांग्रेस के दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया है। इसके तहत फिसलन से बचाने वाली सतह, व्हीलचेयर के अनुकूल रैंप और बिना बाधा के आवागमन योग्य रास्ते जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।इन मानकों का उद्देश्य बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य पैदल यात्रियों के लिए सार्वजनिक रास्तों को अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाना है। अदालत के सख्त रुख से स्पष्ट है कि फुटपाथों को केवल सड़क के किनारे बनी जगह के रूप में नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित करना होगा।

CGPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से झटका, स्वास्थ्य के आधार पर भी नहीं मिली जमानत

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा 2020-2021 में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर जमानत की मांग करने वाले सोनवानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। साथ ही, गंभीर बीमारी और जेल में समुचित इलाज उपलब्ध नहीं होने के पर्याप्त प्रमाण के बिना धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत राहत नहीं दी जा सकती।

जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं सोनवानी

CGPSC परीक्षा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले 20 अगस्त 2026 को रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन यहां भी उनकी याचिका स्वीकार नहीं की गई।

हृदय संबंधी परेशानी और पेसमेकर का दिया हवाला

सोनवानी की ओर से अदालत में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जमानत का आधार बनाया गया। उनके वकील ने बताया कि हृदय संबंधी परेशानी के कारण 20 अगस्त 2026 को उन्हें अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था। इसके बाद स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह भी दी गई थी।

बचाव पक्ष ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति का उल्लेख करते हुए जमानत देने की मांग की। हालांकि, अदालत को इन आधारों पर राहत देने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले कि आरोपी किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं या जेल में उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

ईडी ने बेहतर इलाज की उपलब्धता का दिया भरोसा

सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि आवश्यकता पड़ने पर सोनवानी को रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में भर्ती कराकर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। इस दलील के साथ एजेंसी ने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देने का विरोध किया।बचाव पक्ष की ओर से सह-आरोपियों को जमानत मिलने का तर्क भी रखा गया, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे सोनवानी को राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।

चार्जशीट में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप

ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, CGPSC परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं की गई थीं। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद पहुंचाने के लिए आर्थिक लेन-देन हुआ था।

चार्जशीट में करीब 3.45 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया गया है। इसमें 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये लेने और इस रकम को विभिन्न माध्यमों से अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के आरोप भी शामिल हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपों की जांच जारी

ईडी की जांच का मुख्य केंद्र भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार से प्राप्त धन और उसके लेन-देन से जुड़ा है। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में पूर्व अध्यक्ष की भूमिका को लेकर आरोप दर्ज किए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। फिलहाल, हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के कारण टामन सिंह सोनवानी की न्यायिक हिरासत जारी है।

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फेसबुक पर दोस्ती, मंदिर में शादी और सात फेरों पर विवाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवाह रद्द कराने की याचिका खारिज

 बिलासपुर। फेसबुक के जरिए शुरू हुए प्रेम संबंध और मंदिर में हुई शादी के बाद सात फेरों की रस्म को लेकर उठा विवाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया। युवक ने दावा किया था कि विवाह के दौरान हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सप्तपदी की रस्म पूरी नहीं हुई, इसलिए शादी को शून्य घोषित किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया, लेकिन साथ ही युवक की मूल याचिका भी खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत विवाह को शून्य घोषित करने के आधार सीमित हैं। केवल विवाह की रस्मों को लेकर विवाद के आधार पर इस धारा के तहत राहत नहीं मांगी जा सकती।

फेसबुक पर हुई दोस्ती, फिर शादी तक पहुंचा रिश्ता

मामला जांजगीर-चांपा जिले के रहौद में रहने वाले एक युवक और युवती से जुड़ा है। दोनों की पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई थी। धीरे-धीरे उनके बीच प्रेम संबंध बने और शादी की चर्चा शुरू हो गई।

युवक के अनुसार, युवती के परिजनों से मुलाकात के दौरान उसने पहले अपने परिवार की सहमति लेने की बात कही थी। हालांकि, उसका आरोप था कि 3 फरवरी 2022 को उसे युवती के घर बुलाया गया, जहां शादी करने के लिए दबाव बनाया गया। युवक ने दावा किया कि उसे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर विवाह से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद चिरमिरी स्थित शिव मंदिर में जल्दबाजी में शादी कराई गई।

सात फेरे नहीं होने का दिया हवाला

युवक ने अदालत में तर्क दिया कि विवाह के दौरान अग्नि के सामने सात कदम लेने की रस्म यानी सप्तपदी पूरी नहीं हुई थी। इसी आधार पर उसने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत फैमिली कोर्ट में विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की।

