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Friday, October 30, 2026
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बोल बम के जयघोष से शिवमय हुआ किरंदुल: सैकड़ों शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर की पावन कांवड़ यात्रा पर हुए रवाना

किरंदुल – 01 अगस्त 2026- रिपोर्ट – रवि सरकार

श्रावण मास की पावन बेला में आज किरंदुल नगर शिवभक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया।भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा,असीम विश्वास और अपार उत्साह के साथ सैकड़ों शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ धाम,देवघर की पावन कांवड़ यात्रा के लिए रवाना हुए।

पूरे नगर में “बोल बम,हर-हर महादेव और जय बाबा बैद्यनाथ के गगनभेदी जयघोष से ऐसा भक्तिमय वातावरण बना कि मानो स्वयं शिव की नगरी धरती पर उतर आई हो।श्रद्धालुओं का जनसैलाब बस स्टैंड परिसर और नगर के प्रमुख मार्गों पर उमड़ पड़ा,भगवा वस्त्रों में सजे कांवड़िए हाथों में पवित्र कांवड़ लिए भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे ।

महिलाएं, माताओ,बहनों,युवाओं और छोटे-छोटे बच्चों की सहभागिता ने इस यात्रा को और भी भव्य बना दिया।श्रद्धालु भोलेनाथ के भजनों पर झूमते,नृत्य करते और बोल बम के उद्घोष के साथ भक्ति की अलौकिक छटा बिखेरते हुए आगे बढ़े।
पूरा किरंदुल नगर शिवमय हो उठा और हर ओर केवल आस्था, श्रद्धा और भक्ति की अनूठी अनुभूति दिखाई दी,।इस पावन अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह, नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे ।

रूबी शैलेंद्र सिंह और बबलू सिद्दीक़ी ने सभी के लिए कांवड़ यात्रा की मंगल कामना की।सभी ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और शुभकामनाओं के साथ स्वागत एवं उत्साहवर्धन किया तथा बाबा भोलेनाथ से सभी की मंगलमय यात्रा और सुख-समृद्धि की कामना की।

यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ धाम की कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति,आस्था,सेवा, त्याग और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है,यह यात्रा मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संदेश देती है तथा भगवान शिव के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करती है।
श्रद्धा,भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण यह दिव्य यात्रा किरंदुल के इतिहास की यादगार धार्मिक आयोजनों में शामिल हो गई।बोल बम और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष से पूरा नगर देर तक गूंजता रहा।शिवभक्तों का यह विशाल जत्था बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के संकल्प के साथ देवघर की ओर प्रस्थान किया।

नगरवासियों ने हाथ जोड़कर शिवभक्तों को शुभयात्रा की मंगलकामनाएं दीं और भगवान भोलेनाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की। सभी भक्तों ने कांवड़ यात्रियों को भावभीनी विदाई दी।

सावन का महीना, पवन करे शोर

हवाएं कुछ कहती हैं, दिशाएं कुछ कहती हैं… सुन लो जरा।

दर्शन डेस्क – 31 जुलाई 2026

सूरज बिना किसी शोर के उगता है, नदियाँ बिना किसी नाम के बहती हैं, और जंगल के जीव बिना किसी भाषा के जन्म लेते हैं, जीते हैं और चुपचाप चले जाते हैं। यह पूरी प्रकृति मूक है, फिर भी पूरी तरह शांत, तृप्त और अपनी लय में है।

जब सावन आता है और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो हम कहते हैं—”पवन करे शोर।” लेकिन हवा कोई भाषा नहीं बोलती, न ही दिशाएं शब्दों में बात करती हैं।

दूसरी तरफ इंसान है, जिसके पास शब्दों का विशाल सागर है। लेकिन विडंबना देखिए कि इस पूरी धरती पर सबसे ज़्यादा परेशान, अशांत और अकेला वही है।

प्रकृति के इस मौन संदेश में हमारे लिए 3 गहरे पाठ छिपे हैं:
प्रकृति केवल ‘होती’ है, इंसान ‘व्याख्या’ करता है: पेड़ या जानवर यह सोचकर नहीं रोते कि दस साल बाद क्या होगा। इंसान ही अपने बनाए शब्दों से दिल पर घाव बनाता है और फिर उन्हीं शब्दों से उन्हें सहलाता रहता है।

