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Friday, October 30, 2026
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अंतरराज्यीय चोर गिरोह का किया पर्दाफाश, 13.70 लाख रुपये का मशरूका सहित 5 आरोपी गिरफ्तार

बेमेतरा-3 अगस्त 2026

सायबर सेल एवं सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस की संयुक्त टीम को मिली बड़ी सफलता।कई आपराधिक प्रकरणों में संलिप्त शातिर चोर चढ़ा बेमेतरा पुलिस के गिरफ्त में।

पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन तथा दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य की सतत निगरानी में बेमेतरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सोने-चांदी के जेवरात चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है।

साइबर सेल और सिटी कोतवाली बेमेतरा की संयुक्त टीम ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी गए सोने-चांदी के जेवरात, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, टीवी, मोबाइल, नगदी, गोल्ड प्लेज कार्ड, गोल्ड लोन दस्तावेज सहित करीब 13.70 लाख रुपये का मशरूका बरामद किया है।

घटना
22 जुलाई 2026 को वार्ड क्रमांक-12 सिंघौरी, बेमेतरा निवासी पवन शाह (36 वर्ष) ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 21-22 जुलाई की मध्यरात्रि दो अज्ञात चोरों ने घर का दरवाजा तोड़कर प्रवेश किया और अलमारी में रखे लगभग 4.60 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात तथा 1 लाख रुपये नकद, कुल 5.60 लाख रुपये की चोरी कर ली। इस संबंध में थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा में बीएनएस की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

विशेष टीम का गठन
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी त्रिलोक बंसल ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना प्रभारी, साइबर सेल, डॉग स्क्वॉड एवं फॉरेंसिक टीम को जांच में लगाया। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज तथा मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पूछताछ में आरोपियों ने चोरी करना स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि चोरी की नकदी का आपस में बंटवारा किया गया। चोरी के जेवरों का एक हिस्सा राजनांदगांव स्थित ज्वेलर्स को बेच दिया गया, जबकि कुछ जेवर ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक में गिरवी रखकर 4.75 लाख रुपये का गोल्ड लोन लिया गया। चोरी की रकम से टीवी और मोबाइल भी खरीदे गए तथा कुछ राशि बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर की गई।

बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर निम्न सामग्री बरामद की—
चोरी के सोने-चांदी के जेवरात,घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल,ताला काटने की आरी एवं हुक,
टीवी और मोबाइल,गोल्ड प्लेज कार्ड एवं गोल्ड लोन दस्तावेज,नगद राशि सहित अन्य सबूत।


बरामद सामग्री की कुल कीमत करीब 13.70 लाख रुपये आंकी गई है।

गिरफ्तार आरोपी
अजय कुमार जैन (राजनांदगांव)
मोहम्मद सुमोन खान (मूल निवासी पश्चिम बंगाल)
राजेश निषाद (राजनांदगांव)
दिव्या बाई सांखला (जैन)
आदित्य जैन (ज्वेलर्स संचालक, राजनांदगांव)

आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से चार के खिलाफ पहले से चोरी, नकबजनी, आर्म्स एक्ट, जुआ और मारपीट सहित कई गंभीर अपराध दर्ज हैं।
अजय कुमार जैन – लगभग 41 मामले
राजेश निषाद – लगभग 33 मामले
मोहम्मद सुमोन खान – 7 मामले
दिव्या बाई सांखला – 11 मामले
आरोपियों के विरुद्ध पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए प्रकरण में बीएनएस की अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

न्यायालय में पेश
सभी आरोपियों को 31 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। तीन मुख्य आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। 3 अगस्त 2026 को उन्हें न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

टीम की सराहनीय भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक सोनल ग्वाला, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक मयंक मिश्रा सहित थाना एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की सराहना की।

किराएदार का पुलिस सत्यापन अनिवार्य, आदेश का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

बेमेतरा-04 अगस्त 2026

संदिग्ध गतिविधि की सूचना भी तुरंत पुलिस को देनी होगी। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश जनसुरक्षा, शांति व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

जिले में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने आदेश जारी कर मकान मालिकों के लिए किराएदारों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया है।

आदेश का उल्लंघन करने वालों पर बीएनएस 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने जिले में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और जनसुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह आदेश जारी किया है। अब कोई भी मकान मालिक संबंधित थाना प्रभारी को किराएदार की पूरी जानकारी दिए बिना मकान या भवन किराए पर नहीं देगा।