दूसरी ओर, युवती ने युवक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई थी। उसका यह भी कहना था कि विवाह के बाद युवक ने उसे पत्नी के रूप में स्वीकार किया और दोनों करीब डेढ़ महीने तक साथ रहे। युवती ने आरोप लगाया कि युवक भरण-पोषण से संबंधित कार्यवाही से बचने के लिए विवाह को अमान्य घोषित कराने का प्रयास कर रहा था।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले में बताई कानूनी चूक

मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने की। हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने याचिका की कानूनी स्वीकार्यता पर विचार करने के बजाय विवाह की रस्मों और उसकी वैधता के सवाल पर निर्णय दे दिया था।

अदालत के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत यह जांचना जरूरी था कि विवाह में धारा 5 की उन शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, जिनके आधार पर किसी विवाह को शून्य घोषित किया जा सकता है। इस कानूनी पहलू पर उचित विचार नहीं किए जाने के कारण फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार नहीं रखा जा सकता था।

फैसला निरस्त, लेकिन युवक को नहीं मिली राहत

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं था कि युवक की विवाह को शून्य घोषित करने की मांग स्वीकार कर ली गई। खंडपीठ ने उसकी मूल याचिका को भी खारिज कर दिया, क्योंकि अदालत के मुताबिक हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रस्तुत याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी।

इस तरह हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह को शून्य घोषित करने के लिए कानून में निर्धारित आधारों और शर्तों पर विचार करना आवश्यक है। केवल विवाह की रस्मों को लेकर विवाद उठाने से धारा 11 के तहत विवाह को अमान्य घोषित कराने का अधिकार नहीं मिल जाता।

बड़ी खबर: रायपुर से रावघाट और कुरुद के लिए तीन नई मेमू ट्रेनों को मंजूरी, जानिए ट्रेन नंबर और परिचालन की स्थिति

छत्तीसगढ़ :  रेल संपर्क बढ़ाने की दिशा में तीन नई मेमू ट्रेन सेवाओं को स्वीकृति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित सेवाओं में रायपुर से रावघाट के लिए एक और रायपुर से कुरुद के लिए दो ट्रेनें शामिल हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल को पत्र भेजकर इन सेवाओं की मंजूरी की जानकारी दी है। हालांकि, तीनों ट्रेनों के नियमित परिचालन की शुरुआत और समय-सारणी को लेकर अभी आधिकारिक विवरण का इंतजार है।

तीनों नई मेमू ट्रेनों के नंबर और प्रस्तावित मार्ग

रेल मंत्री की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार, स्वीकृत सेवाओं का विवरण इस प्रकार है।

ट्रेन नंबरप्रस्तावित मार्ग
68768 / 68769रायपुर–रावघाट मेमू
68772 / 68771रायपुर–कुरुद मेमू
68774 / 68773रायपुर–कुरुद मेमू

यह विवरण 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित स्वीकृति संबंधी खबर पर आधारित है। यात्रियों को ट्रेन नंबर और परिचालन की पुष्टि के लिए रेलवे की आधिकारिक सूचना देखनी चाहिए।

रेल मंत्री ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल को दी जानकारी

रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर और आसपास के इलाकों में रेल यात्री सुविधाओं का विस्तार करने का आग्रह किया था। इसी संदर्भ में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्र के माध्यम से तीन मेमू सेवाओं की स्वीकृति की जानकारी दी।सांसद ने इस निर्णय पर प्रसन्नता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, इन सेवाओं से क्षेत्र के नागरिकों को सुलभ और किफायती परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने के प्रयासों को बल मिलेगा।

रायपुर–रावघाट रेल संपर्क को विस्तार मिलने की उम्मीद

रायपुर से रावघाट के लिए प्रस्तावित मेमू सेवा से इस क्षेत्र के यात्रियों को रेल परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। इससे स्थानीय नागरिकों को शिक्षा, रोजगार, कारोबार और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रा करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।इस मार्ग पर रेल सेवा शुरू होने से सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने का विकल्प भी मिल सकता है। हालांकि, यात्रियों को वास्तविक लाभ ट्रेन के ठहराव, समय-सारणी और नियमित परिचालन पर निर्भर करेगा।

रायपुर–कुरुद के बीच दो सेवाओं से बढ़ेंगे विकल्प

रायपुर और कुरुद के बीच दो मेमू सेवाओं को मंजूरी दिए जाने से इस मार्ग पर यात्री परिवहन के विकल्प बढ़ने की संभावना है। राजधानी में नौकरी, पढ़ाई, व्यापार या इलाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को इससे लाभ मिल सकता है।कुरुद और आसपास के क्षेत्रों से रायपुर की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, सुविधा का वास्तविक स्तर परिचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्या होती है मेमू ट्रेन और क्यों है उपयोगी?

