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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री को सौंपा त्यागपत्र

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नई दिल्ली 25 जुलाई 2026

ब्रेकिंग न्यूज:- देश में जारी व्यापक छात्र आंदोलन और बढ़ते दबाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है। इस खबर के आते ही सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) आंदोलनकारियों और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। लगातार जारी विरोध प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को सीजेपी खेमे द्वारा अपनी एक बड़ी नैतिक और रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आंदोलनकारियों के बीच जश्न और खुशी का माहौल बना हुआ है।

अभिजीत दीपके ने कहा यह हमारे आंदोलन की जीत है और जो छात्र नहीं रहे उनके लिए एक न्याय है। लेकिन हमारी और दो मांगे हैं उसके बगैर हम यहां से नहीं हटेंगे, कहते थे मंत्री का इस्तीफा नहीं हो पाएगा।लेकिन हमारी ताकत और छात्र एकता ने सरकार को मजबूर कर दिया और मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।

देश भर में नीट (NEET-UG) परीक्षा धांधली को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।
​पिछले कुछ हफ्तों से दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों और कई छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी था। प्रदर्शनकारी लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे थे।

​नैतिक जिम्मेदारी ली

​अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य और हमारी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उससे उपजे जन-आक्रोश के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया है।

छात्रों का प्रदर्शन: नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद देशव्यापी गुस्सा देखने को मिला।

जंतर-मंतर पर जमावड़ा: पिछले कई दिनों से राजधानी में छात्र नेता और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठन लगातार शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे।

आगे की कार्रवाई: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और परीक्षा सुधारों के लिए गठित समिति की रिपोर्ट पर देश की नजरें टिकी हुई हैं।

‘तुपकी’ की सलामी और भक्ति भाव के बीच संपन्न हुआ बस्तर का प्रसिद्ध गोंचा पर्व

रायपुर -25 जुलाई 2026

बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक प्रसिद्ध गोंचा पर्व आज भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र जनकपुरी (गुंडिचा मंदिर) से रथ पर सवार होकर अपने मुख्य मंदिर लौटे।लगभग 600 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती है।

भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ मंदिर वापसी।
जनप्रतिनिधियों ने की पूजा-अर्चना, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना।

बाहुड़ा गोंचा के इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव और चित्रकोट विधायक विनायक गोयल सहित कई जनप्रतिनिधि रथयात्रा में शामिल हुए ।

‘तुपकी’ की सलामी रही मुख्य आकर्षण
रथयात्रा के दौरान बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा ‘तुपकी’ सलामी ने सबका ध्यान खींचा। बांस से बनी इस विशेष नाल में पेंग यानी मलकांगनी के बीज भरकर श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक सलामी दी। तुपकी से गूंजती आवाज़ और श्रद्धालुओं के उत्साह से पूरा जगदलपुर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और रथयात्रा में हिस्सा लिया।

लोक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
गोंचा पर्व को बस्तर की प्राचीन लोक परंपराओं और आस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक उत्सवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ ही बस्तर के इस ऐतिहासिक लोक पर्व गोंचा का विधिवत समापन हो गया।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी -भारत भाग्य विधाता फिल्म के निर्माता-निर्देशक और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की बैठक

छत्तीसगढ़ को फिल्म पर्यटन के वैश्विक गंतव्य के रूप में विकसित करने की तैयारी।

रायपुर- 25 जुलाई 2026

‘भारत भाग्य विधाता‘ फिल्म के लेखक-निर्देशक मनोज तापड़िया तथा फिल्म निर्माता आदि शर्मा ने की छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के एमडी विवेक आचार्य से सौजन्य मुलाकात।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास,  फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई विस्तृत चर्चा।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, जलप्रपात, वन क्षेत्र, जनजातीय संस्कृति तथा विविध प्राकृतिक लोकेशन राज्य को फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण बातें हुई, जिसमें बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य से फिल्म निर्देशक मनोज तापड़िया और निर्माता आदि शर्मा ने मुलाकात कर परियोजना की योजना और संभावनाओं पर चर्चा की।

आचार्य ने कहा कि यह परियोजना राज्य के फिल्म व पर्यटन क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जिससे रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

चर्चा के दौरान चित्रोत्पला फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक ऐसे समग्र फिल्म परिसर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जहाँ फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हों।

