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कारगिल विजय दिवस पर अमर शहीदों को दी श्रद्धांजलि, विद्यार्थियों ने लिया राष्ट्रसेवा का संकल्प

बेमेतरा 27 जुलाई 2026 :-

साजा कुमारी देवी चौबे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में कारगिल विजय दिवस श्रद्धा, सम्मान एवं देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कारगिल युद्ध के अमर शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि के साथ किया गया। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के वीर सपूतों के अद्वितीय साहस, शौर्य एवं सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया।

महाविद्यालय में इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए भाषण, पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कारगिल के वीर सैनिकों के शौर्य, राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण को अपने विचारों और कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रसेवा की शपथ दिलाई गई। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने तथा समाज व राष्ट्रहित में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गोविंद प्रसाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक अवसर नहीं, बल्कि भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने का दिवस है।

कारगिल के जवानों ने अपने पराक्रम और अनुशासन से सिद्ध किया कि राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। उनका जीवन प्रत्येक युवा के लिए देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा है। उन्होंने विद्यार्थियों से सैनिकों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में डॉ. ओम कुमार नेताम, डॉ. ज्योति बाला, डॉ. सुप्रिया ठाकुर एवं डॉ. सृष्टि सिंह परिहार विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अमर शहीदों के त्याग को सदैव स्मरण रखना चाहिए और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

नशामुक्त भारत-नशामुक्त छत्तीसगढ़ : नशामुक्ति संदेश देने, जशपुर में जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं

जशपुर 27 जुलाई 2026

जिला स्तर पर विजेता प्रतिभागी अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जशपुर का प्रतिनिधित्व करेंगे।

युवा देश के भविष्य हैं विशेषकर छात्र जीवन अगर भविष्य की दिशा अंतहीन अंधेरे में दिखाई देने लगे तो परिवार समाज और देश की बुनियाद हिल जाएगी।युवाओं को इस दिशा में बढ़नें से रोकने के लिए समाज और सरकार को आगे आना होगा।

जशपुर के शासकीय रामभजन राय (एन.ई.एस.) स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को ‘नशा मुक्त युवा–विकसित भारत’ विषय पर जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मेरा युवा भारत (मेरा युवा भारत), जशपुर की ओर से किया गया। इसमें जिले के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और नशामुक्ति का संदेश दिया।

विद्यार्थियों ने दिखाई अपनी प्रतिभा

प्रतियोगिता में एम.एल.बी. कन्या विद्यालय और संकल्प स्कूल, जशपुर सहित कई शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में नृत्य, संगीत, वाद-विवाद, कविता पाठ, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला, स्लोगन लेखन, रील निर्माण और शॉर्ट फिल्म जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

युवाओं को दिलाई नशामुक्ति की शपथ

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पतनवार और विशिष्ट अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमरेन्द्र मौजूद रहे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने विद्यार्थियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। साथ ही सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने और साइबर अपराधों से बचने के प्रति भी जागरूक रहने की सलाह दी।

सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश

मेरा युवा भारत के युवा अधिकारी संकेत मित्तल भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान युवाओं से अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा नशामुक्त भारत के निर्माण में सहयोग करने की अपील की गई।
प्राचार्य डॉ. अमरेन्द्र ने अपने संबोधन में कहा कि युवा केवल नशे से ही नहीं, बल्कि हर तरह की बुरी आदतों और नकारात्मक सोच से दूर रहें। उन्होंने अनुशासित और संस्कारयुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया।

विशेषज्ञों ने किया निष्पक्ष मूल्यांकन

प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ निर्णायकों को आमंत्रित किया गया था। उन्होंने सभी प्रतियोगिताओं का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मूल्यांकन किया।


विद्यार्थियों ने किया श्रमदान,नो बैग डे पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में लगाए पौधे

सूरजपुर – 27 जुलाई 2026

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पोषण के महत्व को समझाना भी था।इस दौरान विद्यार्थियों ने श्रमदान कर पोषण वाटिका की साफ-सफाई की और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मनाए गए नो बैग डे पर सूरजपुर जिले के बस्ता-मुक्त विद्यालय शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला रुनियाडीह में पर्यावरण संरक्षण और पोषण को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विद्यार्थियों ने पोषण वाटिका की संभाली जिम्मेदारी

