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Friday, October 30, 2026
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पूर्व सरकारी बस ड्राइवर : घर से करोड़ों की नकदी सोना बरामद

कोलकाता/बीरभूम, 30 जुलाई

पुलिस बरामदगी के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है और मामले की जांच तेज कर दी गई है।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि यह मामला अवैध पत्थर कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन से संबंधित हो सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मीनार मंडल पहले सरकारी परिवहन निगम में बस चालक थे और बाद में स्थानीय पत्थर कारोबार से जुड़े।

एक बस चालक द्वारा सीमा से परे भ्रष्टाचार के मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के देउचा क्षेत्र में पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई के दौरान सेवानिवृत्त सरकारी बस चालक मीनार मंडल के घर से करोड़ों रुपये की नकदी और भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया है।

जांच एजेंसियां उनके कथित संबंध प्रभावशाली कारोबारी टुलू मंडल से भी खंगाल रही हैं।

पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान घर से लगभग ₹28.5 करोड़ नकद बरामद हुए। इसके अलावा करीब 15 किलोग्राम सोने के बिस्कुट और बार, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹21.5 करोड़ बताई जा रही है, भी जब्त किए गए हैं। भारी मात्रा में नकदी की गिनती के लिए कई नोट गिनने वाली मशीनों का उपयोग करना पड़ा तथा जब्त नकदी और सोने को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए बड़े लोहे के ट्रंक मंगवाए गए।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि धन और सोने के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है और अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से भी आवश्यक समन्वय किया जा रहा है ताकि बरामद संपत्ति की वैधता और उसके स्रोत का पता लगाया जा सके।

यदि जांच में अवैध कमाई या कर चोरी के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह बरामदगी हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल में नकदी और सोने की सबसे बड़ी जब्तियों में से एक मानी जा रही है।

एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पारित, दोषियों को 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का

नई दिल्ली – 30 जुलाई 2026

लोकसभा ने बुधवार को लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया पर शिकंजा कसने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

हंगामे के बीच ही मंत्री ने अपना जवाब पूरा करते हुए कहा कि सरकार को इस महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझावों की अपेक्षा थी, लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को प्राथमिकता दी।

राहुल गांधी के एक बयान को लेकर भी सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके बीच अंततः विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इस विधेयक पर सदन में लगभग 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि यह संशोधन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें वह अनुभवों से सीखकर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक बदलाव कर रही है।

अब यह विधेयक राज्यसभा में चर्चा और मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

संशोधन विधेयक के अनुसार पेपर लीक कराने, प्रश्नपत्रों के साथ छेड़छाड़ करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले दोषियों को कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं, यदि मामला संगठित अपराध या गिरोह के जरिए पेपर लीक से जुड़ा पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम सात वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक में मामलों के त्वरित निपटारे पर भी विशेष जोर दिया गया है।

इसके तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में प्रतिदिन होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।

साथ ही केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) गठित करने का अधिकार दिया गया है तथा जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह के जवाब के समय विपक्षी सांसद वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सदन में बयान देने की मांग की।


भदोही का नाम फिर होगा ‘संत रविदास नगर’, गुरु रविदास के नाम पर बनेंगे आवासीय विद्यालय: यूपी सीएम योगी

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न्यूज डेस्क 30 जुलाई 2026

भदोही का नाम फिर से ‘संत रविदास नगर’ किए जाने की घोषणा का राजनीतिक महत्व भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह निर्णय उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश देने वाला कदम है। गुरु रविदास के सम्मान से जुड़े इस ऐलान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी में आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

उन्होंने कहा कि हर सच्चे भारतीय का दायित्व है कि वह संत रविदास के समता, सद्भाव और कर्मप्रधान जीवन के संदेशों को अपने आचरण में उतारे तथा विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे।

मुख्यमंत्री ने संत रविदास घाट पर आयोजित दीपोत्सव और ‘समरसता संकल्प अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में भाग लिया तथा गुरु रविदास जन्मस्थान मंदिर में दर्शन-पूजन कर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भदोही जिले का नाम एक बार फिर ‘संत रविदास नगर’ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर उनकी पावन स्मृति को सम्मान देने के लिए इस संबंध में आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्थापित किए जा रहे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालयों की श्रृंखला के तहत एक-एक आवासीय विद्यालय संत सद्गुरु रविदास जी महाराज के नाम पर बनाया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि संत रविदास ने सामाजिक समरसता, समानता और कर्म की साधना पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया।