बैठक में फिल्म उद्योग विशेषज्ञों के साथ निरंतर सहयोग बढ़ाने और छत्तीसगढ़ को फिल्म निर्माण के पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने पर सहमति बनी।

हाफ नदी का संरक्षण‑पुनर्जीवन: जनआंदोलन बनाने की तैयारी

बेमेतरा– 24 जुलाई 2026 —

25 जुलाई को विकासखण्ड नवागढ़ के ग्राम अंधियारखोर में मैदानी अमले के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, ट्रांसेक्ट वॉक और व्यापक जनजागरूकता अभियान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य नदी पुनर्जीवन के कार्यों को वैज्ञानिक ढंग, स्थानीय सहभागिता और प्रभावी क्रियान्वयन से गति देना है।

कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन में जिले में विकसित भारत जी‑राम‑जी अभियान के अंतर्गत हाफ नदी के संरक्षण व पुनर्जीवन को जनआंदोलन का रूप देने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

नागरिकों से जल‑संरक्षण में भागीदारी की अपील

प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के अधिकारी व तकनीकी विशेषज्ञ मैदानी अमले को वर्षा जल संचयन, भू‑जल पुनर्भरण, कैचमेंट विकास, तट संरक्षण, मृदा‑जल संरक्षण उपाय तथा नदी आधारित पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ करने के तरीकों पर मार्गदर्शन देंगे।

ट्रांसेक्ट वॉक के दौरान अधिकारियों व ग्रामीणों द्वारा नदी के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर गाद जमाव, अतिक्रमण, अपशिष्ट प्रबंधन व जलनिकासी की स्थिति का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

कलेक्टर-प्रतिष्ठा-ममगाई- द्वारा हाफ-नदी-पुनरुद्धार-अभियान की पहल की जा रही है। हाफ-नदी-पुनरुद्धार के लिए सामुदायिक-भागीदारी तय किए जाने पर जोर दिया गया।

जनजागरूकता अभियान के माध्यम से नागरिकों को वर्षा जल संचयन, सोक पिट निर्माण, वृक्षारोपण व स्वच्छता बनाए रखने तथा नदी में अपशिष्ट न डालने की अपील की जाएगी।

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने कहा है कि जल संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है, और जिला प्रशासन सभी वर्गों — जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, युवा, किसान व छात्र — से सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा करता है।

मरवाही अवैध रेत भंडारण – अवैध रेत का स्टॉक सील किया गया –

रायपुर/छत्तीसगढ़ –24 जुलाई 2026 —

शिकायत और कार्रवाई से न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है, बल्कि जनता का प्रशासन पर विश्वास भी बढ़ा है, जो प्रदेश में पारदर्शिता और समर्पित लोकसेवा की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है।

सुशासन का असर: मरवाही में अवैध रेत भंडारण सील, दो ट्रैक्टर जब्त

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और जवाबदेही के संकल्प के अनुरूप गौरेला‑पेंड्रा‑मरवाही जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के आधार पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की गई, मरवाही के सिवनी चौक स्थित अवैध रेत भंडारण स्थल को मौके पर ही सील कर दिया गया और अवैध परिवहन में संलिप्त दो ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए।

कलेक्टर विजय दयाराम के निर्देशानुसार जिला खनिज विभाग ने शिकायत की जांच कर संबंधित भंडारणकर्ता को वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया था। निर्धारित अवधि में संतोषजनक दस्तावेज न मिलने पर छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम, 2009 के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई गई।

मामले में मरवाही और पिपरिया क्षेत्रों में अवैध रेत परिवहन में प्रयुक्त वाहनों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर अर्थदंड व अन्य नियमानुसार कदम उठाये जा रहे हैं। इस विशेष अभियान में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, शिवकुमार लहरे, सतीश साहू तथा साहिब गनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ अभियान निरंतर जारी रखा जाए ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।




ट्रैक्टर मॉडल से अबूझमाड़ के बीहड़ों में पहुँची विकास की नई उम्मीद

नारायणपुर —24 जुलाई 2026 —

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर परिक्षेत्र में घने जंगलों और कठिन पहाड़ियों में बसा अबूझमाड़ वर्षों तक खाद्य सुरक्षा से वंचित रहा, कई गांवों को राशन पाने के लिए 40–50 किलोमीटर की थकाऊ पैदल यात्रा करनी पड़ती थी और मानसून में कई स्थान बाहरी दुनिया से कट जाते थे।