पहले से रह रहे किराएदारों की जानकारी भी तत्काल थाने में जमा करनी होगी।

आदेश के तहत किराएदार का नाम, स्थायी और वर्तमान पता, मोबाइल नंबर, वैध पहचान पत्र का विवरण तथा पहचान क्रमांक देना अनिवार्य होगा। बिना वैध पहचान पत्र के किसी को भी आवास किराए पर नहीं दिया जाएगा।


थानखम्हरिया पॉलिटेक्निक में प्रवेश का चौथा दौर, आवेदन की खिड़की बस चंद दिन बाकी

बेमेतरा _04 अगस्त 2026

शासकीय पॉलिटेक्निक थानखम्हरिया में सत्र 2026-27 के लिए कम्प्यूटर साइंस और केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्सेज़ में प्रवेश का चौथा चरण चल रहा है। तकनीकी शिक्षा में करियर बनाने की सोच रहे बेमेतरा और आसपास के छात्रों के लिए यह खबर काम की है।

खास बात यह है कि पात्रता का दायरा काफी व्यापक रखा गया है — 10वीं पास (पीपीटी के ज़रिए), आईटीआई पास और गणित विषय के साथ 12वीं पास, तीनों तरह के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। यानी यह अवसर सिर्फ एक धारा के छात्रों तक सीमित नहीं।

समय-सीमा को लेकर स्पष्टता ज़रूरी है — ऑनलाइन पंजीयन की खिड़की 8 अगस्त रात 11:59 बजे बंद हो जाएगी, इसलिए जो छात्र अब तक फैसला नहीं कर पाए हैं, उनके पास बहुत कम समय बचा है। इसके बाद 12 अगस्त शाम 5 बजे मेरिट सूची जारी होगी, जिससे चयनित छात्र आगे की प्रवेश औपचारिकताओं की तैयारी शुरू कर सकेंगे।

संस्थान का दावा है कि यहां आधुनिक लैब और अनुभवी फैकल्टी के साथ रोजगार-उन्मुख प्रशिक्षण पर ज़ोर दिया जाता है, हालांकि यह विशेष रूप से प्लेसमेंट रिकॉर्ड जैसे ठोस आंकड़ों के बजाय संस्थान के अपने बयान पर आधारित जानकारी है।

छोटे शहरों और ज़िला मुख्यालयों में ऐसे सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान अक्सर कम खर्च में तकनीकी डिग्री हासिल करने का व्यावहारिक ज़रिया बनते हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो बड़े शहरों के महंगे निजी कॉलेजों का विकल्प तलाश रहे या afford नहीं कर पाते। ज़रूरी है कि इच्छुक छात्र आखिरी तारीख का इंतज़ार करने के बजाय जल्द पंजीयन प्रक्रिया पूरी कर लें।

सावन के पहले सोमवार पर ताजमहल के गेट पर फिर टकराव, पुराना विवाद नई शक्ल में

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न्यूज डेस्क O4 अगस्त 2026

सावन का महीना शुरू होते ही आगरा में हर साल दोहराया जाने वाला विवाद इस बार भी सामने आया। पुलिस को सूचना मिली थी कि अखिल भारत हिंदू महासभा से जुड़ी करीब 11 महिलाएं श्रावण के मौके पर ताजमहल में कांवड़ लेकर प्रवेश करने की कोशिश करेंगी, जिसके बाद संगठन की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर के नेतृत्व में कार्यकर्ता पश्चिमी गेट तक पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

संगठन का कहना है कि जब स्मारक परिसर में कव्वाली हो सकती है, तो पूजा-अर्चना पर एतराज़ क्यों — यह तर्क वे बीते कई वर्षों से दोहराते आए हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि ‘तेजोमहालय’ शिव मंदिर होने का दावा कोई नया नहीं है — यह इतिहासकारों और पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आधिकारिक दस्तावेज़ों में मान्यता-प्राप्त नहीं है, और इससे जुड़े मामले अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं, जहां अब तक कोई निर्णायक फैसला नहीं आया। इसलिए इसे ‘दावा’ के तौर पर ही देखा जाना उचित होगा, तथ्य के तौर पर नहीं।

