आजीविका के अवसर और पर्यटन प्रगति की ओर बढ़ता भारत
दिल्ली 25 जून 2026 —
देश के लिए अब पर्यटन केवल यात्रा का साधन नहीं रह गया, यह आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक आदान-प्रेषण का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। पिछले दशक में प्रभावशाली नीतिगत पहलों और बुनियादी ढांचे के निवेश के चलते—स्वदेश दर्शन, प्रसाद और स्वदेश दर्शन 2.0 समेत—पर्यटन ने क्षेत्रीय निवेश, स्थानीय उद्यमिता और समावेशी विकास को नया आयाम दिया है।
वर्ष 2014 से 2025 तक दर्ज किए गए लाखों अंतर्राष्ट्रीय आगमन और विदेशी पर्यटक देश की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष योगदान के साथ होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और आतिथ्य क्षेत्रों के लिये रोजगार के व्यापक अवसर पैदा कर रहे हैं।
सरकार की रोड, रेल और हवाई कनेक्टिविटी सुधार, डिजिटल पहलें जैसे ई-पर्यटक वीजा और प्लेटफॉर्म-आधारित पंजीकरण व्यवस्था, तथा लक्षित गंतव्य विकास ने पर्यटन को “विकसित भारत@2047” के राष्ट्रीय विजन का सहायक स्तंभ बनाया है।
साथ ही, ओवरटूरिज्म से निपटने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये ट्रैवल फॉर लाइफ, चुनौती-आधारित गंतव्य विकास तथा इको- और आध्यात्मिक पर्यटन परियोजनाएं उभरते और कम-प्रचलित स्थलों में निवेश आकर्षित कर रही हैं।
मामल्लापुरम जैसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त गंतव्य और प्रसाद के माध्यम से किए गए तीर्थस्थल आधुनिकीकरण ने दर्शाया है कि जिम्मेदार प्रबंधन से सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका एक साथ सुधर सकती हैं, जिससे पर्यटन भारत के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक पुनर्निर्माण में निर्णायक योगदान देने लगा है।
पर्यटन से व्यक्तियों, समाज और राष्ट्र को व्यापक और कई-आयामी लाभ मिलते हैं: व्यक्तिगत स्तर पर यह लोगों को आय के नए स्रोत, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता देता है—होटल, गाइडिंग, हस्तशिल्प और ट्रांसपोर्ट जैसे छोटे उद्यम जीविकोपार्जन के अवसर पैदा करते हैं; सामाजिक स्तर पर यह स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और हस्तशिल्प को संरक्षित और पुनर्जीवित करता है।
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