‘पुलिस को बेवजह सुरक्षा नहीं, पर आड़ में अपराधी को बचाव भी नहीं’ — पैलेट गन पर प्रोटोकॉल बनाएगा सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली 04 अगस्त 2026
जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है।कोर्ट ने यह भी कहा कि वह पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाना चाहता है, ताकि भविष्य में प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग की सीमाएं तय की जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि दिल्ली सहित अन्य राज्यों की सरकारें नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (FIR) को कानून के दायरे में रहते हुए वापस ले सकती हैं या बंद कर सकती हैं। कोर्ट ने यह छूट उन्हीं छात्रों के लिए दी है जिनके खिलाफ किसी गंभीर या जघन्य अपराध का आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है।
केंद्र सरकार ने इससे पहले अदालत को बताया था कि वह 20 जुलाई को दिल्ली में हुए ‘संसद मार्च’ सहित नीट लीक के विरोध में हुए अन्य प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज न करने को लेकर गंभीर है, बशर्ते उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न हो। इसी बयान के बाद अदालत ने अपनी स्पष्ट व्यवस्था दी।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही थी। यह पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें कॉजपा (COJPA) के नेतृत्व में चले आंदोलन के दौरान पुलिस पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ ज्यादती करने का आरोप लगाया गया था।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने को लेकर गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उन्हें छोड़कर बाकी सभी मामलों का समाधान किया जा सकता है।
मेहता के अनुसार, गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल 2,700 से अधिक लोगों की FIR वापस नहीं ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ समन्वय के बाद सरकार दोबारा अदालत का रुख करेगी।
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के बच्चों को भी पीटा गया था।
सीजेआई की टिप्पणी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जरूरत से अधिक बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारी को बेवजह सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी गंभीर अपराधी को बचाव न मिल जाए।
जंतर-मंतर पर भी सुनवाई को सहमति
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर भी सहमति जताई, जिसमें दावा किया गया है कि दिल्ली के मध्य क्षेत्र में स्थित जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है। याचिका में कहा गया है कि वहां होने वाले प्रदर्शनों से स्थानीय निवासियों को असुविधा होती है और जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं।
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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