बहरहाल, कुछ दिन पहले 29 जुलाई को भी मीना राठौर कांवड़ लेकर पश्चिमी गेट पहुंची थीं, जहां सुरक्षाकर्मियों ने रोकने के बाद उन्हें गंगाजल पास के राजेश्वर महादेव मंदिर में चढ़ाने पर राज़ी किया था, जबकि इससे ठीक पहले शनिवार को मथुरा से आए कार्यकर्ताओं ने मुख्य गुंबद में गंगाजल चढ़ाने का दावा किया था यानी सुरक्षा घेरे में सेंध की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

प्रशासन का रुख स्पष्ट है — पुलिस और सीआईएसएफ हर बार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर प्रवेश रोकते आए हैं, और यह रुख इस बार भी बरकरार रहा।

लेकिन संगठन की चेतावनी है कि आने वाले हर सावन सोमवार को यह कोशिश दोहराई जाएगी। यानी अगले कुछ हफ्तों तक जब भी सोमवार आएगा, ताजमहल का पश्चिमी गेट फिर सुर्खियों में रह सकता है।

करणी सेना सवर्ण न्याय यात्रा: तनाव थमा नहीं, अब सियासी मोड़ पर चुनावी राजनीति

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न्यूज -04 अगस्त 2026

सोमवार को जयपुर में करणी सेना की 600 किलोमीटर लंबी ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ का समापन हिंसक झड़प में बदल गया — यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के विरोध में रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, बैरिकेडिंग रोकने पर धक्का-मुक्की हुई और आखिरकार पुलिस ने लाठीचार्ज व वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

राजस्थान में यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठा विवाद अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक टकराव में तब्दील होता दिख रहा है।

झड़प कलेक्ट्रेट सर्किल और खासाकोठी पुलिया के पास हुई, जहां भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों का सहारा लेना पड़ा।

आज की स्थिति देखें तो आंदोलन थमा नहीं बल्कि और तीखा हो गया है। संगठन ने घायल हुए कार्यकर्ताओं को लेकर दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग उठाई है, और साथ ही आने वाले निकाय व पंचायत चुनावों में भाजपा के बहिष्कार की शपथ भी दिलाई गई है — यानी मामला अब प्रशासनिक शिकायत से आगे बढ़कर सीधे चुनावी राजनीति से जुड़ गया है।

इसके अलावा जिला कलेक्टर के जरिए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की अपील की गई है।

राजनीतिक तौर पर देखें तो यह मुद्दा अब अकेले करणी सेना तक सीमित नहीं रहा — स्वतंत्र विधायक रविंद्र सिंह भाटी जैसे नेताओं का समर्थन मिलना बताता है कि सवर्ण समुदाय की नाराज़गी को व्यापक राजनीतिक मंच मिल रहा है।

दूसरी ओर, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यूजीसी के इन नियमों को लेकर प्रशासन और सरकार का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है — अब तक की खबरें मुख्यतः प्रदर्शनकारियों के दावों और पुलिस कार्रवाई पर केंद्रित हैं।

संगठन ने एक दिन का अल्टीमेटम दिया है, और मांगें न मानी जाने की स्थिति में मुख्यमंत्री आवास घेराव व दिल्ली के जंतर-मंतर तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी दी गई है — यानी अगले 24-48 घंटे इस मामले में निर्णायक हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट बोला— लिव-इन में भी महिला को मिलेगा 498A का कानूनी कवच

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नई दिल्ली 04 अगस्त 2026

व्यापक तौर पर यह टिप्पणी महिलाओं के अधिकारों और बदलते सामाजिक-पारिवारिक ढांचे को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नए जमाने के बदलते रिश्तों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के कानूनी अधिकारों को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को केवल इसलिए कानून की सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसका रिश्ता पारंपरिक विवाह के रूप में नहीं है।

कोर्ट के अनुसार, कुछ खास परिस्थितियों में लिव-इन से जुड़े मामलों में भी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

धारा 498A का इस्तेमाल आमतौर पर विवाहित महिला को पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से होने वाली क्रूरता और उत्पीड़न से बचाने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन लिव-इन रिलेशनशिप में इस धारा के इस्तेमाल का सवाल लंबे समय से कानूनी बहस का विषय रहा है। ऐसे मामलों में अदालत को रिश्ते की प्रकृति, दोनों पक्षों के साथ रहने की स्थिति और सामने आए आरोपों समेत कई पहलुओं की जांच करनी होती है।

