जनचौपाल 36 – 29/04/2026
डिजिटल दौर में जहां लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन हो चुका है, वहीं अब सरकार भी इस बदलाव के अनुरूप नई व्यवस्था लाने की तैयारी में है। जमीन, जायदाद और पैसों की तरह अब सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल और क्रिप्टो निवेश भी “संपत्ति” माने जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार “डिजिटल वसीयत” को लेकर गाइडलाइन्स तैयार कर रही है।
अक्सर देखा गया है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार को उसके फेसबुक, इंस्टाग्राम, ईमेल या डिजिटल वॉलेट तक पहुंच पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राइवेसी कानूनों के चलते इन अकाउंट्स को सीधे परिवार को सौंपना आसान नहीं होता और कई बार कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। यही वजह है कि लंबे समय से डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट नियमों की मांग उठ रही थी।
नई प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोग अपने जीवनकाल में ही एक “डिजिटल वारिस” (Digital Heir) तय कर सकेंगे, जिसे उनकी मृत्यु के बाद इन अकाउंट्स और एसेट्स का अधिकार मिल सकेगा। इससे परिवार को बार-बार कानूनी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा और ट्रांसफर प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
आज के समय में डिजिटल एसेट्स सिर्फ यादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई लोग सोशल मीडिया, यूट्यूब, क्रिप्टो और ऑनलाइन बिजनेस से कमाई भी कर रहे हैं। ऐसे में इन एसेट्स की आर्थिक और भावनात्मक दोनों ही अहमियत बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है किडिजिटल वसीयत लागू होने से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे समय रहते अपनी डिजिटल संपत्तियों को सुरक्षित तरीके से अपने परिवार के नाम कर सकेंगे। आने वाले समय में यह व्यवस्था आम जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
डिजिटल युग में नई पहल: अब बनेगी “डिजिटल वसीयत”, मौत के बाद भी सुरक्षित रहेंगे आपके ऑनलाइन एसेट्स


