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Tuesday, July 21, 2026

आशा भोंसले: सुरों की मल्लिका का एक युग समाप्त विनम्र श्रद्धांजलि

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बॉलीवुड डेस्क/मुंबई-12/04/2026



भारतीय संगीत की ‘वर्सेटाइल क्वीन’ आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी जादुई आवाज सदियों तक गूँजती रहेगी। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने संगीत के एक स्वर्ण युग का समापन कर दिया है।

संगीत में कदम और पहला गाना
आशा जी का जन्म 1933 में हुआ था। पिता दीनानाथ मंगेशकर के निधन के बाद, परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने बहुत कम उम्र में गाना शुरू कर दिया था।पहला गाना:

उन्होंने 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के लिए अपना पहला गीत ‘चला चला नव बाळा’ गाया।

प्लेबैक सिंगर के रूप में शुरुआत:हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला बड़ा ब्रेक 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने “सावन आया” से मिला। उस समय उनकी दीदी लता मंगेशकर और अन्य दिग्गज गायिकाओं का बोलबाला था, इसलिए आशा जी को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा।

सफलता का ‘पीक टाइम’ और सुपरहिट सफर
आशा जी का असली उत्थान 1950 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ।
निर्णायक मोड़:संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की दुनिया बदल दी। फिल्म ‘नया दौर’ (1957) की सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वर्सेटिलिटी:
जहाँ अन्य गायिकाएं केवल शास्त्रीय या गंभीर गीतों तक सीमित थीं, आशा जी ने कैबरे, गजल, पॉप, और कव्वाली हर विधा में महारत हासिल की।

सबसे सुपरहिट गाना:
वैसे तो उनके हजारों गाने हिट हैं, लेकिन “दम मारो दम (हरे रामा हरे कृष्णा) एक ऐसा गाना था जिसने उन्हें ग्लोबल आइकन बना दिया। इसके अलावा ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘चुरा लिया है तुमने’ और ‘इन आँखों की मस्ती के’ जैसे गीत आज भी हर जुबान पर रहते हैं।

वैवाहिक जीवन और पंचम दा (आर.डी. बर्मन)
आशा जी का निजी जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। 16 साल की उम्र में उन्होंने गणपतराव भोंसले से शादी की थी, जो सफल नहीं रही। उनके तीन बच्चे हुए: **हेमंत, वर्षा और आनंद।

पंचम दा के साथ रिश्ता:
1980 में उन्होंने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से शादी की। यह जोड़ी संगीत और प्रेम दोनों के मामले में बेमिसाल थी।

खुशहाल जीवन:
पंचम दा के साथ उनका जीवन बेहद रचनात्मक और खुशहाल रहा। दोनों ने मिलकर संगीत के नए प्रयोग किए। 1994 में पंचम दा के निधन तक वे एक-दूसरे के सबसे बड़े सहारे रहे।

सामाजिक सरोकार और व्यक्तित्व
आशा जी केवल एक गायिका नहीं, बल्कि एक परोपकारी व्यक्तित्व भी थीं।उन्होंने कई चैरिटी शो किए और संगीत के माध्यम से समाज सेवा से जुड़ी रहीं। वह एक बेहतरीन कुक (रसोइया) भी थीं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘Asha’s’ नाम से रेस्टोरेंट चेन शुरू की, जिससे उन्होंने भारतीय संस्कृति और स्वाद को दुनिया भर में फैलाया।

युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए उन्होंने हमेशा रियलिटी शो और मंचों के माध्यम से नए गायकों का मार्गदर्शन किया।

खबर निष्कर्ष:
आशा भोंसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाकर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराया। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे भरना नामुमकिन है। उनकी आवाज की खनक हमेशा हमें उनकी याद दिलाती रहेगी।

आशा भोंसले जी के निधन की खबर संगीत जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वह केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत का एक पूरा अध्याय थीं।
विनम्र श्रद्धांजलि!🙏

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