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में यूथ एवं इको क्लब के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने पोषण वाटिका से खरपतवार हटाए और पौधों की देखभाल की। संस्था प्रमुख सीमांचल त्रिपाठी ने बताया कि क्लब प्रभारी श्रीमती एम. टोप्पो और क्लब अध्यक्ष वर्षा राजवाड़े के नेतृत्व में बच्चों ने उत्साह के साथ श्रमदान किया।

फलदार पौधे और सब्जियों के बीज लगाए गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शासकीय उद्यान दतिमा से पौधे लाकर विद्यालय परिसर में नीम, पीपल, आम, पपीता, मुनगा और केला जैसे फलदार व छायादार पौधे लगाए गए। इसके साथ ही पोषण वाटिका में बरबटी, लौकी और करेला के बीज भी बोए गए।

बच्चों के पोषण में मदद कर रही है पोषण वाटिका

संस्था प्रमुख ने बताया कि विद्यालय परिसर में पहले से आम, जामुन, कटहल, अमरूद, पपीता, केला और अनानास के पेड़ हैं। इनसे मिलने वाले फल विद्यार्थियों के पोषण में उपयोग किए जाते हैं।

शिक्षकों और बाल कैबिनेट की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में शिक्षक रिजवान अंसारी, श्रीमती सुमित्रा राजवाड़े, नान दईया तथा बाल कैबिनेट के सदस्यों ने सक्रिय सहयोग दिया। सभी ने मिलकर विद्यालय परिसर को हराभरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का संकल्प लिया।

अमरकंटक से भोरमदेव कांवड़ यात्रा की तैयारी तेज, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त

कवर्धा/रायपुर- 27 जुलाई 2026

अमरकंटक से भोरमदेव कांवड़ यात्री श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर व्यापक इंतजाम किए हैं।

श्रावण मास में अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक निकलने वाली कांवड़ यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। हर साल हजारों शिवभक्त करीब 120 किलोमीटर पैदल चलकर अमरकंटक से पवित्र जल लाते हैं और भोरमदेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

हैंडपंपों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था मजबूत

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कांवड़ मार्ग में लगे सभी हैंडपंपों का क्लोरीनेशन कराया है। जो हैंडपंप खराब या बंद थे, उन्हें भी तत्काल सुधारकर चालू कर दिया गया है। इससे यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

भोरमदेव मंदिर परिसर में भी निगरानी

भोरमदेव मंदिर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया है। अधिकारियों को पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान

प्रशासन ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। यात्रा अवधि में सभी विभाग समन्वय के साथ काम करेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा मिल सके।

श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता : विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि श्रावण माह में भोरमदेव आने वाले प्रत्येक शिवभक्त की सुविधा और सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

मन की बात: कोरबा के जल संरक्षण मॉडल की सराहना, छत्तीसगढ़ का बार-बार उल्लेख गौरव की बात-मुख्यमंत्री साय

रायपुर- 26 जुलाई 2026

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की तथा आगामी स्वतंत्रता दिवस के लिए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक शामिल होने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और राज्य सरकार उन्हें शिक्षा, कौशल विकास तथा नवाचार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवाओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी सुनी।

कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों और नवाचारों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किया जाना प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा जिले में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

उन्होंने बताया कि कोरबा में भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण किया जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास हो रहा है।

साय ने कहा कि इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने मल्हार की पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों का उल्लेख कर राज्य की सांस्कृतिक और जनजातीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और वृक्षारोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय भागीदारी की भी अपील की।

पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं के उपयोग और विज्ञान, खेल व अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की भी सराहना की।


वर्ल्ड रिकॉर्ड- जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्ण जीतने वाले दिव्यांशु देवांगन का वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया सम्मान

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रायपुर -26 जुलाई

वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने निशानेबाज दिव्यांशु को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा उन्हें रामचरितमानस की प्रति भेंट करते हुए निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं।

छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज दिव्यांशु देवांगन को जूनियर वर्ल्ड कप की 10 मीटर एयर राइफल (मिक्स्ड डबल) स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने पर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने उनके निवास पहुंचकर सम्मानित किया।

उन्होंने इस उपलब्धि को पूरे देश और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताते हुए दिव्यांशु के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस दौरान उन्होंने दिव्यांशु से आत्मीय संवाद भी किया।

