ब्लू अम्ब्रेला डे’ के अवसर पर संस्था ‘बटरफ्लाइज’ ने लड़कों के साथ होने वाली यौन हिंसा के खिलाफ छेड़ी मुहिम; ‘मर्दानगी’ की गलत धारणाओं को बताया बड़ी बाधा।
नई दिल्ली | 16 अप्रैल, 2026
दुनिया भर में बाल यौन शोषण को लेकर अक्सर लड़कियों की सुरक्षा पर चर्चा होती है, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि हर 6 में से 1 लड़का यौन शोषण का शिकार होता है। भारत में भी आंकड़े इसी भयावहता की ओर इशारा करते हैं। इस गंभीर लेकिन छिपे हुए मुद्दे को समाज के सामने लाने के लिए 16 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘ब्लू अम्ब्रेला डे’ (BUD) मनाया जा रहा है।
भारत में इस अभियान का नेतृत्व संस्था ‘बटरफ्लाइज” कर रही है, जो ‘फैमिली फॉर एवरी चाइल्ड’ (FFEC) नामक वैश्विक गठबंधन का हिस्सा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लड़कों के यौन शोषण से जुड़ी चुप्पी को तोड़ना और समाज को यह अहसास दिलाना है कि लड़कों को भी उतनी ही सुरक्षा और देखभाल की जरूरत है जितनी लड़कियों को।
अध्ययन के चौंकाने वाले खुलासे: ‘ब्रेकिंग द साइलेंस’
हाल ही में भारत, फिलीपींस, कंबोडिया और नेपाल में किए गए एक अनुभवजन्य अध्ययन (Empirical Study) में सामने आया है कि समाज में यह गलत धारणा व्याप्त है कि यौन हिंसा सिर्फ लड़कियों के साथ होती है। लड़कों के मामले में इसे अक्सर ‘विचलन’ मानकर अनदेखा कर दिया जाता है।
मर्दानगी का बोझ: समाज लड़कों को ‘मजबूत, बहादुर और अपनी रक्षा खुद करने वाला’ मानता है। इस कारण, जब किसी लड़के का शोषण होता है, तो उसे ‘कमजोर’ मानकर शर्मिंदा किया जाता है, जिससे वह चुप रहने पर मजबूर हो जाता है।
पहचान वाले ही अपराधी: बटरफ्लाइज के ‘ब्रेकिंग द साइलेंस’ अध्ययन के अनुसार, अधिकांश मामलों में अपराधी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़ित के करीबी रिश्तेदार, पड़ोसी या परिचित ही होते हैं।
मिथक बनाम हकीकत: यह धारणा भी गलत साबित हुई कि केवल पुरुष ही शोषण करते हैं; अध्ययन में पाया गया कि महिलाएं और बड़े लड़के भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
कानूनी स्थिति और चुनौती
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 2007 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 53.22% बच्चों ने यौन शोषण का सामना किया, जिनमें लड़कों का प्रतिशत 52.94% था। इसी रिपोर्ट के आधार पर 2012 में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम लाया गया, जो लिंग-तटस्थ (Gender Neutral) है और लड़कों-लड़कियों दोनों को समान सुरक्षा देता है। हालांकि, सामाजिक शर्म और अविश्वास के कारण लड़कों के मामलों की रिपोर्टिंग अभी भी बहुत कम है।
विशेषज्ञ की राय
बटरफ्लाइज की निदेशक रीता पनिकर ने कहा:
“हमें बच्चों के यौन शोषण से संबंधित अपनी सोच बदलने की जरूरत है। यौन हिंसा का शिकार लड़के और लड़कियां दोनों होते हैं। ‘ब्लू अम्ब्रेला डे’ के माध्यम से हम इस चुप्पी को तोड़ना चाहते हैं ताकि लड़कों को भी वह सुरक्षा और मार्गदर्शन मिल सके जिसके वे हकदार हैं।”
अभियान की गतिविधियाँ
इस वर्ष बटरफ्लाइज ने जन-जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष गीत तैयार किया है और सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान शुरू किया है। संस्था का लक्ष्य एक ऐसी सार्वजनिक चर्चा शुरू करना है जो ‘मर्दानगी’ के पुराने मानदंडों को चुनौती दे सके और बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बना सके।