मालिक होने का झूठा वहम: इंसान प्रकृति से सबकुछ लेता है—हवा, पानी, धूप और भोजन। बदले में कुछ नहीं देता, फिर भी अपने विचारों और शब्दों के अहंकार में खुद को इस सृष्टि का ‘मालिक’ समझ बैठता है।

‘नाम’ और ‘लेबल’ से कटता जीवन: हमने हर चीज़ पर लेबल लगा दिया है—”यह मेरा है, यह तेरा है।” हम किसी बहती हवा या पेड़ के सीधे जीवन को महसूस नहीं करते, बस शब्दों के चश्मे से उसे देखते हैं और प्रकृति के सीधे अनुभव से कट जाते हैं।

निष्कर्ष
भाषा और शब्द केवल संसार चलाने और काम निपटाने के औजार टूल्स थे। लेकिन इंसान ने उसी औजार का महल बनाया और खुद उसका कैदी बनकर बैठ गया।

सूरज, हवा, नदियाँ और जानवर इसलिए शांत हैं क्योंकि वे जीवन की व्याख्या नहीं करते, वे बस जीवन को “जीते” हैं। सावन की बहती हवा और चारों दिशाएं आज यही कह रही हैं—थोड़ा ठहरो, अपने दिमाग के शब्दों का शोर धीमा करो और उस अनकही शांति को सुनो जो शब्दों के पार है।



अपने ही पाखंड पर पर्दा डालने का एक नया ‘इवेंट’: ‘बाघ बचाओ’

लेख/इवेंट – 31 जुलाई 2026

“बाघ नहीं, जंगल बचाओ। इंसानी भीड़ को रोको, थोड़ा साँस लेने दो।”

अगर प्रकृति के जीवों के पास इंसानी चालाकी और तकनीक आ जाती, तो शायद वे सबसे पहले इंसान से अपनी छीनी हुई ज़मीन और आज़ादी का हिसाब माँगते।

हर साल ‘विश्व बाघ संरक्षण दिवस’ आता है और उसके साथ ही शुरू होता है विज्ञापनों, पोस्टरों और भाषणों का एक भव्य सिलसिला।

चारों तरफ एक ही शोर गूंजता है—”बाघ बचाओ, पर्यावरण बचाओ!” लेकिन ज़रा अपनी तथाकथित सभ्य मानसिकता के चश्मे को उतारकर देखिए: क्या बाघ को सच में हमारे भाषणों और दया की ज़रूरत है? या फिर यह सिर्फ इंसान के अपने ही पाखंड पर पर्दा डालने का एक नया ‘इवेंट’ बन चुका है?

सच तो यह है कि बाघ कभी इंसान के आगे अपनी जान की भीख माँगने नहीं आया था।
हमने अपने विशाल शहरों, हाईवे, फार्महाउस और अंतहीन लालच के लिए उसके सदियों पुराने घर यानी जंगलों को बेरहमी से उजाड़ दिया।

जब हमने उसका घर छीनकर उसे बेघर कर दिया, तो आज वही इंसान सवाल पूछता है कि “बाघ शहरों और बस्तियों में क्यों घुस रहा है?” यह हास्यास्पद तर्क है—बाघ आपके शहर में नहीं आया, आपने उसके घर पर अपना कंक्रीट का जंगल खड़ा कर दिया है।

इंसान की सबसे बड़ी भ्रांति यह है कि वह खुद को इस पूरी पृथ्वी का ‘मालिक’ समझ बैठा है।

हम 7-स्टार होटलों में वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं, सूट-टाई पहनते हैं, काँटे-छुरी से प्लेट में सजा मांस खाते हैं और खुद को बेहद ‘सभ्य’ कहते हैं। हमने अपनी हिंसक प्रवृत्ति को छुपाने के लिए शब्दों के नए जाल बुने हैं—कत्लखाने को ‘प्रोसेसिंग प्लांट’ कह दिया और स्वाद तथा विनाश को ‘लाइफस्टाइल’।

जंगल का शेर तो केवल पेट की भूख मिटाने के लिए शिकार करता है, वह भी तब जब मजबूरी हो। वह कभी स्वाद, व्यापार, संग्रह या अपने अहंकार के लिए शिकार नहीं करता।

लेकिन इंसान? इंसान अपनी जीभ के स्वाद, व्यापार और बेकाबू वासनाओं के लिए पूरी पृथ्वी की हवा, पानी, नदी और जंगलों को निगल रहा है।