संत रविदास जी के आदर्श आज भी राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सौहार्द के लिए प्रेरणा देते हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में मायावती सरकार ने जिले का नाम संत रविदास नगर रखा था, लेकिन 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इसे बदलकर पुनः भदोही कर दिया था। इस फैसले को लेकर बसपा और भाजपा समय-समय पर समाजवादी पार्टी पर दलित महापुरुषों के सम्मान की अनदेखी का आरोप लगाती रही हैं।



बाल कलाकार और कमाल की गायकी – छत्तीसगढ़ ‘स्वर कोकिला’ आद्या, गायन में बनाया India Book of Records

बेमेतरा – छत्तीसगढ़ | 29 जुलाई 2026

जिले की 10 वर्षीय बाल कलाकार अरुणिमा शर्मा ‘आद्या’ ने अपनी मधुर आवाज और कड़ी मेहनत से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। 09 नवंबर 2015 को जन्मी आद्या को प्रतिष्ठित India Book of Records 2026 द्वारा “IBR ACHIEVER” के खिताब से सम्मानित किया गया है।

India Book of Records ने आद्या को कम उम्र में विभिन्न राष्ट्रीय स्तरीय गायन प्रतियोगिताओं में भाग लेने और 9 प्रमाण पत्र व 1 ट्रॉफी जीतने की उपलब्धि पर यह सम्मान दिया है। आद्या ने यह रिकॉर्ड महज 10 वर्ष 7 माह की आयु में हासिल किया है।

उनकी प्रमुख उपलब्धियों में संगीता कला अकादमी, रायपुर द्वारा आयोजित नटरंग महोत्सव में प्रथम पुरस्कार और बस्तर आइडल में द्वितीय उपविजेता का खिताब शामिल है। इसके अलावा उन्होंने YB Champ 6 में फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल किया है, जबकि राजनांदगांव मड़ई, हर घर टैलेंट सीजन 2, द सिंगिंग आइकन सीजन 2 और Phytositaare जैसे नेशनल लेवल इवेंट के फाइनल राउंड तक पहुंची हैं। कई प्रतियोगिताएं अभी भी जारी हैं।

चार भाषाओं में गायन, शास्त्रीय संगीत में भी दक्ष

इतनी कम उम्र में भी आद्या चार भाषाओं में गायन और वादन करती हैं। शास्त्रीय गायन में उन्होंने वोकल में प्रथमा (प्रथम श्रेणी) उत्तीर्ण की है। छत्तीसगढ़ी लोकगीत से लेकर देशभक्ति और सुगम संगीत तक हर विधा में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।

आद्या के छत्तीसगढ़ी लोकगीत और हारमोनियम वादन के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। उनकी प्रस्तुतियों का प्रसारण आकाशवाणी रायपुर सहित विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों और प्रतिष्ठित मंचों पर हो चुका है।

मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने की सराहना

स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उनके लाइव गायन-वादन को देखकर भरे मंच से नाम लेकर ‘नन्ही स्वर कोकिला’ की तारीफ कर आशीर्वाद दिया है।

अपनी उपलब्धि पर आद्या ने कहा, “मेरा सपना है कि एक दिन लता मंगेशकर जी की तरह देश के लिए गाऊं।”

परिजनों और गुरुजनों के अनुसार आद्या प्रतिदिन लगभग 2 घंटे रियाज़ करती हैं और बड़े होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों और संगीत प्रेमियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

किसान नेताओं और CJP की बैठक, साझा आंदोलन की रणनीति पर मंथन

न्यूज डेस्क 29 जुलाई 2026

शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, युवाओं के रोजगार समस्याओं जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए थे। अब CJP इन विषयों के साथ किसानों के मुद्दों को भी अपने अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है।

राकेश टिकैत और आशुतोष रांका सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में किसानों, युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर हुई चर्चा।

किसान नेता राकेश टिकैत और बीजेपी के आशुतोष रांका के बीच हुई बैठक से कुछ राजनीतिक गठजोड़ का समीकरण बनने का कयास लगाए जा रहे हैं जैसे किसान युवा छात्र नवजवान की जुगलबंदी।

जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और किसान नेताओं के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रमुख किसान नेता , CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका तथा दोनों संगठनों के अन्य पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए।

बैठक के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन सरकार की नीतियों को लेकर विपक्षी भूमिका निभाते हुए जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि किसानों, छात्रों और युवाओं से जुड़े विषयों पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