कब माना जाएगा ‘विवाह की प्रकृति’ का रिश्ता
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी लिव-इन रिश्ते को ‘विवाह की प्रकृति’ का तभी माना जाएगा जब:
दोनों पक्षों के बीच शादी करने की स्पष्ट मंशा रही हो
रिश्ता लंबे समय से चला आ रहा हो और विवाह जैसा स्थापित हो चुका हो।रिश्ता पति-पत्नी की तरह के आचरण को दर्शाता हो।

ऐसी परिस्थितियों में अगर महिला के साथ क्रूरता या उत्पीड़न होता है, तो पुरुष साथी के खिलाफ धारा 498A के तहत आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

सिर्फ नाम से नहीं, हालात से तय होगा फैसला
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मामले में कानून लागू करने का फैसला केवल रिश्ते के नाम के आधार पर नहीं किया जा सकता। हर मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग परखना जरूरी होगा।

इसका मतलब यह है कि हर लिव-इन रिश्ते में धारा 498A अपने-आप लागू नहीं होगी, लेकिन जहां कानून के तहत जरूरी परिस्थितियां मौजूद हैं, वहां महिला को केवल शादी न होने की वजह से सुरक्षा से वंचित नहीं रखा जा सकता।

संबंध पर अहम है यह टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सामाजिक और कानूनी, दोनों स्तरों पर बहस तेज हुई है। आज बड़ी संख्या में लोग विवाह के बजाय साथ रहने का विकल्प चुन रहे हैं। ऐसे रिश्तों में महिलाओं को हिंसा, मानसिक प्रताड़ना या गंभीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़े तो उनके अधिकारों और कानूनी सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

कोर्ट की टिप्पणी से यह संदेश साफ है कि रिश्ते की कानूनी स्थिति के साथ-साथ उसमें शामिल महिला के साथ होने वाले व्यवहार को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

मुख्य बिंदु एक नजर में यह व्याख्या से कानूनी सुरक्षा का विस्तार धारा 498A अब सिर्फ विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं ,शर्त
रिश्ता विवाह की प्रकृति का हो और शादी की मंशा रही हो।

‘पुलिस को बेवजह सुरक्षा नहीं, पर आड़ में अपराधी को बचाव भी नहीं’ — पैलेट गन पर प्रोटोकॉल बनाएगा सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली 04 अगस्त 2026

जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है।कोर्ट ने यह भी कहा कि वह पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाना चाहता है, ताकि भविष्य में प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग की सीमाएं तय की जा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि दिल्ली सहित अन्य राज्यों की सरकारें नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (FIR) को कानून के दायरे में रहते हुए वापस ले सकती हैं या बंद कर सकती हैं। कोर्ट ने यह छूट उन्हीं छात्रों के लिए दी है जिनके खिलाफ किसी गंभीर या जघन्य अपराध का आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है।

केंद्र सरकार ने इससे पहले अदालत को बताया था कि वह 20 जुलाई को दिल्ली में हुए ‘संसद मार्च’ सहित नीट लीक के विरोध में हुए अन्य प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज न करने को लेकर गंभीर है, बशर्ते उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न हो। इसी बयान के बाद अदालत ने अपनी स्पष्ट व्यवस्था दी।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही थी। यह पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें कॉजपा (COJPA) के नेतृत्व में चले आंदोलन के दौरान पुलिस पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ ज्यादती करने का आरोप लगाया गया था।

सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने को लेकर गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उन्हें छोड़कर बाकी सभी मामलों का समाधान किया जा सकता है।

मेहता के अनुसार, गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल 2,700 से अधिक लोगों की FIR वापस नहीं ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ समन्वय के बाद सरकार दोबारा अदालत का रुख करेगी।

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के बच्चों को भी पीटा गया था।

सीजेआई की टिप्पणी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जरूरत से अधिक बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारी को बेवजह सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी गंभीर अपराधी को बचाव न मिल जाए।

जंतर-मंतर पर भी सुनवाई को सहमति
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर भी सहमति जताई, जिसमें दावा किया गया है कि दिल्ली के मध्य क्षेत्र में स्थित जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है। याचिका में कहा गया है कि वहां होने वाले प्रदर्शनों से स्थानीय निवासियों को असुविधा होती है और जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं।

अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बेटियों की सेहत को मिला सबसे बड़ा सुरक्षा कवच, 1.49 लाख किशोरियों को लगा एचपीवी टीका

रायपुर 03 अगस्त 2026

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है।
छत्तीसगढ़ में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम की दिशा में बड़ी सफलता मिली है।