बाघ संरक्षण के नाम पर हम जो यह सालाना ‘ड्रामा’ रचते हैं, वह असल में बाघ के प्रति कोई प्रेम नहीं है, बल्कि हमारी अपनी ही गिल्ट (दोषबोध) को छुपाने और खुद की पीठ थपथपाने का ज़रिया है।

अगर इंसान वाकई बाघ को बचाना चाहता है, तो उसे कोई बहुत महान काम करने या बड़े-बड़े इवेंट आयोजित करने की ज़रूरत नहीं है। इंसान बस अपने लिए ज़मीन, हवा, पानी और नीयत को शुद्ध कर ले—बाघ अपने आप बच जाएगा। प्रकृति को हमारी दया या संरक्षण की नहीं, केवल हमारे ‘हस्तक्षेप’ से आज़ादी की दरकार है।

इंडियन ओवरसीज बैंक बेमेतरा में 14.56 करोड़ की धोखाधड़ी: मुख्य आरोपी पूर्व शाखा प्रबंधक तमिलनाडु से गिरफ्तार

बेमेतरा- 31 जुलाई 2026

बेमेतरा में इंडियन ओवरसीज बैंक के 14.56 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी पूर्व शाखा प्रबंधक को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया। एसपी त्रिलोक बंसल ने प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी।

सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक की बेमेतरा शाखा में हुई करीब 14 करोड़ 56 लाख 9 हजार 693 रुपये की बड़ी बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में मुख्य आरोपी, बैंक के तात्कालिक शाखा प्रबंधक विनीत दास, को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी को तमिलनाडु के तंजावुर जिले से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया।

मामले की शुरुआत
वर्ष 2022 में इंडियन ओवरसीज बैंक, गस्ती चौक, दुर्ग रोड, बेमेतरा शाखा के प्रबंधक रज्जू पाटनवार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि तात्कालिक शाखा प्रबंधक विनीत दास ने बैंक नियमों का उल्लंघन करते हुए वित्तीय अनियमितता की और खातों में अवैध रूप से धन राशि का स्थानांतरण किया। बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर धारा 420, 409, 120बी, 34 भारतीय दंड विधान के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।

जांच में सामने आया कि विनीत दास ने बिचौलियों कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। इन चारों आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

कैसे हुई मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस महानिरीक्षक (IGP) दुर्ग रेंज अभिषेक शांडिल्य, पुलिस अधीक्षक (SP) त्रिलोक बंसल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव और एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई। थाना प्रभारी, सिटी कोतवाली बेमेतरा, निरीक्षक सोनल ग्वाला के नेतृत्व में टीम ने लगातार पता-साजी कर 29 जुलाई 2026 को आरोपी विनीत दास (पिता सुप्रभात दास, उम्र 40 वर्ष, निवासी डोरंडा, थाना अरगोड़ा, रांची, झारखंड) को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के समय आरोपी इंडियन ओवरसीज बैंक के तंजावुर क्षेत्रीय कार्यालय, तमिलनाडु में पदस्थ था।

धोखाधड़ी के प्रमुख तरीके
बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट में कुल 180 खाताधारकों से जुड़े लगभग 16.01 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई, जिनमें निम्न प्रमुख अनियमितताएं पाई गईं:
कई मामलों में ऋण जिन इकाइयों के नाम पर स्वीकृत हुए, वे अस्तित्व में ही नहीं थीं या बंद पड़ी थीं

स्वयं सहायता समूह (SHG) ऋणों में मास्टर परिपत्र का उल्लंघन कर अत्यधिक राशि स्वीकृत की गई।
ग्राहकों के हस्ताक्षर के बिना खातों के बीच अनधिकृत राशि हस्तांतरण।

कृषि मशीनरी ऋणों में डीलर के खाते में राशि भेजी गई, जबकि संबंधित संपत्ति मौजूद ही नहीं थी।
फर्जी GST नंबरों की बिना जांच के आपूर्तिकर्ताओं (सप्लायर) को भुगतान
KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋणों में उधारकर्ताओं की पात्रता जांचे बिना अधिक वित्तपोषण।

स्वीकृत मूल्यांकन रिपोर्ट और कानूनी राय बैंक-पैनल से मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों से नहीं ली गई।
मत्स्य विभाग को फर्जी सैद्धांतिक स्वीकृति पत्र जारी कर वास्तविक राशि से कम/अलग ऋण स्वीकृत करना।