MEMU का पूरा नाम Mainline Electric Multiple Unit है। यह बिजली से चलने वाली यात्री ट्रेन की एक श्रेणी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर छोटी और मध्यम दूरी के मार्गों पर किया जाता है।इस तकनीक में ट्रेन के अलग-अलग हिस्सों में मोटरयुक्त कोच होते हैं। इससे बार-बार रुकने वाले मार्गों पर यात्री सेवाओं का संचालन किया जा सकता है। ऐसे मार्गों पर नियमित यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों के लिए मेमू सेवाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।

तीनों ट्रेनें कब से चलेंगी?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में तीनों सेवाओं के नियमित परिचालन की निश्चित तारीख और विस्तृत समय-सारणी स्पष्ट नहीं है। रावघाट सेवा के लिए पहले प्रस्तावित 12 अक्टूबर के उद्घाटन के टलने की खबर भी सामने आई थी।इसलिए मंजूरी मिलने को ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाना नहीं माना जाना चाहिए। यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही ट्रेन के समय, ठहराव, किराये और यात्रा की उपलब्धता की पुष्टि करनी होगी।

रेल सुविधाओं के विस्तार से यात्रियों को उम्मीद

रायपुर से रावघाट और कुरुद के लिए प्रस्तावित नई मेमू सेवाएं क्षेत्रीय रेल संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में अहम पहल हो सकती हैं। इनसे यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसका लाभ नियमित परिचालन शुरू होने के बाद ही मिलेगा।फिलहाल यात्रियों की नजर रेलवे की अगली घोषणा पर है, जिसमें तीनों ट्रेनों की शुरुआत और समय-सारणी से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

कांग्रेस के ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के लिए 208 पर्यवेक्षक नियुक्त, छत्तीसगढ़ के 8 नेताओं को मिली जिम्मेदारी

 रायपुर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों के बीच पार्टी ने अपने प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अभियान के संचालन और निगरानी के लिए 208 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इस सूची में छत्तीसगढ़ के आठ नेताओं को भी शामिल किया गया है।राज्य से फूलो देवी नेताम, मोहन मरकाम, राजेश तिवारी, विकास उपाध्याय, अमरजीत भगत, शिव डहरिया, जय सिंह अग्रवाल और प्रेमसाय सिंह टेकाम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी इन नेताओं के माध्यम से विभिन्न जिलों में अभियान से जुड़ी गतिविधियों के संचालन और निगरानी की व्यवस्था करेगी।

AICC ने 208 पर्यवेक्षकों की सूची जारी की

कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को देशभर में संचालित करने के लिए 208 पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है। इन सभी को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी जाएगी। वे अपने निर्धारित क्षेत्रों में अभियान से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ संगठनात्मक कार्यक्रमों के संचालन में सहयोग करेंगे।नियुक्ति संबंधी पत्र कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी किया गया है। पत्र में बताया गया है कि पार्टी अध्यक्ष ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं।

छत्तीसगढ़ के इन आठ नेताओं को मिली जिम्मेदारी

अभियान के लिए छत्तीसगढ़ से जिन नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • फूलो देवी नेताम
  • मोहन मरकाम
  • राजेश तिवारी
  • विकास उपाध्याय
  • अमरजीत भगत
  • शिव डहरिया
  • जय सिंह अग्रवाल
  • प्रेमसाय सिंह टेकाम

इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी राज्य में अभियान की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और जिला स्तर पर संगठन के साथ समन्वय स्थापित करने की तैयारी में है।

राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ नेता भी सूची में शामिल

AICC की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नाम भी शामिल हैं। इनमें अधीर रंजन चौधरी, अविनाश पांडे, बालासाहेब थोराट, एन. रघुवीर रेड्डी, जगदीश ठाकोर, कमलेश्वर पटेल, नबाम तुकी, राजीव शुक्ला, अखिलेश प्रसाद सिंह, पृथ्वीराज चव्हाण, रघु शर्मा, अजय कुमार लल्लू, नाना पटोले, अजय कुमार और अशोक तंवर प्रमुख हैं।इनके अतिरिक्त पार्टी के कई पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और संगठन के सक्रिय पदाधिकारियों को भी अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। पर्यवेक्षक अपने निर्धारित क्षेत्रों में गतिविधियों की निगरानी करेंगे और अभियान के संचालन में संगठन को सहयोग देंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का आंदोलन

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी इन मुद्दों को उठाते हुए मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रही है।

जिलों तक अभियान पहुंचाने की तैयारी

208 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के साथ कांग्रेस ने अभियान के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। पार्टी की योजना विभिन्न जिलों में गतिविधियों के संचालन और निगरानी के जरिए अभियान को आगे बढ़ाने की है।चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े आरोप कांग्रेस के राजनीतिक विरोध का प्रमुख आधार हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों, साक्ष्यों और आधिकारिक पक्षों का आकलन आवश्यक होगा।