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Thursday, July 23, 2026

बारिश में सीजेपी आंदोलन दिल्ली में: पीएम ने कहा दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

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डिजिटल डेस्क 22 जुलाई 2026

न्यूज हाईलाइट्स-

NEET पेपर लीक विवाद: राहुल गांधी ने किया पीएम आवास का घेराव और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए हिरासत में।

NEET पेपर लीक ‘घोर पाप’, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं; दोषियों को मिलेगी सख्त सजा: पीएम मोदी

NEET परीक्षा को ही खत्म करो… CJP प्रोटेस्ट के बीच थलपति विजय की मांग।

CJP ने सरकार को दी चेतावनी, कहा- मांगें नहीं मानीं तो लाखों युवा दिल्ली आएंगे।

चर्चा स्थान: बाड़े की बरवट ➔ गाँव की गुड़ी
(मूसलाधार बारिश। ज्योतिपति आराम कुर्सी पर अख़बार पढ़ रहे हैं। ज्वाला आता है, अपनी छतरी बंद कर बाजू में रखता है और बैठता है।)

ज्वाला: कल जो संसद और सड़कों पर हुआ, उस पर आपकी क्या राय है? नज़ारा कुछ अलग ही था!

ज्योतिपति: (अख़बार झुकाकर) जो ज़्यादा समझदार होता है, उसको राय नहीं दी जाती… बात राय की नहीं, सियासी बिसात की है।
ज्वाला: तो यहाँ बैठकर पानी गिरना देखेंगे? चलिए सीधे गुड़ी पर!
(दोनों उठकर गुड़ी की ओर चल देते हैं।)

(ज्वाला गुस्से में अख़बार पटकते हैं और सीधे ज्योतिपति से रूबरू होते हैं)

ज्वाला: अरे ज्योतिपति जी! जो ज्यादा समझदार होता है न, उसको राय नहीं दी जाती… लेकिन कल जो धरने पर हुआ, वो देखा आपने? राहुल गांधी जब धरने पर डटकर बैठ गए, तो पुलिस वालों ने उन्हें किस तरह से उठाकर सीधे हॉस्पिटल पहुँचा दिया! ऐसा लगा जैसे कोई बहुत बड़ी एमरजेंसी आ गई हो!

ज्योतिपति: (धीमी मुस्कान के साथ) ज्वाला भाई, यही तो खेल है। पुलिस का काम ही यही है कि माहौल ज़्यादा गरम न हो। जब देखा कि राहुल गांधी हटने वाले नहीं हैं और धरने से राजनीतिक मजबूती मिल रही है, तो कायदा- कानून और सेहत का हवाला देकर गाड़ी में लादा और सीधे हॉस्पिटल ले गए! विरोध करने का मौका ही नहीं दिया।

ज्वाला: बात तो आपकी ठीक है। और सिर्फ़ वही नहीं, शरद पवार और अभिजीत दीपके की जो मुलाक़ात हुई है, उसने भी अंदर ही अंदर खिचड़ी पकानी शुरू कर दी है। उधर रितेश देशमुख ने युवाओं के समर्थन में बोल दिया, तो लड़कों में अलग ही जोश आ गया।

ज्योतिपति: जोश आना तो तय था, पर दूसरी तरफ़ अपने रवि किशन जी को देखो! नीट (NEET) पेपर लीक की गंभीर बात चल रही थी, और जनाब के मुँह से निकल गया ‘अख़बार लीक’! अब पूरे सोशल मीडिया पर हंसी उड़ रही है। जब सत्तापक्ष का बंदा ऐसी बात बोलेगा, तो लोग तो घेरेंगे ही कि मामला कितना गंभीर है और ये लोग इसे कैसे ले रहे हैं।

ज्वाला: सही कह रहे हैं। लेकिन माहौल तब बदला जब सीधे प्रधानमंत्री का बयान आया। उन्होंने साफ़ बोल दिया कि जो भी दोषी हैं, उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा, कड़ी से कड़ी सजा होगी और सरकार छात्रों के साथ खड़ी है।

ज्योतिपति: (गंभीरता से) हुकमरान जब खुद सामने आकर कड़ा बोलने लगे, तो समझो मामला गर्म है। इस बयान से छात्रों को थोड़ी उम्मीद तो जगी है और सरकार ने गिरती स्थिति को सँभालने की कोशिश की है।

लेकिन चौपाल का नियम तो यही कहता है ज्वाला—कि बातें अपनी जगह हैं, अब देखना ये है कि पुलिस और सरकार दोषियों पर कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करती है।


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