दुर्गम रास्तों पर ट्रैक्टर बना जन-सेवा का सारथी
ऐसी ही चुनौतियों को देखते हुए नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक सरल पर प्रभावी पहल शुरू की — पारंपरिक ट्रांसपोर्ट की सीमाओं को तोड़ते हुए मुख्य गोदामों से सीधे ट्रैक्टरों के माध्यम से 35 किलोग्राम चावल व आवश्यक खाद्यान्न सुदूर गांवों तक पहुँचाने का नया पीडीएस मॉडल लागू किया गया।

ओरछा क्षेत्र के थुलथुली, गोमागाल, मुरूमवाड़ा, आदेर, जाटलूर, जटवर, बालेबेड़ा, हांदावाड़ा और पीडियाकोट जैसे गाँवों में अब बड़े ट्रकों के न पहुँच पाने वाले रास्तों पर ट्रैक्टरों ने आसान पहुँच सुनिश्चित की है; मानसून से पहले तीन से चार महीने का अनाज अग्रिम सुरक्षित कराया गया है, प्रत्येक ग्राम पंचायत पर नए पीडीएस भवन बनाये गए और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई।

राशन कार्ड बना अधिकार का सशक्त प्रतीक

स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि जब पहली बार राशन से लदा ट्रैक्टर उनके गाँव पहुँचा तो केवल अनाज ही नहीं, बल्कि सरकार का भरोसा और सम्मान भी उनके घर आया; यह पहल नागरिकों के समय, श्रम और आत्म-सम्मान की रक्षा करते हुए राशन कार्ड को एक सशक्त अधिकार के रूप में स्थापित करती है।

नारायणपुर का ट्रैक्टर-आधारित मॉडल केवल आपूर्ति व्यवस्था नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और अंतिम व्यक्ति तक पहुँच के सरकारी संकल्प का जीता-जागता प्रमाण है — बतौर संदेश यह साबित करता है कि इरादे बुलंद हों तो नवाचार से दुर्गम बाधाएँ भी पार की जा सकती हैं।



राजा रघुवंशी केस-सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द की, तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश

नई दिल्ली 24 जुलाई 2026

सोनम -राजा रघुवंशी का मामला उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था, जब इंदौर निवासी ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी शादी के कुछ समय बाद अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून पर मेघालय गए थे। इसी दौरान राजा की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी।

शुरुआती जांच में मामला लापता होने का प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में पुलिस जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हत्याकांड में सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी और अन्य सहयोगियों की भूमिका सामने आई। आगे क्या –
इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद देशभर में चर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत निरस्त कर दी और आरोपी को निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

घटना में आरोप है कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत राजा रघुवंशी की हत्या की गई। पुलिस ने जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया।

बाद में निचली अदालत से सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई थी। हालांकि, मेघालय सरकार ने इस फैसले का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सरकार का तर्क था कि मामला अत्यंत गंभीर है और जमानत से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सर्वोच्च अदालत ने सरकार की दलीलों पर विचार करते हुए जमानत रद्द कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई और ट्रायल प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी। इस फैसले को बहुचर्चित हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम माना जा रहा है।


सीजेपी का आह्वान NEET पेपर लीक पर देशव्यापी प्रदर्शन आज, PM बोले- दोषियों पर होगी और सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली 24 जुलाई 2026

हालिया खबर देखें तो दिल्ली में राजनीति,
आंदोलन और भूख हड़ताल का पारा चढ़ा हुआ है।सबकी अपनी मांगे है और सभी अपने अटल इरादों पर अडिग दिख रहे हैं।

आंदोलनकारी संगठन और केंद्र सरकार के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध अभी भी बना हुआ है। सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के आवास या मंत्रालय में बैठक स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बातचीत जंतर-मंतर या किसी निष्पक्ष स्थान पर ही होनी चाहिए।

इधर, जंतर-मंतर के आसपास बढ़ती भीड़ और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने गुरुवार को कनॉट प्लेस स्थित दुकानों, कार्यालयों और रेस्तरां को शाम 6:30 बजे तक बंद रखने की एडवाइजरी जारी की। एसोसिएशन ने बताया कि यह निर्णय नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के अधिकारियों की सलाह पर लिया गया है।

NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को देशभर के सभी जिलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन ने छात्रों की विभिन्न मांगों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