नकद संवितरण और स्टॉक विवरण के बिना कैश क्रेडिट (CC) खातों का संचालन।
तीसरे पक्ष की संपत्ति पर सीसी लिमिट स्वीकृत करना, जबकि भूमि सरकारी अभिलेखों में दर्ज थी।

बिचौलियों की भूमिका
जांच में यह भी सामने आया कि कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर शाखा के अनधिकृत बिचौलियों के रूप में सक्रिय थे और नियमों को दरकिनार कर ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में शामिल थे।

पुलिस की भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बेमेतरा निरीक्षक सोनल ग्वाला, सउनि जितेन्द्र कश्यप, आरक्षक पुरुषोत्तम कुंभकार सहित समस्त पुलिस स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

यह रिपोर्ट पुलिस विभाग, बेमेतरा द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 31.07.2026) पर आधारित है।

पेपर लीक माफिया को नहीं बख्शा जाएगा, संसद ने पास किया कठोर कानून – PM मोदी का बड़ा संदेश

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नई दिल्ली – 31 जुलाई 2026

देश में लगातार हो रहे पेपर लीक से छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा संदेश दिया है। PM मोदी ने कहा कि विश्वस्त परीक्षा पद्धति के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कई दशकों से हर राज्य और केंद्र सरकार पेपर लीक की परेशानी झेल रही है। बच्चों के भविष्य को भी इसके कारण संकट पैदा हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए देशव्यापी शिक्षा पद्धति में सुधार अनिवार्य हो गया है और टेक्नोलॉजी के भरपूर उपयोग की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फिर से कोई पेपर माफिया, पेपर लीक करने वाली गैंग देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगी तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए कठोर कानूनों की जरूरत है। सरकार संसद में बिल लेकर गई थी और संसद के दोनों सदनों ने विस्तारपूर्वक चर्चा के बाद इस कठोर प्रावधानों वाले बिल को पास कर दिया है।

PM मोदी ने कहा कि विश्वस्त परीक्षा पद्धति की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण काम पूरा हुआ है। काम आगे भी चलता रहेगा। ऐसी परिस्थितियों को लंबे समय तक नहीं चलने देंगे। आइए हम सब मिलकर विकसित भारत के सपनों को पूरा करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलें।

शिव का सावन – श्रद्धा, प्रेम और प्रकृति का महीना मनभावन

अध्यात्म डेस्क – 30 जुलाई 2026

सावन हमें सिखाता है कि जैसे शिव ने विष पीकर भी सृष्टि का कल्याण किया, वैसे ही हमें भी जीवन की कठिनाइयों को सहकर सबके कल्याण के बारे में सोचना चाहिए।

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित है।

मान्यता है कि इसी महीने में समुद्र मंथन हुआ था और सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने विष का पान किया था। तभी से सावन में शिव की विशेष पूजा और जलाभिषेक का महत्व है।

सावन का आध्यात्मिक महत्व
सावन को तप और व्रत का महीना कहा जाता है। इस पूरे महीने शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ की गूंज रहती है।

सोमवार व्रत:
कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं। पुरुष भी सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए यह व्रत करते हैं।

जलाभिषेक और बेलपत्र:
मान्यता है कि सावन में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाने से सारे कष्ट दूर होते हैं। क्योंकि यह वर्षा ऋतु है और इस समय जल की अधिकता होती है, इसलिए शिव को जल अर्पित करना प्रकृति और परमात्मा के संतुलन का प्रतीक भी है।

कांवड़ यात्रा
इस महीने में लाखों कांवड़िए हरिद्वार, अमरकंटक और अन्य पवित्र नदियों से जल लेकर पैदल चलकर शिवालयों में जल चढ़ाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी अमरकंटक से लाया जल भोरमदेव और अन्य शिवधामों में चढ़ाने की परंपरा है।

सावन – प्रकृति का श्रृंगार

सावन सिर्फ धर्म का महीना नहीं, प्रकृति के उत्सव का महीना भी है। चारों ओर खेत हरे-भरे हो जाते हैं, नदियां-नाले भर जाते हैं, मोर नाचते हैं और ठंडी बौछारें मन को प्रसन्न कर देती हैं। इसीलिए हमारे लोकगीतों, कजरी और सावनी गीतों में सावन का इतना सुंदर वर्णन मिलता है। किसान के लिए यह नई फसल की आशा का महीना है, तो साहित्य के लिए प्रेम और विरह का।

इस सावन क्या करें?