बैठक में मौजूद किसान नेताओं ने भी कृषि से जुड़े विषयों, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), खेती की लागत, किसानों की आय और ग्रामीण समस्याओं पर चर्चा की। वहीं CJP नेताओं ने युवाओं और छात्रों के सामने मौजूद चुनौतियों को साझा करते हुए संयुक्त जनआंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

मौजूदा मीडिया सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में संयुक्त कार्यक्रमों, जनसभाओं और आंदोलनों की संभावनाओं पर भी विचार किया।लेकिन किसान संगठनों और CJP के बीच समन्वय आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार और कृषि से जुड़े मुद्दों पर साझा अभियान देखने को मिल सकता है।


स्टुडेंट प्रोटेस्ट पर वाद विवाद – कंगना रनौत और सौरभ दास की तीखी बयानबाजी

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नई दिल्ली : 29 जुलाई 2026

इस पूरे मामले की जड़ बीजेपी सांसद कंगना रनौत का वह बयान है, जिसमें उन्होंने Gen Z प्रदर्शनकारियों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था। इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हुई और CJP प्रवक्ता ने भी प्रतिक्रिया दी।

सौरव दास सीजेपी ने सांसद कंगना के विरोधी रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उनकी अपनी पार्टी भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेती। इसी बयान के जवाब में कंगना रनौत ने पलटवार किया और बहस को व्यक्तिगत स्तर तक ले गईं।

भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत और CJP प्रवक्ता सौरव दास के बीच छात्र आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। मामला तब बढ़ा जब कंगना ने प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी की और सौरव दास ने उस पर प्रतिक्रिया दी।

कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी में सौरव दास की उम्र और उनके छात्र होने के दावे पर सवाल उठाए। इसके बाद उन्होंने अपनी उपलब्धियों का हवाला देते हुए सौरव दास पर तीखा पलटवार किया।

विवाद की वजह
इस बहस की शुरुआत कंगना के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने Gen Z प्रदर्शनकारियों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी बयान के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना की आलोचना की, और फिर जवाब में कंगना ने उन्हें “बेकार” और “बेरोजगार” कहा।

अब यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का विषय बन गया है। लोग इस पर अलग-अलग राय दे रहे हैं और विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है।

गुरुत्वहीन समाज और ऊर्ध्वमुखी गुरु: जहाँ गुरुत्वाकर्षण नहीं, वहाँ बोध नहीं

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गुरु पूर्णिमा – 29 जुलाई 2026

आज का समाज एक अजीब विरोधाभास से जूझ रहा है। एक तरफ हम भौतिक विकास के ऊंचे शिखरों को छूने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नैतिक और बौद्धिक धरातल पर समाज निरंतर ‘अधोमुखी’ (नीचे की ओर) गिरता जा रहा है।

हाल ही में उजागर हुआ नीट (NEET) पेपर लीक मामला केवल एक परीक्षा की नाकामी नहीं है, बल्कि यह हमारी पूरी शिक्षा प्रणाली के सड़ते हुए ढांचे का प्रतीक है। जब शिक्षा निजीकरण की मंडी में बिकने लगे और ज्ञान केवल पैसे से नापा जाने लगे, तब यह मान लेना चाहिए कि समाज अपना ‘गुरुत्व’ (Gravity) खो चुका है।
ऐसे पतनोन्मुख समय में प्रश्न उठना स्वाभाविक है—आज देश और समाज को किस गुरु की आवश्यकता है?

‘गुरु’ शब्द में छुपा गुरुत्वाकर्षण

‘गुरु’ केवल एक व्यक्ति या उपाधि नहीं है, गुरु शब्द स्वयं में ‘गुरुत्वाकर्षण’ की शक्ति रखता है। विज्ञान कहता है कि जहाँ गुरुत्वाकर्षण है, वहीं चीज़ें अपने केंद्र से बंधी रहती हैं, वरना वे अंतरिक्ष में दिशाहीन होकर भटक जाती हैं।

ठीक यही नियम चेतना और समाज पर लागू होता है। जहाँ विचारों में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, वहाँ गुरु का प्रभाव क्षीण हो जाता है।
आज का समाज इसलिए दिशाहीन और भ्रमित भटक रहा है, क्योंकि उसने अपने वैचारिक गुरुत्वाकर्षण को खो दिया है। हमें ऐसे गुरु की आवश्यकता है जो समाज को भटकने न दे, बल्कि उसे अपने नैतिक केंद्र से जोड़कर रखे।