ओपी चौधरी ने कहा कि दिव्यांशु ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और कठिन परिश्रम के दम पर विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़, विशेषकर रायगढ़ जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने विश्वास जताया कि दिव्यांशु भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश के लिए कई और गौरवपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।

सम्मान से अभिभूत दिव्यांशु देवांगन ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने तथा देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत का तिरंगा बुलंद करना है।

ज़िंदगी की चुनौतियाँ, आपके फ़ैसले और कभी न हार मानने का जज़्बा

लाइफ-स्टाइल-डेस्क/26 जुलाई 2026

जब आप समस्याओं को रुकावट के बजाय सीखने का अवसर मानने लगते हैं, तो आपकी सोच बदलने लगती है। यही बदलाव आपको साधारण से असाधारण बनाता है।

परिचय: चुनौतियों से परे एक मकसद भरा जीवन

हम सब जीवन के किसी न किसी मोड़ पर रुकावटों, असफलताओं और अनिश्चितता का सामना करते हैं। लेकिन जीवन की असली सुंदरता इसमें नहीं है कि आपके रास्ते में कितनी बाधाएँ आती हैं, बल्कि इसमें है कि आप उनका सामना किस दृष्टिकोण से करते हैं।
आप ज़िंदगी की चुनौतियों का सिर्फ़ सामना ही नहीं करते—बल्कि आत्मविश्वास, मकसद और उस आज़ादी के साथ उनसे ऊपर उठते हैं, जिससे आप वो सब कुछ बन सकते हैं जो बनने की आपमें क्षमता और काबिलियत है।

कोई भी फ़ैसला गलत नहीं होता: अपने रास्ते पर भरोसा रखें

ज़िंदगी तब बेहतर और शांत हो जाती है जब आपको यह गहरा अहसास होता है कि आप कभी कोई गलत फ़ैसला नहीं लेते।

अक्सर हम अपने अतीत के फ़ैसलों पर पछताते हैं और सोचते हैं कि “काश मैंने दूसरा रास्ता चुना होता।” लेकिन हकीकत यह है कि हर फ़ैसला आपको एक नया अनुभव, एक नया सबक और एक नई समझ देता है।

अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक है: जो फ़ैसले आपको आपकी इच्छानुसार परिणाम नहीं देते, वे आपको सबसे महत्वपूर्ण सीख देकर जाते हैं।

सही समय और सही जगह: आपके चुने हुए रास्ते आपको ठीक उसी जगह ले जाते हैं जहाँ आपको पहुँचना चाहिए। हर मोड़ आपको आपकी मंजिल के लिए तैयार कर रहा होता है।

आत्म-संदेह से मुक्ति: अपने अतीत के फ़ैसलों को स्वीकार करें। खुद पर और अपने जीवन के प्रवाह पर भरोसा रखें।

सुंदर अंत और नई शुरुआत: ढलते सूरज का संदेश

प्रकृति हमें जीवन के सबसे महान पाठ सिखाती है। जब शाम को सूरज ढलता है, तो आसमान खामोशी से विदाई लेते हुए अपने खूबसूरत रंग बिखेरता है। यह दृश्य हमें एक गहरा संदेश देता है कि अंत भी शुरुआत की तरह ही खूबसूरत हो सकते हैं।

बदलाव को स्वीकार करें: जीवन में हर अंत (चाहे वह किसी रिश्ते का हो, नौकरी का हो या किसी पुराने अध्याय का) एक नई शुरुआत का अवसर लेकर आता है।

अतीत को छोड़ना सीखें: जिस तरह ढलता हुआ सूरज अगली सुबह एक नए उजाले का वादा करता है, उसी तरह जीवन के कठिन अंत भी आपके लिए नए रास्ते खोलते हैं।

खामोशी में सुंदरता: शांति और गरिमा के साथ पुरानी बातों को अलविदा कहें और आने वाले कल का स्वागत करें।

असली बदलाव: पैसे से परे, इंसान बनने की यात्रा

समाज अक्सर सफलता को बैंक अकाउंट के बैलेंस या भौतिक वस्तुओं से नापता है। लेकिन ज़िंदगी में सबसे बड़ा बदलाव ज़्यादा पैसे कमाना नहीं है—बल्कि ऐसा इंसान बनना है जो कभी हार नहीं मानता।

