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Friday, June 5, 2026

छत्तीसगढ़ में नशा मुक्ति केंद्र से ज्यादा नशा नियंत्रण जरूरी — नशे के खिलाफ असली लड़ाई तभी शुरू होगी

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रायपुर, 21 मई 2026


जशपुर में 170 लोग नशा मुक्ति केंद्र से लाभान्वित हुए — यह खबर राहत देती है। लेकिन एक सवाल मन को कचोटता है:

जब घर में आग लगी हो, तो क्या सिर्फ अस्पताल बनाना काफी है — या आग बुझाना भी जरूरी है?


केंद्र बनते हैं, लेकिन नशा बिकता रहता है

सरकार पुनर्वास केंद्र खोलती है, करोड़ों खर्च होते हैं, परिवार टूटते हैं — और दूसरी तरफ शराब की दुकानें सरकारी लाइसेंस पर धड़ल्ले से चलती रहती हैं।

छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग हर साल अरबों रुपये का राजस्व कमाता है। यानी एक तरफ सरकार नशे से होने वाली तबाही को “ठीक” करने में पैसा लगाती है — दूसरी तरफ उसी नशे को लाइसेंस देकर पैसा कमाती भी है।

यह दोहरापन समाज के साथ सबसे बड़ा धोखा है।


सरकारी नियंत्रण — जो होना चाहिए, होता नहीं

❌ स्कूल-कॉलेज के पास शराब दुकानें बंद होनी चाहिए — नहीं होतीं

❌ रात 10 बजे के बाद बिक्री बंद होनी चाहिए — नियम है, पालन नहीं

❌ नाबालिगों को शराब नहीं मिलनी चाहिए — रोज मिलती है

❌ गुटखा-तंबाकू पर सख्त पाबंदी होनी चाहिए — विज्ञापन आज भी चलते हैं


समाज को भी उठानी होगी आवाज

सरकार तभी हिलती है जब समाज बोलता है।

  • महिला मंडल, युवा संगठन और पंचायतें शराब दुकानों का विरोध करें
  • शिक्षक और अभिभावक नशे के खिलाफ स्कूलों में माहौल बनाएं
  • मीडिया सिर्फ पुनर्वास की खबरें न छापे — नशे की जड़ों पर भी सवाल उठाए

पुनर्वास केंद्र जरूरी है — पर अधूरा इलाज है

नंद कुमार सिंह और उनकी टीम की मेहनत को सलाम। 170 लोगों की जिंदगी बदलना छोटी बात नहीं।

लेकिन जब तक नशे की आपूर्ति पर लगाम नहीं लगेगी — 170 की जगह 1700 लोग इन केंद्रों में आते रहेंगे।

इलाज के साथ-साथ रोकथाम — यही असली नशा मुक्ति है।


📞 जशपुर नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क: +91-8103110460
— लेकिन साथ ही अपने जनप्रतिनिधि से भी पूछिए: नशे पर लगाम कब लगेगी?

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