इस पूरे महीने सात्विक भोजन करें और मन में पवित्रता रखें।
रोज सुबह स्नान के बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

सोमवार को व्रत रखकर शाम को शिव चालीसा और शिव पुराण का पाठ करें।
यह महीना दान-पुण्य के लिए भी उत्तम है – गरीबों को अन्न, वस्त्र का दान करें।

इस वर्ष सावन का महीना

आरंभ तिथि: 30 जुलाई 2026, गुरुवार से
समापन तिथि: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार – श्रावण पूर्णिमा

इस बार सावन में कुल 30 दिन और 4 सोमवार पड़ेंगे, जो शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं।

सावन सोमवार 2026 की लिस्ट:
पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा और अंतिम सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026।

विश्व बाघ दिवस: छत्तीसगढ़ में जागरूकता कार्यक्रमों की धूम, बाघ संरक्षण का लिया संकल्प

रायपुर -30 जुलाई 2026

वन्यजीव संरक्षण, बाघों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य सरकार
जनभागीदारी तथा आधुनिक तकनीक के समन्वय से लगातार कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।

विश्व बाघ दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा प्रदेशभर के टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों में बाघ संरक्षण एवं वन्यजीव सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और वन अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

वन मंत्री कश्यप ने कहा कि विश्व बाघ दिवस का उद्देश्य बाघों के घटते प्राकृतिक आवास और उनकी कम होती संख्या के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जंगलों और प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है तथा बाघों के अवैध शिकार और उनके अंगों के अवैध व्यापार पर प्रभावी रोक लगाना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से वनों और वन्यजीवों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि जनसहभागिता और आधुनिक तकनीक के समन्वय से बाघ संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

विभिन्न क्षेत्रों में हुए विशेष आयोजन
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के सोनहत, रामगढ़, कमर्जी, जनकपुर और रिहंद रेंज के विद्यालयों में बाघ संरक्षण की शपथ दिलाई गई। विद्यार्थियों के लिए चित्रकला एवं क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया तथा उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

जागरूकता के लिए टाइगर पेपर मास्क वितरित किए गए। वहीं संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी-स्नेर वॉक (शिकार रोधी अभियान) चलाया गया और डॉग स्क्वॉड की सहायता से सघन गश्त की गई।
उत्तर उदंती परिक्षेत्र के शासकीय हाई स्कूल बड़गांव में चित्रकला, निबंध और क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

छात्रों को वन्यजीव संरक्षण पर आधारित विशेष फिल्म दिखाई गई तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए साइकिल रैली निकाली गई।
नंदनवन जंगल सफारी, रायपुर में लाखोली एनसीसी प्रशिक्षण शिविर के लगभग 250 कैडेट्स ने शैक्षणिक भ्रमण के दौरान वन्यजीवों का अवलोकन किया और बाघ संरक्षण संबंधी जानकारी प्राप्त की।

बारनवापारा अभ्यारण्य में विद्यार्थियों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता, वृक्षारोपण अभियान तथा वन संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। एम-एसटीआरआईपीईएस (M-STrIPES) पेट्रोलिंग ऐप के माध्यम से सर्वाधिक पैदल गश्त करने वाले बीएफओ एवं सीएफओ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव-विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर है।



जल संरक्षण,पीएम आवास और स्वच्छता योजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध कार्यों पर कलेक्टर का जोर

बेमेतरा 30 जुलाई 2026

कलेक्टर ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए गुरुवार को कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जल संरक्षण, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा विभिन्न निर्माण कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई।

बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को जल संरक्षण संबंधी गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट, वॉटर बॉडी रिचार्ज, ट्रेंच निर्माण और पौधरोपण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि वर्षा जल के संरक्षण के लिए स्थायी संरचनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की समीक्षा में कलेक्टर ने वर्ष 2016 से 2023 तक के अपूर्ण एवं निर्माण योग्य नहीं रहे आवासों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं 2024 से 2026 तक स्वीकृत अपूर्ण आवासों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने, निर्माण शुरू नहीं करने वाले हितग्राहियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने तथा नए आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण से जुड़े लंबित भुगतान प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के भी निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने शौचालय निर्माण से जुड़े पात्र लंबित प्रकरणों का शीघ्र परीक्षण कर भुगतान के लिए जिला कार्यालय भेजने के निर्देश दिए। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और नियमित मैदानी निरीक्षण सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए अधिकारियों को सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के कार्यपालन अभियंता, सभी अनुविभागीय अधिकारी, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना राउंड-III के लिए जागरूकता अभियान शुरू, युवाओं को मिलेगा ₹9,000 प्रतिमाह का लाभ

