डिजिटल डेस्क 25/03/2026
पश्चिम एशिया में यदि युद्धविराम होकर शांति की ओर बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है, तो यह न केवल संघर्षग्रस्त क्षेत्र बल्कि समूचे विश्व के लिए वरदान सिद्ध होगा। युद्ध कभी रचनात्मक परिणाम नहीं देता, केवल विनाश का मार्ग प्रशस्त करता है, जबकि शांति ही राष्ट्रों के सतत विकास का मूल आधार है।
मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग ने दुनिया में हाहाकार मचा रखा है। ऐसे में इस जंग का खत्म करने की मांग की जा रही है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते दिनों ईरान पर हमले से ब्रेक लेने की बात कही और दावा किया कि बातचीत चल रही है।(खबर सूत्रों से)
युद्ध समाप्ति के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले रोकने और बातचीत का ऐलान किया है, जिसमें 15 मुद्दों पर सहमति बन रही है – खासकर ईरान का परमाणु कार्यक्रम छोड़ना। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के मध्यस्थता प्रस्ताव पर ट्रंप ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। ईरान ने शर्तें रखीं: अमेरिकी ठिकाने बंद, प्रतिबंध हटाना, होर्मुज स्ट्रेट शुल्क।
भारत की संतुलित कूटनीति
पीएम मोदी ने लोकसभा में शांति और कूटनीति पर जोर दिया, ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर तनाव कम करने को कहा। विदेश मंत्री जयशंकर ने नागरिक सुरक्षा, ऊर्जा जरूरतें और संवाद को प्राथमिकता बताई। भारत ने विशेष नियंत्रण कक्ष बनाया, UAE-फिनलैंड ने मोदी की मध्यस्थता की सराहना की।
विपक्षी बहस और राष्ट्रीय हित
विपक्ष ने अमेरिकी झुकाव का आरोप लगाया, लेकिन सरकार ने ईरान-इजरायल दोनों से संतुलित संबंधों पर बल दिया। युद्ध से LPG-तेल संकट के बीच भारत की तटस्थता ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
पश्चिम एशिया संकट :शांति की पहल से टल सकता है? भारत की कूटनीतिक भूमिका


