डिजिटल डेस्क(जनचौपाल 36)_24 मार्च 2026
प्रदेश में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2026 से नई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति लागू की जा रही है, जिसके तहत कचरा निपटान के नियम पहले से अधिक सख्त होंगे। इस नई व्यवस्था में आम नागरिकों से लेकर बड़े संस्थानों और आयोजकों तक सभी की जिम्मेदारी तय की गई है। नियमों का पालन नहीं करने पर अब मौके पर ही जुर्माना (ऑन-द-स्पॉट फाइन) लगाया जाएगा, जिससे व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
नई नीति के अनुसार प्रत्येक घर और संस्थान को कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण करना अनिवार्य होगा। कचरे को चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष कचरा—में अलग-अलग रखना होगा। ऐसा नहीं करने पर 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। प्रशासन का मानना है कि इससे कचरे के वैज्ञानिक निपटान और रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, 100 से अधिक लोगों वाले किसी भी आयोजन के लिए अब संबंधित नगर निगम या स्थानीय निकाय को कम से कम तीन दिन पहले सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर आयोजकों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य बड़े आयोजनों से उत्पन्न होने वाले कचरे को व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित करना है।
सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले वेंडरों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब चाट, पकौड़े, सब्जी आदि बेचने वाले विक्रेताओं को अपने पास डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा और कार्य समाप्ति के बाद कचरा इधर-उधर फेंकने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें कचरा केवल नगर निगम के निर्धारित स्थान या वाहन में ही डालना होगा।
नई नीति में बड़े कचरा उत्पादकों जैसे आवासीय सोसाइटी, होटल, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें अपने स्तर पर ही कचरे का निपटान या प्रोसेसिंग करना होगा। साथ ही, कचरा बीनने वालों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने के लिए उनका पंजीकरण कर पहचान पत्र और वर्दी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
जन जागरूकता
प्रशासन का मानना है कि इन सख्त प्रावधानों के जरिए न केवल शहरों की स्वच्छता बेहतर होगी, बल्कि लोगों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी और स्वच्छ भारत अभियान को नई गति मिलेगी।
1 अप्रैल से कचरा प्रबंधन के सख्त नियम लागू, ऑन-द-स्पॉट जुर्माने का प्रावधान


