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Wednesday, September 16, 2026

41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण: राज्यपाल रमेन डेका

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अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह

रायपुर 16 सितंबर 2026

राज्यपाल रमेन डेका ने संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रायगढ़ की धरती पर 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का सोमवार को महाराजा चक्रधर की तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। 14 से 23 सितंबर तक रामलीला मैदान में आयोजित इस समारोह में देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी।

शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया, जिनमें पद्मश्री डॉ. उषा बारले, पद्मश्री अनुज शर्मा सहित कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्य शामिल थे। राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया और उनकी कृतियां ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ तथा ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ, करमा जैसी लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि चक्रधर समारोह सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि महाराजा चक्रधर सिंह का जन्म 19 अगस्त 1905 को हुआ था और उन्होंने भारतीय कला-संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने महाराजा की रचनाओं के संरक्षण-प्रकाशन का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा है, जिस पर प्रधानमंत्री ने विशेष रुचि दिखाई है।
लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। महापौर जीवर्धन चौहान ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत करते हुए जिला-पुलिस प्रशासन, आयोजन समिति व रायगढ़वासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और मीडिया के सहयोग के लिए आभार जताया।
समारोह की पहली शाम की शुरुआत रामलीला मैदान में गणेश वंदना से हुई, जिसे वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पिछले वर्ष समारोह ने अपने 40 वर्ष पूरे किए थे और अब 41वां समारोह नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।
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