मानसिकता और चरित्र का निर्माण
दृढ़ संकल्प (Resilience): कठिन से कठिन समय में भी अपने लक्ष्य पर टिके रहने की क्षमता।
आत्म-जागरूकता (Self-awareness): अपनी कमजोरियों को पहचानना और उन पर काम करना।

सहानुभूति और चरित्र (Empathy & Character): दूसरों की मदद करना और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी निष्ठा बनाए रखना।
पैसा आता-जाता रह सकता है, लेकिन जो चरित्र और मानसिकता आप बनाते हैं, वह आपसे कभी कोई नहीं छीन सकता।

निरंतरता की ताकत: हर छोटा कदम मायने रखता है

बड़ी सफलताएँ एक रात में हासिल नहीं होतीं। यह आपके रोज़ के छोटे-छोटे प्रयासों का नतीजा होती हैं।
“हर छोटा कदम, हर मुश्किल दिन, हर सबक… एक ऐसा भविष्य बना रहा है जो बहाने बनाने से कभी नहीं बन सकता।”

बहानों का त्याग करें: बहाने बनाना आसान होता है, लेकिन वे आपको वहीं रोक कर रखते हैं जहाँ आप हैं। जब आप बहानों की जगह जिम्मेदारी लेते हैं, तो आपकी प्रगति शुरू होती है।

कठिन दिनों का मूल्य: जो दिन सबसे कठिन लगते हैं, वही दिन आपकी ताकत का निर्माण करते हैं। जब आप बिना रुके आगे बढ़ते हैं, भले ही रफ्तार धीमी हो, तो आप जीत की ओर बढ़ रहे होते हैं।

निरंतरता (Consistency): रोज़ लिया गया एक छोटा कदम भी समय के साथ एक विशाल बदलाव ला सकता है।

निष्कर्ष: सफलता कोई तोहफ़ा नहीं, आपकी मेहनत का फल है

अंत में, हमेशा यह याद रखिए कि आपकी बड़ी कामयाबी आपकी मेहनत का नतीजा होती है, कोई तोहफ़ा नहीं।

ज़िंदगी का सच्चा हमदर्द: फिटनेस और सेहत, जीवन सम्पूर्णता का आधार

स्वास्थ्य डेस्क- 26 जुलाई 2026

सेहत का संबंध आपसे है आपके जीवन से है।
सब चीजें—पैसा, पद, रिश्ते—समय के साथ बदल सकते हैं या दूर हो सकते हैं, लेकिन आपका शरीर और आपकी सेहत ही वह एकमात्र माध्यम है जो जन्म से लेकर जीवन के अंत तक आपके साथ रहती है। जब आप अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हैं, तो आप वास्तव में अपनी जिंदगी से प्यार कर रहे होते हैं।

आपका स्वास्थ्य वह आधार है जो आपके हर लक्ष्य को सहारा देता है। यह आपको कड़ी मेहनत करने की ऊर्जा, बाधाओं को पार करने की शक्ति, बेहतर निर्णय लेने की एकाग्रता, और निरंतर आगे बढ़ने की दृढ़ता प्रदान करता है। हर दिन इस आधार का ध्यान रखें। क्योंकि जब आपका शरीर और मन स्वस्थ होते हैं,तभी लक्ष्य हासिल कर पाते हैं।

परिचय: सेहत के प्रति सजगता ही जीवन की सच्ची साथी है
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर बाहरी सफलताओं, जिम्मेदारियों और भौतिक साधनों को हासिल करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने शरीर और मन को भूल बैठते हैं। लेकिन सच तो यह है कि स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर जो इंसान जितना सजग होता है, वही उसकी जिंदगी का सबसे सच्चा हमदर्द होता है।

फिटनेस का असली मकसद: ज़िंदगी से ज़्यादा पाना, कम नहीं

अक्सर लोग फिटनेस को केवल जिम जाने, वजन घटाने या कठिन डाइट फॉलो करने से जोड़कर देखते हैं। वे सोचते हैं कि फिटनेस पर ध्यान देना जीवन के आनंद को सीमित करना है। लेकिन यह सोच बिल्कुल अधूरी है।

