राममंदिर चढ़ावा – राम जी की चिड़िया, राम जी का खेत: चौपाल पर महा-संवाद
डिजिटल न्यूज 27 जून 2026/ अयोध्या
ज्योतिपति: गांव के सीधे-साधे बुजुर्ग पुरुष।
ज्वाला: गांव का ही तेजतर्रार और बेबाक युवा पुरुष।
(दृश्य: गांव की चौपाल पर खाट पर बैठे ज्योतिपति और ज्वाला आपस में चर्चा कर रहे हैं। हाथ में मोबाइल लिए ज्वाला इस नए सनसनीखेज केस की परतें खोल रहा है।)
ज्योतिपति:अरे ज्वाला भैया! ज़रा ये खबर तो सुनो। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी हो गई! वो भी एक-दो बार नहीं, पूरे 47 दिनों में 70 बार हाथ साफ़ किया गया है। हे राम, ये कैसा जमाना आ गया?
ज्वाला:अरे ज्योतिपति काका! इसे जमाना खराब होना नहीं, बल्कि ‘घर की खेती’ समझना कहते हैं। मंदिर बने अभी साल भर ही हुआ है कि वहां ऐसा तगड़ा आर्थिक घोटाला हो गया। हम तो इतिहास में पढ़ते थे कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को 17 बार लूटा था, लेकिन यहाँ तो अपने ही लोगों ने सिर्फ 47 दिनों में 70 बार का नया रिकॉर्ड बना दिया!
ज्योतिपति:अरे भाई, 70 बार चोरी? पर वहां तो इतनी सुरक्षा रही होगी। एक हिंदुत्ववादी पार्टी के कारण इतना बड़ा मंदिर खड़ा हुआ, फिर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गया? कौन-कौन लोग शामिल हैं इसमें?
ज्वाला:काका, सुरक्षा तो सिर्फ दिखाने के लिए रही होगी, असली खेल तो अंदर चल रहा था। पुलिस ने पूरा ‘मंदिर लूटो गिरोह’ पकड़ा है। कुल आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू! इन लोगों के पास से अब तक 79.85 लाख रुपये नकद बरामद हो चुके हैं।
ज्योतिपति:राम-राम-राम… यह तो वही बात हो गई कि ‘राम जी की चिड़िया, राम जी के खेत, खा लो चिड़िया भर-भर पेट’। जिसको जहां जितना मिला, वो बटोरने में लगा रहा। पर ये टिन्नू के पास चाबी कैसे आई?
ज्वाला: यही तो सबसे बड़ा तमाशा है, काका! विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, उसे सुनकर सिर घूम जाएगा। नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ी हैं कि दान पात्र यानी हुंडियों की चाबियां बिना किसी अधिकृत आदेश के टिन्नू के पास रहती थीं। यहाँ तक कि ड्राइवर के पास भी चाबियां घूम रही थीं!
ज्योतिपति: क्या बात कर रहे हो? ड्राइवर और टिन्नू के पास चाबियां? लेकिन पैसे संभालने और गिनने का कोई नियम-कानून नहीं था क्या?
ज्वाला:नियम तो बकायदा कागज पर बना था, काका! स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच बाकायदा बैठकर एक SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तय हुई थी। सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में बैठकें हुईं, जिस पर एसबीआई की तरफ से गोविंद मिश्र और ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्रा ने दस्तखत भी किए थे। लेकिन बाद में इस SOP का पालन ही नहीं किया गया। चढ़ावा गिनने वाले कमरे तक कैश ले जाने और उसके रखरखाव में इतनी गंभीर लापरवाही बरती गई कि अब एसबीआई के कुछ कर्मचारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।
ज्योतिपति: यह तो सरासर धोखा है! जब ट्रस्ट को पहले से ही गड़बड़ी की आशंका थी, तो उन्होंने इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू क्यों नहीं किया?
ज्वाला: वही तो बात है, काका। आशंका होने के बावजूद आंखें बंद रखी गईं। अब जब पानी सिर से ऊपर चला गया और एसआईटी की सिफारिश पर एफआईआर दर्ज हुई, तब जाकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने ‘नैतिक आधार’ पर इस्तीफा दे दिया है।
ज्योतिपति: बड़ी विडंबना है भाई। इस देश को हमेशा धर्म के नाम पर ही लूटा गया है। अब तो लोग राम के नाम पर भी परवाह नहीं कर रहे हैं। पर अब आगे क्या होगा? क्या मंदिर का इंतजाम फिर उन्हीं ट्रस्ट वालों के हाथ में रहेगा या सरकार इसकी कोई नई व्यवस्था करेगी?
ज्वाला: सवाल तो यही है, काका। आस्था आम जनता की थी, पैसा भक्तों का था, और डाका अपनों ने ही डाल दिया। अब देखना यह है कि आगे व्यवस्था सुधरती है या फिर चाबियां किसी और ‘टिन्नू’ के हाथ में थमा दी जाती हैं। फिलहाल तो हर चौपाल पर यही चर्चा है कि भगवान के घर में भी ‘लूटतंत्र’ हावी है।
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