न्यूज छत्तीसगढ़ -11 जून 2026
छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून आने से पहले ही जलाशयों की स्थिति बेहद उत्साहजनक है। जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई जलाशयों में अभी से 52 प्रतिशत से अधिक जल भंडारण हो चुका है। यह स्थिति पिछले दो वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर है और किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर है।
कितना पानी है जलाशयों में?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में कुल 3329.41 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध है जो कुल भंडारण क्षमता का 52.35 प्रतिशत है। राज्य के 12 प्रमुख जलाशयों में 54.60 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा मात्र 31.56 प्रतिशत था और वर्ष 2024 में केवल 26 प्रतिशत। यानी इस वर्ष जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में करीब दोगुना है।
कौन से बांध सबसे भरे हुए हैं?
राज्य के कई प्रमुख जलाशय इस समय बेहतरीन स्थिति में हैं —मुरूमसिल्ली जलाशय (धमतरी) — 81.50 प्रतिशत, सबसे अधिक भरा।छिरपानी जलाशय (कबीरधाम) — 75.64 प्रतिशत।मनियारी जलाशय (मुंगेली) — 75.61 प्रतिशत।दूधावा जलाशय (कांकेर) — 74.70 प्रतिशत।झुमका जलाशय(कोरिया) — 71.29 प्रतिशत।
सबसे बड़े बांध मिनीमाता बांगो का हाल
राज्य के सबसे बड़े जलाशय मिनीमाता बांगो में 56.19 प्रतिशत जलभराव है। पिछले वर्ष इसी समय यहाँ मात्र 25.64 प्रतिशत पानी था। इसी तरह रविशंकर सागर (गंगरेल) में 48.97 प्रतिशत, खरंग में 64.59 प्रतिशत और सोंढूर में 62.65 प्रतिशत जलभराव दर्ज है।
मध्यम जलाशयों की स्थिति भी बेहतर
राज्य के 34 मध्यम जलाशयों में 40.33 प्रतिशत जलभराव है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 28.83 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 26.48 प्रतिशत था। इस प्रकार मध्यम जलाशयों की स्थिति भी पिछले दो वर्षों से बेहतर है।
किसानों और आम लोगों के लिए क्या मायने?
जलाशयों में पर्याप्त जलभराव का सीधा असर खेती, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर पड़ता है। जब बांध भरे होते हैं तो —सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलता है जिससे फसल उत्पादन बढ़ता है।पेयजल संकट की संभावना कम होती है।जलविद्युत उत्पादन बेहतर होता है जिससे बिजली की उपलब्धता बढ़ती है।
भूजल स्तर भी ऊपर उठता है जिससे हैंडपंप और कुएं रिचार्ज होते हैं
आगे और बारिश आने वाली है
मौसम विभाग के अनुसार आज 11 जून से छत्तीसगढ़ में मानसून दस्तक दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में जलाशयों में और अधिक जलभराव होने की उम्मीद है। यदि मानसून सामान्य रहा तो इस बार राज्य में जल संकट की स्थिति न के बराबर रहेगी।