फ़िटनेस का असली मकसद

ऊर्जा और उमंग:
फिटनेस आपको शारीरिक रूप से सीमित नहीं करती, बल्कि आपके जीवन के हर अनुभव को और अधिक गहरा तथा आनंददायक बनाती है।
सकारात्मक दृष्टिकोण:
जब आपका शरीर स्वस्थ रहता है, तो आपका मन शांत और विचार स्पष्ट होते हैं।
स्वतंत्रता का अहसास: एक सेहतमंद शरीर आपको किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी शर्तों पर जीने की आजादी देता है।

दैनिक जीवन में फिटनेस के चार मुख्य आधार

जब आप अपनी फिटनेस और सेहत पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो जीवन के हर पहलू में इसका सकारात्मक असर दिखाई देने लगता है:
हर सुबह सूरज उगने का मज़ा लेने के लिए ज़्यादा एनर्जी
थकान और आलस्य से भरी सुबह के बजाय, एक स्वस्थ शरीर आपको हर नए दिन का स्वागत ऊर्जा और उत्साह के साथ करने की शक्ति देता है। आप केवल दिन काटते नहीं, बल्कि हर पल का आनंद लेते हैं।

अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए ज़्यादा ताक़त
चाहे परिवार की देखभाल हो, करियर का तनाव हो या समाज के प्रति कर्तव्य—इन सबको सही तरीके से पूरा करने के लिए मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति की आवश्यकता होती है। सेहतमंद रहकर आप अपनी जिम्मेदारियों को बोझ समझे बिना आसानी से निभा सकते हैं।

अपने सबसे बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ज़्यादा कॉन्फ़िडेंस

जब आपका शरीर मजबूत और स्वस्थ होता है, तो आपका आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है। यह आत्मविश्वास आपको बड़े लक्ष्य तय करने और उनके लिए जोखिम उठाने की हिम्मत देता है।

नए अनुभवों के लिए “हाँ” कहने की ज़्यादा आज़ादी
चाहे किसी नई यात्रा पर जाना हो, कोई नया खेल सीखना हो या किसी कठिन परिस्थिति का सामना करना हो—एक फिट इंसान किसी भी नए अवसर को देखकर झिझकता नहीं, बल्कि खुलकर उसका स्वागत करता है।

सेहत पर समय बिताना निवेश है, बर्बादी नहीं

कई बार लोग सोचते हैं कि वर्कआउट करने, सही पोषण चुनने या पर्याप्त नींद लेने में जो समय बीतता है, वह बाकी कामों से ध्यान भटकाता है। लेकिन यह सोच पूरी तरह से गलत है।

“जब आप अपनी सेहत पर ध्यान देते हैं, तो आप अपना समय बर्बाद नहीं कर रहे होते— बल्कि आप पूरी तरह से ज़िंदगी जीने की अपनी क्षमता को बढ़ा रहे होते हैं।”

जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि: स्वास्थ्य पर लगाया गया समय आपकी उत्पादकता (productivity) को कई गुना बढ़ा देता है।

बीमारियों से बचाव:

आज का थोड़ा सा ध्यान भविष्य के बड़े संकटों और चिकित्सा के खर्चों से आपको बचाता है।
समय का सही उपयोग:
अस्वस्थ होकर बिस्तर पर दिन बिताने से बेहतर है कि रोज़ थोड़ा समय अपनी सेहत को संवारने में लगाया जाए।

समय के साथ बढ़ता हुआ अनमोल इनाम
भौतिक वस्तुएं समय के साथ पुरानी हो जाती हैं और अपनी कीमत खो देती हैं। लेकिन सेहत एक ऐसा अनमोल धन है जो उम्र बढ़ने के साथ और भी अधिक मूल्यवान होता जाता है।

यह एक ऐसा इनाम है जो हर गुज़रते साल के साथ और भी कीमती होता जाता है।
जैसे-जैसे साल बीतते हैं, एक फिट और सजग इंसान अपनी उम्र के प्रभाव को मुस्कुराकर स्वीकार करता है। बुढ़ापा उनके लिए कमजोरी नहीं, बल्कि अनुभवों की परिपक्वता और आनंद का दौर बन जाता है।

निष्कर्ष: अपनी सेहत से कीजिए सच्ची दोस्ती

विष्णु शयन क्षीरसागर, नदियाँ और लक्ष्मी की अनादि सत्ता:देवशयनी एकादशी का गूढ़ दर्शन

