“यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए कोई शुल्क नहीं, व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन रहेंगे निःशुल्क”
09 अगस्त 2026, PIB भोपाल
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई उपयोगकर्ताओं को किसी भी लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं देना होगा और सभी पी2पी (व्यक्ति-से-व्यक्ति) लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन मुफ्त रहेंगे; यदि भविष्य में एमडीआर लागू होता है, तो वह केवल एक तय सीमा से ऊपर के सीमित व्यापारी लेनदेन पर, नाममात्र दर पर लगेगा—जो डेबिट-क्रेडिट कार्ड एमडीआर से काफी कम होगा।
पीएसएस अधिनियम में संशोधन क्यों
संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बाद भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन प्रस्तावित है। इसके बाद एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली “यूपीआई और सेवा संचालन समिति” एमडीआर पर निर्णय लेगी। सरकार के अनुसार यह कदम यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी उन्नयन, साइबर सुरक्षा और बाजार प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए जरूरी है, क्योंकि केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना व्यवहार्य नहीं है।
बाहरी दबाव की अटकलें खारिज
सरकार ने इन दावों को निराधार बताया कि बाहरी प्रभाव इस नीतिगत बदलाव को प्रेरित कर रहे हैं। सरकार ने कहा कि 2016 में यूपीआई लॉन्च करना और जनवरी 2020 से इसे निःशुल्क रखना इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
आंकड़ों में यूपीआई की ताकत
2016-17 में शुरू हुआ यूपीआई अब दुनिया की सबसे बड़ी रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है। अकेले जुलाई 2026 में इसने ₹29.9 लाख करोड़ मूल्य के 2,366 करोड़ लेनदेन संसाधित किए और यह 11 विदेशी देशों में भी सक्रिय है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल वित्त मंत्रालय, आरबीआई और एनपीसीआई की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और भ्रामक संदेश आगे न बढ़ाएं।
- Advertisement -
- Advertisement -