सीजेपी ने कहा है कि सभी जिलों में स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेकर प्रदर्शन किए जाएं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों की मांगों का सार्वजनिक रूप से वाचन किया जाएगा। संगठन के अनुसार, प्रदर्शन से संबंधित एसओपी, प्रचार सामग्री और ज्ञापन का प्रारूप उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है और इसके खिलाफ सरकार और अधिक सख्त कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ी हैं, इसलिए दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता विद्यार्थियों का एक शैक्षणिक वर्ष बचाना थी।

इसी उद्देश्य से कम समय में करीब 22 लाख छात्रों की दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई और 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए। उन्होंने सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

उधर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। वांगचुक 28 जून से सीजेपी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनशन पर बैठे थे।


राजीव भवन प्रदर्शन विवाद पर कांग्रेस ने भाजपा और सरकार को बताया जिम्मेदार

रायपुर – 23 जुलाई 2026

कल भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राजीव भवन पर हुई घटना पर कांग्रेस ने गंभीर प्रतिक्रिया जारी किया है।राजधानी रायपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के बाहर भाजपा के प्रदर्शन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को सरकार प्रायोजित बताते हुए कहा है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। पार्टी का दावा है कि इस दौरान उसके कई कार्यकर्ता घायल हुए, जबकि भाजपा और राज्य सरकार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राजीव भवन में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार, सूत्रों पर , कल कांग्रेस मीडिया विभाग द्वारा पत्रकार वार्ता में कहा कि यह प्रदर्शन भाजपा का नहीं, बल्कि पूरी राज्य सरकार का सुनियोजित हमला था।पार्टी का आरोप था कि सरकार के मंत्री और पुलिस प्रशासन के संरक्षण में कांग्रेस मुख्यालय को निशाना बनाया गया।

पार्टी का कहना है कि भाजपा ने प्रदर्शन के नाम पर कांग्रेस कार्यालय पर हमला किया। पार्टी ने दावा भी किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता सामान्य दिनों की तरह राजीव भवन में मौजूद थे। जैसे ही भाजपा कार्यकर्ताओं के कांग्रेस मुख्यालय की ओर आने की सूचना मिली, कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने बाहर आए। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पत्थर, पानी की बोतलें और लाठियां फेंककर हमला किया।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता ट्रैक्टर में भरकर पत्थर, पुराने चप्पल और लाठियां लेकर पहुंचे थे। पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पांच आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल भी उन्हीं पर किया, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार इस घटना में कांग्रेस के एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता, जिनमें महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं, घायल हुए।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री मौजूद थे। पार्टी ने कहा कि गृह मंत्री समेत अन्य मंत्रियों की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है, लेकिन वे स्वयं विपक्षी दल के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और कथित हमले में शामिल रहे। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सत्ता के दुरुपयोग का यह गंभीर उदाहरण है।

प्रदेश कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्वयं प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनकी पूरी सरकार वहां मौजूद थी।सूत्रों में दावा किया गया कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर की गई। उन्होंने कहा कि मंत्रियों ने अपने संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया है और राज्यपाल से ऐसे मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को हाल के NEET पेपर लीक मामले में राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। पार्टी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।


अन्ना हजारे ने लिखा पीएम मोदी को पत्र: छात्रों से संवाद की अपील, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा

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नई दिल्ली 23 जुलाई 2026

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हाल ही में छात्र आंदोलनों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने छात्रों के साथ टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की अपील करते हुए परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने पर विचार करने की बात कही है।

सूत्रों के हवाले से जानकारी है कि अपने पत्र में अन्ना हजारे ने लिखा कि लोकतंत्र में बातचीत हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होती है। उनका कहना है कि यदि किसी विभाग में गंभीर चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार कमजोर नहीं होती, बल्कि इससे शासन व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता का संदेश जाता है।

अन्ना हजारे ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदारी तय कर संबंधित मंत्री से इस्तीफा लिया जाता है तो इससे अन्य मंत्रियों को भी स्पष्ट संदेश मिलेगा कि अपने विभाग की जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता से करना आवश्यक है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनेगी।

उन्होंने दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता व्यक्त की। पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र में अत्यधिक बल प्रयोग से बचना चाहिए। साथ ही प्रदर्शनकारियों को भी हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से दूर रहना चाहिए। उनका मानना है कि सरकार और छात्रों के बीच सीधे संवाद से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।

अन्ना हजारे का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष भी परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे माहौल में अन्ना हजारे की यह अपील राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।