प्लास्टिक कचरे से कमाई – कोलिहापुरी की महिलाओं ने कमाए 46 हजार से अधिक,
दुर्ग जिला /कोलिहापुरी – 26 जून 2026
स्वच्छता के साथ आत्मनिर्भरता की लिखी नई इबारत।दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत कोलिहापुरी ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है।
यहां की महिला स्व-सहायता समूहों ने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को आय का सशक्त जरिया बनाकर न केवल गांव को स्वच्छ बनाया, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल के तहत महिलाओं ने घर-घर से संग्रहित 2730 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का पृथक्करण कर उसे अधिकृत रिसाइक्लिंग इकाई को विक्रय किया, जिससे समूह को कुल 46 हजार 410 रुपए की आय प्राप्त हुई।
कोलिहापुरी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित है। महिला समूह की सदस्याएं प्रतिदिन घर-घर जाकर गीला, सूखा और प्लास्टिक कचरा अलग-अलग एकत्र करती हैं तथा ग्रामीणों को स्रोत पर ही कचरा पृथक करने के लिए प्रेरित करती हैं।
इसके पश्चात एकत्रित प्लास्टिक को विकासखंड दुर्ग स्थित एमआरएफ-पीडब्ल्यूएमयू सेंटर भेजा जाता है, जहां पीईटी, एचडीपीई, एलडीपीई सहित विभिन्न श्रेणियों में उसका वर्गीकरण किया जाता है।
गुणवत्ता के आधार पर पृथक किए गए प्लास्टिक को अधिकृत रिसाइक्लिंग इकाइयों को बेचा जाता है और प्राप्त राशि सीधे महिला समूहों के बैंक खातों में जमा की जाती है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका का नया अवसर मिला है और ग्रामीणों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
अब महिलाएं प्लास्टिक कचरे को बेकार वस्तु न मानकर आय के संसाधन के रूप में देख रही हैं।
कोलिहापुरी मॉडल की सफलता से प्रेरित होकर विकासखंड धमधा की ग्राम पंचायत लिटिया तथा विकासखंड पाटन की ग्राम पंचायत पतोरा और गाड़ाडीह में भी इसी तर्ज पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य प्रारंभ किया गया है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी समय में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इस मॉडल का विस्तार करना है, ताकि स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
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