बेमेतरा, 30 जुलाई 2026

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) राउंड-III के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जिले के अधिक से अधिक युवाओं का पंजीयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला महिला सशक्तिकरण केन्द्र (हब), महिला एवं बाल विकास विभाग, बेमेतरा द्वारा व्यापक जागरूकता एवं पंजीयन अभियान शुरू किया गया है। अभियान के माध्यम से पात्र युवाओं को योजना की जानकारी देकर उनका पंजीयन कराया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य देश के युवाओं को प्रतिष्ठित उद्योगों एवं संस्थानों में इंटर्नशिप का अवसर प्रदान करना है, जिससे उन्हें व्यावहारिक कार्यानुभव प्राप्त हो और उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके। योजना के तहत चयनित युवाओं को 6 से 9 माह की अवधि के लिए इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।
योजना के लिए 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे युवा पात्र हैं, जिन्होंने 10वीं या 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की हो अथवा आईटीआई, डिप्लोमा या स्नातक स्तर की पढ़ाई कर रहे हों या उसे पूर्ण कर चुके हों। विशेष रूप से ऐसे युवा, जो वर्तमान में नियमित शिक्षा या रोजगार से जुड़े नहीं हैं और कौशल विकास के माध्यम से रोजगार प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना उपयोगी साबित होगी।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार चयनित इंटर्न को प्रतिमाह ₹9,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें ₹8,100 भारत सरकार तथा ₹900 संबंधित कंपनी द्वारा दिए जाएंगे। इससे युवाओं को प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहयोग के साथ उद्योगों में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।
जिला महिला सशक्तिकरण केन्द्र (हब), महिला एवं बाल विकास विभाग, बेमेतरा द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, प्रचार-प्रसार एवं पंजीयन अभियान संचालित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक पात्र युवा इस योजना का लाभ उठा सकें।

योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी एवं ऑनलाइन पंजीयन के लिए इच्छुक युवा प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) पोर्टल अथवा जिला कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार कार्यालय, बेमेतरा से संपर्क कर सकते हैं।

मोंटेसरी स्कूल असली है या सिर्फ बोर्ड पर नाम?बच्चे की फीस भरने से पहले इन 3 बातों को जरूर जांचें

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न्यूज डेस्क/30 जुलाई 2026

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल का दौरा करते समय क्लासरूम पर ध्यान दें। क्या वहां लकड़ी के ओरिजिनल मोंटेसरी मटेरियल हैं, क्या बच्चे खुद अलमारी से सामान ले रहे हैं, क्या वहां वर्कशीट या स्टिकर चार्ट जैसी चीजें तो नहीं हैं। असली मोंटेसरी स्कूल में ये चीजें नहीं होतीं।

आजकल हर दूसरे प्राइवेट प्री-स्कूल के बोर्ड पर मोंटेसरी लिखा मिल जाता है। माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी शुरुआत के लिए मोटी फीस भी देने को तैयार रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोंटेसरी शब्द पर किसी का कॉपीराइट नहीं है।

यानी कोई भी स्कूल, चाहे वह मोंटेसरी पद्धति से पढ़ाता हो या नहीं, अपने नाम के आगे यह शब्द लगा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एडमिशन से पहले असली और नकली की पहचान की जाए।

असली मोंटेसरी स्कूल की पहचान के तीन बड़े संकेत हैं। पहला है शिक्षकों की ट्रेनिंग। असली स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास AMI या AMS जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं का सर्टिफिकेट होता है। वे अपनी ट्रेनिंग की जगह का नाम खुलकर बताते हैं।

अगर स्कूल गोल-मोल जवाब दे तो सतर्क हो जाएं। दूसरा है तीन घंटे का वर्क साइकिल। असली मोंटेसरी में बच्चों को लगातार तीन घंटे तक बिना टोके अपना काम चुनने की आजादी मिलती है।

अगर हर आधे घंटे में घंटी बजती है और विषय बदल जाता है तो वह मोंटेसरी पद्धति नहीं है। तीसरा है मिक्स्ड एज क्लासरूम। इसमें तीन से छह साल तक के बच्चे एक ही कक्षा में साथ सीखते हैं, जिससे छोटा बच्चा बड़े से सीखता है और बड़ा बच्चा लीडरशिप सीखता है।