केंद्र सरकार के एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान के तहत प्रदेश की 1.49 लाख से अधिक किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यह टीका भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम करने में प्रभावी माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार समय पर एचपीवी टीकाकरण और जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।

इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रदेशभर में पात्र किशोरियों तक टीकाकरण पहुंचाने के साथ-साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चला रहा है।

अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचकर किशोरियों तथा उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर के जोखिम और टीकाकरण के लाभों की जानकारी दे रही हैं।

विभाग का लक्ष्य है कि पात्र आयु वर्ग की कोई भी किशोरी जानकारी के अभाव में इस जीवनरक्षक टीके से वंचित न रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है।

किशोरावस्था में लगाया गया एचपीवी टीका संक्रमण के खतरे को कम करता है और आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर होने की संभावना भी काफी घटा देता है।

इसलिए इसे बीमारी के उपचार से अधिक प्रभावी बचाव का माध्यम माना जाता है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे 14 वर्ष की पात्र आयु वर्ग की बेटियों का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं।

आज लगाया गया यह टीका भविष्य में गंभीर बीमारी से सुरक्षा का मजबूत आधार बन सकता है। पात्र बालिकाओं के लिए एचपीवी टीका प्रदेश के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों एवं निर्धारित टीकाकरण केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है।

धरसींवा के लोगों को बड़ी राहत, अब गंभीर मरीजों को समय पर मिलेगी एम्बुलेंस-सीएम साय

रायपुर 3 अगस्त 2026

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से इस एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, सड़क दुर्घटना में घायल लोगों और अन्य आपात स्थिति के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए क्षेत्र में निःशुल्क आधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध रहेगी।

लगभग 19.65 लाख रुपये की लागत से जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा से संचालित होगी और क्षेत्रवासियों को चौबीसों घंटे सेवा देगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में यह सुविधा खासकर उन ग्रामीण इलाकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां समय पर अस्पताल पहुंचना कई बार चुनौती बन जाता है।

नई एम्बुलेंस के शुरू होने से गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक तेजी और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकेगा, जिससे आपात स्थिति में इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर नागरिक को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि मरीज के लिए शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और समय पर अस्पताल पहुंचने से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है।

धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से आधुनिक एम्बुलेंस की मांग की जा रही थी। इसी आवश्यकता को देखते हुए डीएमएफ मद से यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उनके अनुसार एम्बुलेंस शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के हजारों लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, गंभीर मरीजों तथा सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी और क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और मजबूत बनाएगी।

छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता स्व. विद्याचरण शुक्ल की जयंती मनाई गई, राजनीतिक योगदान को किया गया याद

रायपुर _02 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद द्वारा अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. विद्याचरण शुक्ल की जयंती सोमवार को स्व विद्याचरण शुक्ल उद्यान एवं शुक्ल भवन, बूढ़ापारा में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र एवं प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तथा उपस्थित लोगों ने “स्व. विद्याचरण शुक्ल अमर रहें” के उद्घोष लगाए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्व. विद्याचरण शुक्ल के लंबे और प्रभावशाली राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि वे देश और छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे।

उन्होंने कई दशकों तक संसद में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया तथा केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण, विदेश, संसदीय कार्य, गृह सहित अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभाला।

उनकी संगठन क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और जनसंपर्क की शैली ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में विशेष पहचान दिलाई।

वक्ताओं ने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण में स्व. विद्याचरण शुक्ल ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा।

विभिन्न राजनीतिक दलों में रहते हुए भी उन्होंने प्रदेश के विकास, किसानों, युवाओं और आमजन के हितों को प्राथमिकता दी। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री अमितेष शुक्ल, रमेशचंद शुक्ल, छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के महामंत्री रामअवतार देवांगन, प्रवक्ता नितिन कुमार झा, एमआईसी पार्षद अमर गिदवानी, डॉ. उदयभान सिंह चौहान, सतीश जग्गी, संजय मिश्रा, आभा मरकाम, संतोष शर्मा, शिरीष अवस्थी, विकास गुप्ता, राहुल शुक्ला, सुनील बाजारी, किशन बाजारी, सुरेन्द्र चौधरी, रवि शर्मा, राघवेन्द्र पाठक, डॉ. अजय शर्मा, विजय साहू सहित बड़ी संख्या में शुक्ल समर्थक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।