बेमेतरा, 21 मार्च 2026
अक्सर कहा जाता है कि शरीर का द्वार मुँह होता है, और यदि द्वार ही अस्वस्थ हो, तो भीतर का स्वास्थ्य कभी सुरक्षित नहीं रह सकता। इसी महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विश्व मुख स्वास्थ्य दिवस (20 मार्च) के अवसर पर बेमेतरा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पहल सराहनीय है। “A Happy Mouth is a Happy Life” (स्वस्थ मुँह, खुशहाल जीवन) की वैश्विक थीम पर आधारित इस वर्ष के कार्यक्रमों ने न केवल बच्चों को जागरूक किया, बल्कि समाज के सामने मुख स्वास्थ्य की अनदेखी से होने वाले गंभीर खतरों का खाका भी खींचा।
बेमेतरा के विभिन्न स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित शिविरों में 288 बच्चों का परीक्षण महज एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस पीढ़ी को तैयार करने की कोशिश है जो बचपन से ही ‘ओरल हाइजीन’ के महत्व को समझेगी। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से आयोजित इन शिविरों में बच्चों को ब्रश करने के सही तरीके से लेकर तंबाकू के दुष्प्रभावों तक की जानकारी दी गई।
अनदेखी की भारी कीमत
मुँह के स्वास्थ्य को अक्सर हम सामान्य मानकर टाल देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी डराने वाली है। मसूड़ों की सूजन, दाँतों की सड़न या मुँह का कम खुलना केवल स्थानीय समस्याएं नहीं हैं।खबर की दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि मुख स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारे समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में मुख रोगों की अनदेखी कुपोषण, समयपूर्व प्रसव और नवजात में जन्मजात विकृतियों जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकती है। यह तथ्य बताता है कि एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मुख स्वास्थ्य की जागरूकता कितनी अनिवार्य है।
कैंसर की दस्तक और तंबाकू का जाल
शिविर में मुख कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों—जैसे दो सप्ताह से अधिक पुराने छाले, सफेद चकत्ते या मुँह का कम खुलना—पर जो जोर दिया गया, वह आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। तंबाकू की लत ने न केवल युवाओं को अपनी चपेट में लिया है, बल्कि यह मुख कैंसर का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। बेमेतरा जिला चिकित्सालय में स्थापित ‘तंबाकू नशा मुक्ति केंद्र’ जैसी सुविधाएं इस लड़ाई में एक मजबूत हथियार हैं।
खबर सार जनचौपाल 36
सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर का यह कहना कि यह ‘साल भर चलने वाले अभियान की शुरुआत है’, एक सकारात्मक संकेत है। मुख स्वास्थ्य के प्रति यह जागरूकता केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हर छह महीने में दंत परीक्षण की आदत और तंबाकू मुक्त जीवन की संकल्पना ही “स्वस्थ मुँह, खुशहाल जीवन” के सपने को साकार कर सकती है। बेमेतरा का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा है कि कैसे जमीनी स्तर पर बच्चों और शिक्षकों को जोड़कर एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखी जा सकती है।
स्वस्थ मुँह, खुशहाल जीवन’ – केवल नारा नहीं, समग्र स्वास्थ्य का आधार


