ट्रैक्टर मॉडल से अबूझमाड़ के बीहड़ों में पहुँची विकास की नई उम्मीद
नारायणपुर —24 जुलाई 2026 —
छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर परिक्षेत्र में घने जंगलों और कठिन पहाड़ियों में बसा अबूझमाड़ वर्षों तक खाद्य सुरक्षा से वंचित रहा, कई गांवों को राशन पाने के लिए 40–50 किलोमीटर की थकाऊ पैदल यात्रा करनी पड़ती थी और मानसून में कई स्थान बाहरी दुनिया से कट जाते थे।
दुर्गम रास्तों पर ट्रैक्टर बना जन-सेवा का सारथी
ऐसी ही चुनौतियों को देखते हुए नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक सरल पर प्रभावी पहल शुरू की — पारंपरिक ट्रांसपोर्ट की सीमाओं को तोड़ते हुए मुख्य गोदामों से सीधे ट्रैक्टरों के माध्यम से 35 किलोग्राम चावल व आवश्यक खाद्यान्न सुदूर गांवों तक पहुँचाने का नया पीडीएस मॉडल लागू किया गया।
ओरछा क्षेत्र के थुलथुली, गोमागाल, मुरूमवाड़ा, आदेर, जाटलूर, जटवर, बालेबेड़ा, हांदावाड़ा और पीडियाकोट जैसे गाँवों में अब बड़े ट्रकों के न पहुँच पाने वाले रास्तों पर ट्रैक्टरों ने आसान पहुँच सुनिश्चित की है; मानसून से पहले तीन से चार महीने का अनाज अग्रिम सुरक्षित कराया गया है, प्रत्येक ग्राम पंचायत पर नए पीडीएस भवन बनाये गए और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई।
राशन कार्ड बना अधिकार का सशक्त प्रतीक
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि जब पहली बार राशन से लदा ट्रैक्टर उनके गाँव पहुँचा तो केवल अनाज ही नहीं, बल्कि सरकार का भरोसा और सम्मान भी उनके घर आया; यह पहल नागरिकों के समय, श्रम और आत्म-सम्मान की रक्षा करते हुए राशन कार्ड को एक सशक्त अधिकार के रूप में स्थापित करती है।
नारायणपुर का ट्रैक्टर-आधारित मॉडल केवल आपूर्ति व्यवस्था नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और अंतिम व्यक्ति तक पहुँच के सरकारी संकल्प का जीता-जागता प्रमाण है — बतौर संदेश यह साबित करता है कि इरादे बुलंद हों तो नवाचार से दुर्गम बाधाएँ भी पार की जा सकती हैं।
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