अंतर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट: कड़वे सच का आघात
संत कबीर ने गुरु के स्वरूप को कुम्हार के उदाहरण से समझाते हुए लिखा था:
“गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट। अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥”

गुरु का महिमामंडन केवल उसकी मीठी-मीठी बातों या पूजा-आरती में नहीं है। आज यदि शिक्षा प्रणाली और समाज भ्रष्ट हो रहा है, तो गुरु रूपी व्यवस्था को ‘बाहर से चोट’ मारनी ही होगी।

जब जंतर-मंतर पर युवा (Gen Z) शिक्षा के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं और सत्ता को झुकना पड़ता है, तो वह ‘बाहर की वही चोट’ है जो कुम्हार अपने घड़े के विकार दूर करने के लिए मारता है। बिना ताड़ना, बिना अनुशासन और बिना वैचारिक प्रहार के कोई समाज गढ़ ही नहीं सकता। अंदर से संवेदना का सहारा और बाहर से असत्य पर कड़ा प्रहार—यही गुरु की सच्ची महिमा है।

अधोमुखी समाज में ऊर्ध्वमुखी गुरु की आवश्यकता

आज प्रकृति से लेकर शास्त्र तक हर रूप में गुरु मौजूद हैं:
सूर्य पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा देकर संचालित करता है।

धरती मौसम चक्र से हमें धैर्य सिखाती है।
माँ बच्चे को गिरकर उठना और समाज में सीना तानकर जीना सिखाती है।

श्री कृष्ण (जगतगुरु) अर्जुन को युद्धभूमि के अवसाद से निकालकर ‘कर्मयोग’ की ओर ऊर्ध्वमुखी करते हैं।

चौपाल निष्कर्ष: यदि आज का समाज और उसकी व्यवस्थाएं अधोमुखी होकर पतन की ओर जा रही हैं, तो गुरु का उत्तरदायित्व है कि वह ‘ऊर्ध्वमुखी’ हो।

गुरु वह पतवार बने जो बहते हुए पानी को चीरकर नौका को ऊपर की ओर ले जाए। बिना सही गुरु और नैतिक शिक्षा के ज्ञान प्राप्त करना ठीक वैसा ही है जैसे अंधेरे में बिना लक्ष्य के तीर चलाना।
आज गुरु पूर्णिमा पर आवश्यकता केवल फूल चढ़ाने की नहीं, बल्कि अपने अंदर उस ‘गुरुत्व’ को जगाने की है जो भ्रष्टाचार, अन्याय और अज्ञानता के खिलाफ मजबूती से खड़ा हो सके।

गुरु पूर्णिमा पर बेमेतरा में संत रविदास का स्मरण: ‘बेगमपुरा’ और सामाजिक समानता के संदेश पर हुई चर्चा

बेमेतरा- 29 जुलाई 2026

आज गुरु पूर्णिमा दिवस है।भारत में पूरे देश भर में गुरु पूर्णिमा को विशेष रूप से मनाया जा रहा है।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बेमेतरा नगर पालिका की टीम द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के मंदिर परिसर (चबूतरे) में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित नगर पालिका प्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने संत रविदास जी के चित्र पर नमन कर उनके विचारों और दर्शन को याद किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास जी का अमर संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज के दौर में भी प्रासंगिक है। उनके विचार समाज को समरसता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाते हैं।

संत रविदास के मुख्य विचार और ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना
कार्यक्रम के दौरान संत रविदास जी के प्रमुख सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया:
समरसता और पोषण: “ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न” — अर्थात एक ऐसा समाज जहाँ कोई भूखा न सोए और सभी को अधिकार मिले।

समानता: जाति-पाति और ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाकर केवल मानवता को प्राथमिकता देना।

श्रम और भक्ति: ईमानदारी की मेहनत और सच्चे मन से की गई भक्ति ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।

वक्ताओं ने संत रविदास जी द्वारा रचित ‘बेगमपुरा’ (दुख-रहित शहर) के विचार को रेखांकित करते हुए कहा कि बेगमपुरा एक ऐसे आदर्श समाज का प्रतीक है, जो जातिगत भेदभाव, शोषण और पीड़ा से पूरी तरह मुक्त हो।
इस अवसर पर विकास तंबोली,नीतू कोठारी,निशा चौबे,लक्की साहू, आकिब मलकानी समेत वार्ड वासी शामिल रहे।

