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Tuesday, July 21, 2026

100 ज़िलों में डीएपी के अत्यधिक इस्तेमाल पर केंद्र की नजर, छत्तीसगढ़ से एकमात्र बेमेतरा शामिल

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बेमेतरा – 12/05/2026

देश भर के 100 जिलों में 6डी.ए.पी. के अत्यधिक उपयोग करने वालों में बेमेतरा शामिल, किसानों को जैविक एवं संतुलित खेती के लिए किया जा रहा प्रेरित।केंद्र द्वारा विशेष अभियान शुरू किया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने देश के उन 100 जिलों की सूची जारी की है जिसमें बेमेतरा जिले ने वर्ष 2025 में 27 हजार 381 मीट्रिक टन डीएपी की खपत की है, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रही।

इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जिले में 31 मई से 27 जून 2026 तक “संतुलित उर्वरक उपयोग विशेष जागरूकता अभियान” शुरू किया है। अभियान के तहत कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव में प्रशिक्षण, कृषक संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार जिले की कृषि भूमि में फास्फोरस और पोटाश की मात्रा मध्यम से अधिक है, जबकि नत्रजन और जैविक कार्बन की मात्रा कम पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीएपी के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, इसलिए अब वैज्ञानिक खेती पर जोर दिया जा रहा है।

इसी कड़ी में विकासखंड बेमेतरा के ग्राम पंचायत लालपुर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि तकनीक अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) जबलपुर से पहुंचे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने किसानों को फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और उनकी कमी के लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।

कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक तोषण कुमार ठाकुर ने किसानों को डीएपी और यूरिया के विकल्प के रूप में अन्य उर्वरकों की जानकारी दी। उन्होंने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को भी प्रभावी बताया। वहीं वैज्ञानिक डॉ. श्रावणी सान्याल ने असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक किया।

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धति पर भी चर्चा की गई। अंत में किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा के दौरान किसानों की समस्याओं और तकनीकी सवालों का समाधान वैज्ञानिक डॉ. रजनी डी. अगाशे,वैज्ञानिक डोमन सिंह टेकाम,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी वी.के. टंडन द्वारा बताई गई।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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