अध्यात्म डेस्क 26 जुलाई 2026

देवशयनी एकादशी वास्तव में हमें यही सिखाती है कि बाहरी शोर को थामकर, नदियों की तरह अपने विचारों को उस परम क्षीरसागर (अंतरआत्मा) में विलीन कर दें, जहाँ विष्णु रूपी शांति और लक्ष्मी रूपी आनंद सदा से विराजमान हैं।

कल पूरे देश में देवशयनी एकादशी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई। श्रद्धालु भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखते हैं—उस परम चेतना के लिए, जिनका स्वरूप नील-कमल की भांति शोभायमान है और जिनके वामांक (अंक) में साक्षात श्री (देवी लक्ष्मी) विराजमान हैं। पौराणिक मान्यता है कि आज से भगवान योगनिद्रा में चले जाते हैं। लेकिन यदि हम धार्मिक अनुष्ठानों से थोड़ा आगे बढ़कर उपनिषदों और ऋषि-मुनियों के अंतर्मन में उतरें, तो इसके पीछे एक परम गूढ़ आध्यात्मिक दर्शन उजागर होता है।

क्षीरसागर की कल्पना: नदियों का विसर्जन और परम शांति
सृष्टि के आरंभ से ही समस्त नदियाँ बहती हैं, कंकड़-पत्थर, मिट्टी, जीवन और मृत्यु—संसार के हर रूप और अनुभव को अपने साथ बहाकर अंततः समुद्र में समा जाती हैं। समुद्र इस पूरी सृष्टि का अंतिम केंद्र है, जहाँ संसार की हर चंचलता विलीन होकर शांत हो जाती है। इसीलिए ईश्वर को ‘संसार-सारम्’ (संसार का सार) कहा गया है।

प्राचीन ऋषि-मुनियों ने जब ध्यान की उच्च पराकाष्ठा में सृष्टि के इस चक्र को देखा, तो उन्होंने ‘क्षीरसागर’ की अवधारणा गढ़ी। क्षीरसागर केवल जल का भंडार नहीं है, यह शुद्ध चेतना का वह अनंत महासागर है, जहाँ संसार के समस्त कर्म और अनुभव विलीन होते हैं।

भगवान विष्णु का नीलाभ स्वरूप आकाश और अनंतता का प्रतीक है। वे उस क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर ‘योगनिद्रा’ में विराजमान हैं। यह योगनिद्रा आलस्य नहीं, बल्कि परम सजगता की अवस्था है। वे सागर के भीतर परम शांत हैं, मानो संसार रूपी नदियों द्वारा लाए गए सभी द्वंद्वों और अनुभवों को अपने भीतर समेटकर शांत भाव से सब देख रहे हों।

जल तत्व की प्रधानता (नारायण का स्वरूप): देवशयन आषाढ़-कार्तिक (वर्षाकाल) में होता है। इस समय चारों तरफ केवल जल ही जल होता है। ‘नारायण’ का अर्थ ही है ‘जल में निवास करने वाला’। जब पूरी प्रकृति जलमग्न हो जाती है, तो माना गया कि सृष्टि का पालनहार जल (क्षीर सागर) में ही लीन हो गया है।

उपनिषदों का प्रकाश: लक्ष्मी का अनादि प्रभाव
प्रश्न उठता है कि क्या देवी लक्ष्मी का प्रभाव संसार में आरंभ काल से है?
उपनिषद और वेदों के ‘श्रीसूक्त’ के अनुसार, लक्ष्मी केवल धन या भौतिक वैभव नहीं हैं; वे ‘श्री’ हैं—अर्थात सृष्टि की सृजनात्मक ऊर्जा और स्पंदन ।

ऋग्वेद के अनुसार: जब सृष्टि का निर्माण शुरू भी नहीं हुआ था, तब भी वह परम ब्रह्म ‘एक’ था, लेकिन उसमें ‘सृजन’ की जो पहली इच्छा जगी—वही इच्छा ‘लक्ष्मी’ है।