जन चौपाल 36 विशेष
समाज में गुरु और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता
संगोष्ठी में वर्तमान समय में नैतिक शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज जब शिक्षा में व्यावसायिकता बढ़ रही है, ऐसे समय में संत रविदास जैसे महान गुरुओं के नैतिक और सामाजिक विचार ही समाज और युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखा सकते हैं। गुरु का स्थान समाज में सर्वोपरि है, जो अज्ञानता का अंधकार मिटाकर समानता और न्याय का मार्ग प्रशस्त करता है।


प्रदेश की खुशहाली के लिए भोरमदेव धाम में मुख्यमंत्री का भव्य पूजा‑अर्चना

रायपुर- 29 जुलाई 2026 —

मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी 30 जुलाई से पावन श्रावण मास आरंभ हो रहा है और कांवड़ यात्रा जैसी जीवंत परंपराएँ समाज में सकारात्मक ऊर्जा व सद्भाव बनाये रखने में सहायक हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं श्रीमती कौशल्या साय ने भोरमदेव धाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर विधिवत पूजा‑अर्चना की। उन्होंने मंदिर की परिक्रमा कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का गौरवशाली प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने पंच दिवसीय महा चतुर शुद्धि सहस्र
कलशम् महाअनुष्ठान में भी भाग लेकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित अनुष्ठानों में सहभागिता की और प्रदेश की उन्नति, सामाजिक सद्भाव तथा लोकमंगल की प्रार्थना की।

फाउंडेशन के अनुसार यह अनुष्ठान प्राचीन वैदिक परंपरा पर आधारित है और प्राण‑प्रतिष्ठित मंदिरों के शुद्धिकरण एवं दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार का उद्देश्य रखता है।

पिछले दो वर्षों से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक भी है।

अनुष्ठान श्री महादिव्य देशम फाउंडेशन द्वारा 25 जुलाई से कबीरधाम सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ के कल्याण की भावना से आयोजित किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक पंडरिया श्रीमती भावना बोहरा, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, वैदिक आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। फाउंडेशन के प्रमुख राजीव राकुल स्वामी ने अनुष्ठान की पद्धति और वैदिक स्रोतों के संदर्भ में जानकारी दी।

थर्मल इमेजिंग तकनीक:बस्तर के जंगलों की सुरक्षा अब हाई‑टेक नजरों के बीच

रायपुर – 29 जुलाई 2026

सुरक्षा के लिए थर्मल इमेजिंग तकनीक शरीर की ऊष्मा (हीट सिग्नेचर) को पहचानकर अँधेरे में भी मनुष्य और जानवरों की उपस्थिति का तुरंत संकेत देती है। इससे जंगलों के अंदर छिपे समूह, अवैध ढेर या गतिशील शिकारियों की वास्तविक‑समय पहचान संभव हो रही है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर वन मंडल में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए थर्मल इमेजिंग वाले ड्रोन तैनात कर दिए गए हैं। ये उच्च क्षमता वाले ड्रोन रात्रिकालीन निगरानी कर घने जंगलों में रात के अंधेरे में भी तस्करों, शिकारियों और अवैध कटाई जैसी गतिविधियों का पता लगा रहे हैं। विभाग का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से पारंपरिक पैट्रोलिंग की सीमाएँ कम हुई हैं और सुरक्षा व्यवस्था में तेज़ी आई है।

अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन के कैमरे से मिलने वाली लाइव फुटेज क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को त्वरित और सटीक जानकारी देती है, जिससे समय पर कार्रवाई व अभियानों का संचालन आसान हुआ है।

इस नई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा और अवैध कटाई तथा तस्करी पर प्रभावी रोक लगाना है। पर्यावरण अधिकारीयों ने बताया कि तकनीक के साथ-साथ इलाके में ऑन‑ग्राउंड टीमों का समन्वय बढ़ा है, जिससे कानून‑व्यवस्था मजबूत हुई है और मानव‑वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद मिल रही है।

स्थानीय वन संरक्षक और समुदाय भी इस पहल को स्वागत कर रहे हैं क्योंकि इससे गश्ती अधिक प्रभावी और सुरक्षात्मक हुई है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया कि यह कदम सुशासन और तकनीक‑आधारित संरक्षण नीतियों का हिस्सा है। राज्य सरकार आगे भी बस्तर में जैव‑विविधता और वनों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देगी, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकें।