किरंदुल 01 जून 2026 (रवि सरकार) पत्रकार की कलम से
किरंदुल नगर में स्थानीय छोटे-बड़े ठेकेदारों की लगातार हो रही उपेक्षा और भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है। नगर के विभिन्न सामाजिक, व्यावसायिक और ठेकेदार वर्गों ने मांग की है कि स्थानीय ठेकेदारों को विकास कार्यों में प्राथमिकता दी जाए तथा उनके अधिकारों की अनदेखी तत्काल बंद की जाए।
वक्ताओं ने कहा कि जिस क्षेत्र की भूमि, संसाधन और जनता के सहयोग से करोड़ों रुपये की परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, उसी क्षेत्र के स्थानीय ठेकेदारों को कार्यों से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। बाहरी कंपनियां बड़े पैमाने पर काम कर रही हैं, लेकिन स्थानीय ठेकेदारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, बड़े ठेके प्राप्त करने वाली कई कंपनियां भी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी व्यक्तियों और एजेंसियों को पेटी ठेके दे रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब परियोजनाओं का प्रभाव सीधे किरंदुल और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ता है, तब स्थानीय भागीदारी को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? स्थानीय युवाओं, व्यवसायियों और ठेकेदारों को विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनाना सामाजिक और आर्थिक न्याय की मूल भावना है।
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल रोजगार या व्यवसाय का मुद्दा नहीं, बल्कि स्थानीय सम्मान, भागीदारी और अधिकारों से जुड़ा विषय है। यदि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को ही अवसरों से दूर रखा जाएगा, तो विकास का वास्तविक लाभ स्थानीय समाज तक नहीं पहुंच पाएगा।
स्थानीय मांग है की सभी निर्माण एवं विकास कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, कार्य आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए तथा स्थानीय हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि समय रहते इस विषय पर सकारात्मक पहल नहीं की गई और स्थानीय ठेकेदारों को न्यायोचित अवसर नहीं मिले, तो लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कंपनियों और प्रशासन की होगी।
प्रमुख मांगें
- स्थानीय ठेकेदारों को कार्य आवंटन में प्राथमिकता दी जाए।
- बाहरी कंपनियों द्वारा स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- पेटी ठेकों में स्थानीय लोगों को अवसर दिया जाए।
- कार्य आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
- स्थानीय हितों की अनदेखी और भेदभावपूर्ण रवैये पर रोक लगाई जाए।
“किरंदुल के संसाधनों पर पहला अधिकार किरंदुल के लोगों का है। विकास में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित करना ही वास्तविक सामाजिक न्याय है।”