उपनिषदों का दर्शन: यदि विष्णु ‘सत्य’ हैं, तो लक्ष्मी उस सत्य की ‘गति’ हैं। बिना लक्ष्मी के, विष्णु का क्षीरसागर निष्क्रिय रहता। संसार का निर्माण, पालन और उसकी सौंदर्य-चेतना—यह सब आरंभ काल से ही लक्ष्मी का प्रभाव है। भगवान विष्णु के अंक में उनका विराजमान होना यह दर्शाता है कि यह सृष्टि और इसका भौतिक सौंदर्य, परम अध्यात्म से कभी अलग था ही नहीं।

ईश्वर, क्षीर सागर और अलगाव का शाश्वत रहस्य
भगवान को संसार का कण-कण जानता है, पूजता है और उनका अनुकरण करता है। लेकिन क्या कभी इस दार्शनिक पहलू पर विचार किया कि क्या वह परम चेतना भी इस सांसारिक शोर में हमें व्यक्तिगत रूप से पहचानती है?

सनातन दर्शन में ईश्वर का वास ‘क्षीर सागर’ में माना गया है। सवाल उठता है कि क्या भगवान क्षीर सागर में इसलिए रहते हैं ताकि वे इस सृष्टि के मूल शोर और उसकी तड़प को सीधे महसूस कर सकें?

अस्वीकरण: –
यह एक वैचारिक और मौलिक लेख है, इसका
उद्देश्य किसी भी धर्म या भावना को ठेस पहुँचाना अथवा विवाद पैदा करना नहीं है।
मेरा विचार मेरा दर्शन,
“ना कोई दार्शनिक, ना कोई कवि, ना कोई आध्यात्मिक प्रणेता…”
— दीपक पांडेय

ब्रेकिंग न्यूज: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, कांग्रेस बोली- ‘यह छात्र शक्ति की ऐतिहासिक जीत’,सीजेपी ने आंदोलन किया समाप्त

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नई दिल्ली 25 जुलाई 2026

आज देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में शनिवार को एक बड़ा भूचाल आ गया। भारी विरोध और व्यापक छात्र आंदोलन के दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है।

जंतर-मंतर पर एक महीने से डटे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी है।

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया: “यह घमंडी सरकार के झुकने की शुरुआत”

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और केंद्र सरकार पर हमला बोला।
“देश के छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों को बधाई! उनके अटूट साहस ने एक घमंडी सरकार के घमंड को चूर-चूर कर दिया और शिक्षा मंत्री को बाहर का रास्ता दिखा दिया।” — पवन खेड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता (कांग्रेस)

भ्रष्टाचार और दमन का प्रतीक: पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान देश की जर्जर शिक्षा प्रणाली, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकारी संवेदनहीनता के प्रतीक बन चुके थे।

पुलिस बर्बरता पर घेरा: पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर वाटर कैनन, आंसू गैस, Shock Batons और पैलेट गन्स का इस्तेमाल किया गया। यहाँ तक कि आवाज उठाने वाले नेताओं और छात्रों को सड़कों पर घसीटा गया।

पीएम मोदी से माफी की मांग: कांग्रेस ने साफ कर दिया कि केवल इस्तीफा काफी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के लिए देश के युवाओं से खुद माफी मांगनी चाहिए।

लड़ाई जारी रहेगी: कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। जब तक पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा।

राहुल और प्रियंका गांधी ने सराहा छात्रों का साहस

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि सड़कों पर उतरकर अपने भविष्य और संविधान की रक्षा करने वाले युवाओं पर पूरे देश को गर्व है। वहीं प्रियंका गांधी ने इस घटनाक्रम को जनता की जीत बताते हुए कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि देश के लोग अब अपने अधिकार वापस ले रहे हैं।
इस्तीफे की खबर आते ही मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।

सीजेपी (CJP) का बड़ा ऐलान: 1 महीने से चला आ रहा आंदोलन समाप्त
तीसरे दौर की वार्ता रही सफल

आंदोलन की समाप्ति

सरकार से मिले आश्वासनों के बाद सीजेपी ने जंतर-मंतर पर चल रहे अपने एक महीने लंबे आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया।

खबर सार: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सीजेपी के आंदोलन की समाप्ति ने देश के राजनीतिक पारे को चरम पर पहुंचा दिया है। जहां एक तरफ विपक्षी खेमा इसे लोकतंत्र और छात्र-युवा शक्ति की अभूतपूर्व जीत मान रहा है, वहीं सरकार अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा विभाग में जवाबदेही और सुधारों के नए ढांचे पर विचार कर रही है।