करणी सेना सवर्ण न्याय यात्रा: तनाव थमा नहीं, अब सियासी मोड़ पर चुनावी राजनीति
न्यूज -04 अगस्त 2026
सोमवार को जयपुर में करणी सेना की 600 किलोमीटर लंबी ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ का समापन हिंसक झड़प में बदल गया — यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के विरोध में रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, बैरिकेडिंग रोकने पर धक्का-मुक्की हुई और आखिरकार पुलिस ने लाठीचार्ज व वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
राजस्थान में यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठा विवाद अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक टकराव में तब्दील होता दिख रहा है।
झड़प कलेक्ट्रेट सर्किल और खासाकोठी पुलिया के पास हुई, जहां भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों का सहारा लेना पड़ा।
आज की स्थिति देखें तो आंदोलन थमा नहीं बल्कि और तीखा हो गया है। संगठन ने घायल हुए कार्यकर्ताओं को लेकर दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग उठाई है, और साथ ही आने वाले निकाय व पंचायत चुनावों में भाजपा के बहिष्कार की शपथ भी दिलाई गई है — यानी मामला अब प्रशासनिक शिकायत से आगे बढ़कर सीधे चुनावी राजनीति से जुड़ गया है।
इसके अलावा जिला कलेक्टर के जरिए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की अपील की गई है।
राजनीतिक तौर पर देखें तो यह मुद्दा अब अकेले करणी सेना तक सीमित नहीं रहा — स्वतंत्र विधायक रविंद्र सिंह भाटी जैसे नेताओं का समर्थन मिलना बताता है कि सवर्ण समुदाय की नाराज़गी को व्यापक राजनीतिक मंच मिल रहा है।
दूसरी ओर, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यूजीसी के इन नियमों को लेकर प्रशासन और सरकार का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है — अब तक की खबरें मुख्यतः प्रदर्शनकारियों के दावों और पुलिस कार्रवाई पर केंद्रित हैं।
संगठन ने एक दिन का अल्टीमेटम दिया है, और मांगें न मानी जाने की स्थिति में मुख्यमंत्री आवास घेराव व दिल्ली के जंतर-मंतर तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी दी गई है — यानी अगले 24-48 घंटे इस मामले में निर्णायक हो सकते हैं।
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